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हिन्दी मीडिया

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31 May 2010
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जातिगणना पर बवाल क्‍यों?

आजकल जाति आधारित जनगणना पर घमासान छिड़ा हुआ है। तमाम समाचारपत्रों लेकर टी0वी0शो तक इस बात को उठा चुके हैं।जहाँ तक सवर्णों की बात है तो लोग ये मान कर चल रहे हैं कि संख्‍या के हिसाब से सत्‍ता और व्‍यवस्‍था में उनकी भागीदारी कई गुना अधिक है और इस जनगणना से
 
राम प्रकाश द्विवेदी
May 31 2010 04:43 PM
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सायबर मीडिया और महिलाएँ

80 के दशक में पश्चिम में इंटरनेट और सायबर मीडिया लोकप्रिय होने लगा था। 1990 के बाद और खास तौर पर इस सदी के प्रारंभ में इसका तेजी से विकास हुआ। आज सायबर मीडिया की पहुँच आम लोगों की ओर उन्मुख है। यह माध्यम अपने चरित्र और इसलिए निजी अभिव्यक्तियों के लिए नया
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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इलेक्ट्रोनिक मीडिया और महिलाएँ

इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों (फ़िल्म,रेडियो,टी.वी एवं इंटरनेट) में महिलाओं की छवि का निर्माण प्रिंट माध्यम की अपेक्षा भिन्न तरीके से हुआ। इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर पूँजी का दवाब प्रिंट की तुलना में अधिक गहरा होता है, इसलिए इन माध्यमों में स्त्री-छवि का विकास(
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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प्रिंट माध्‍यम, महिलाएँ और उनकी छवियाँ

उधर आजादी का आंदोलन जोर पकड़ रहा था तो इधर पत्रकारिता में साप्ताहिक-मासिक की अपेक्षा दैनिको का विकास आरंभ हो गया था। आजादी के पहले दशक (1947-1957) के महत्त्वपूर्ण दैनिकों में नई दुनिया (1947, इंदौर) राष्ट्रदूत(1951,जयपुर) व नवयुग (1955,जयपुर) पंजाब
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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मीडिया और स्त्री : लेखन, अधिकार एवं दायित्व तथा छवि निर्माण

तत्कालीन मीडिया परिदृश्य पर ध्यान देने पर स्त्री विषयक दो परिदृश्य साफ- साफ उभरते हैं- १. पुरुष सुधारवादी नजरिया और २. स्त्रियों की अात्माभिव्यक्ति । पुरुष सुधारवादी नजरिया उस समय के विभिन्न पत्रों एवं पत्रिकाओं में व्यक्त होता रहा है जवकि स्त्रियों का
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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हिन्दी मीडिया

मीडिया ने समाज के उन तबकों की समस्याओं को प्रकाशित किया जो अंधेरे और गुमनामी में कहीं खो गए थे। दुनिया में वैज्ञानिक चेतना का विकास, प्रबोधन (Enlightenment) और जनसंचार माध्यमों का आविष्कार लगभग साथ-सा हुआ है। माध्यम अपनी युग संवेदना के ही वाहक होते हैं
 
राम प्रकाश द्विवेदी
Mar 13 2010 05:34 PM
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बारिश में एक कविता

िसतारों-की झिलमिलाती दीपमालिका। अंधेरी सुबह का जुनून बिखरी हुई हवाअों का झोंका। टप-टप बरसती बूँदें अौर सोंधी महक तुम्हारी स्मृति की। बदली अौर तारे एक साथ विरुद्धों का सामंजस्य तुम अौर तुम्हारी याद
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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गंगटोक-भारत की छत

 
राम प्रकाश द्विवेदी
Dec 29 2009 11:46 AM
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कालिमपोंग की ओर

 
राम प्रकाश द्विवेदी
Dec 29 2009 11:46 AM
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हिन्दी मीडिया

ई-इंडिया २००९ विगत २५-२६-२७ अगस्त को ई-इंडिया कड़ी का पाँचवाँ आयोजन हैदराबाद के अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी केन्द्र में संपन्न हुआ। सूचना अौर संचार क्रांति के भारतीय जीवन में पहुँच अौर प्रभाव संबंधी विविध आयामों पर लगातार तीन दिनों तक चर्चा होती रही। इस
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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पहाड पर बारिश

दूसरी अौर अंतिम किस्तदिल्ली से दार्जिलिंग तक का वृतांत आप सुन चुके हैं।हमारी सहयोगी दीपिका महेंद्रू ने अपनी बेबाक टिप्पणी में कहा है कि कुछ गैर-जरूरी विवरण पुराने वृत्त में आ गए हैं,मसलन एअरलाइंस और होटल के नाम आदि। मैं उनसे सहमत होते हुए भी यह कहना
 
राम प्रकाश द्विवेदी
Sep 14 2009 01:54 PM
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दिल्ली से दार्जिलिंग

जून का महीना आते-आते दिल्ली की सड़कें,बस्तियाँ और चौराहे गर्मी से उबलने लगते हैं। इस बार मन था का भारत के दूरस्थ हिस्से की ओर प्रस्थान किया जाय। अक्सर अपनी यात्रा की रूपरेखा मैं मानचित्र को देखकर बनाता हूँ। इसमें मेरी सहायता राहुल सांकृत्यायन,कृष्णनाथ और
 
राम प्रकाश द्विवेदी
Aug 31 2009 12:39 PM
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िंहदी अकादमी विवाद

िंहदी अकादमी में सुश्री अर्चना वर्मा ने ‘विदूषक के अधीन’ काम करने से मना कर दिया है। उनकी ही राह पर चलते हुए श्री ज्योतिष जोशी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है।नित्यानंद तिवारी को भी यह भय व्याप्त हो गया है कि हिंदी अकादमी मनोरंजन
 
राम प्रकाश द्विवेदी
Jul 28 2009 05:49 PM
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करात साहब क्‍या हाल है।

तीसरा मोर्चा दो कैरट (प्रकाश करात और वृंदा करात) की पार्टी ही सिद्ध हुआ। जातिवादी,अवसरवादी गठजोड़ की प्रकाश करात की कोशिशें नकार दी गई हैं। जिस गैर जिम्‍मेदाराना ढंग से वे अपनी पार्टी का संचालन कर रहे थे,वह किसी पुराने जमींदार का ही स्‍टाइल था। सीपीए
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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विनीत की सार्थक टिपण्णी

विनीत कुमार मीडिया के अध्ययेता हैं। उन्होंने एक माकूल टिप्पणी की है। उसे अविकल दे रहा हूँ जिससे बात आगे बढ़े। हिन्दी मीडिया के उपर ये बात भले ही लागू होती हो कि संचार को सबसे पहले समझने और विश्लेषित करने का काम साहित्य के लोगों ने किया। इसकी बड़ी वजह
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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संचार और समाज के संबंधों की तलाश

संचार माध्‍यमों के सिद्धांतों और उनको समझने का कार्य सबसे पहले साहित्‍य जगत के चिंतकों-विचारकों ने ही शुरू किया। भाषा, संचार की प्राथमिक तकनीकों में सबसे महत्‍त्‍वपूर्ण रही है, यही कारण है कि आज भी साहित्‍य,भाषा और संचार के बीच सीधा और साफ संबंध दिखा
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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तीसरा विकल्‍प और अखबारी लेख

आजकल चुनावी करतब का जोर है इसलिए नए-नए राजनीतिक विश्‍लेषक भी पैदा हो गए है और उनको जगह मुहैया कराते अखबार भी। इन लेखों को आप देखें तो समझ जाएँगें कि ये बौद्धिक जुगाली की बेहतरीन मिसाल पेश करते हैं। बौद्धिक अंधविश्‍वास जैसी उक्ति से भले ही आप न परिचित
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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भूमंडलीकरण अौर स्त्री

आज मंत्रा फाउंडेशन द्वारा अायोजित एक संगोष्ठी में भूमंडलीकरण अौर स्त्री पुस्तक पर परिचर्च हुई। शोधाथर्थी एवं अध्यापक प्रवीण कुमार ने कहा कि बाजार ने स्त्रियों के लिये नये अौर महीन जाल बना लिये हैं,जिनमें वे आसानी से फँसती जा रही हैं।इस समय उन्हें सचे
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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टाइम खराब किया

खचाखच भरी बस में चढ़कर चुपचाप खड़ी एक कोने में थी, वह न कोई संगी-साथी खुद में ही निमग्न । सोच रही थी जाने क्या-क्या? पल-पल झुकाती नजरें अौर उठाती । एक पल मुड़कर देखती कंडक्टर को फिर वापिस चेहरा घुमाती । जाने क्या कहना चाहती थी पर कह नहीं पाती थी । दे
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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गजनी: मर्दवादी पीठ अौर पाठ

िकसी देश का सिनेमा उस देश की सामाजिक-सांस्कृतिक बनावट की पहचान किए ब किना बॉक्स-ऑफिस पर अपनी सफलता दर्ज नहीं कर सकता। गजनी फिल्म ने पहले दो हफ्तों में 200 करोड़ रूपये का व्यापार कर बॉलीवुड में नया इतिहास रचा है।इसकी बॉक्स-ऑफिस की सफलता हमारे समाज के
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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मंत्रा फाउंडेशन

मंत्रा फाउंडेशन के लोग आज दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में जुटे और ‘ वैकल्पिक मीडिया और तकनीक’ के अंतर्संबंधों पर अपने विचार रखे। सबसे पहले निरंजन कुमार ने कंप्यूटर के विकास पर रोशनी डाली और विंडोज़ तथा एप्पल एप्लीकेसन्श के अंतर और उसकी उपयोगिता पर रोशनी ड
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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जनसंचार पर पुस्तक

जनसंचार पर वैसे तो अनेक किताबें मिल जाती हैं,परंतु बलबीर कुन्दरा की पुस्तक "जनसंचार -बदलते परिप्रेक्ष्य में" छात्रोपयोगी दृष्टि से लिखा एक महत्त्वपू्र्ण ग्रंथ है। मीडिया अध्ययन के लगभग सभी क्षेत्रों को इसमें शामिल कर लिया गया है। तक्षशिला प्रकाशन की
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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छत पर गुलाब

मेरी छत पर जब कोई गुलाब खिलता है अनेक यादें भी खिल जाती हैं साथ-साथ। बेटी की जब उसका जन्‍म हुआ और उसकी किलकारियों की शुरूआत । गाँव के अनेक चित्र उभार देता है गुलाब खेतों खलिहानों के और ‘उसके’ जब उसे पहली बार देखा था कुएँ पर हथेलियों के बीच अपना मुँह
 
राम प्रकाश द्विवेदी
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एक पुरानी काविता

८-१०-१९९२ इन शहरों में आकर हम ,दिल से कितने रीते हैं। याद आ रहे वो दिन हमको जो गाँवों में बीते हैं।।१।। कुदक फुदकती उड़न चिरैया,गदराए आमों की डाली शाखा पर बैठे तोता मैना अौ अमराई की हरियाली यहाँ बाहर से सब मधुर-मधुर है,भीतर से सब तीते हैं।याद।२। घलर
 
राम प्रकाश द्विवेदी