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प्राइमरी का मास्टर

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23 May 2010
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हम हैं तो आखिर वही सड़ी मिडिल क्लास मेंटेलिटी वाले ....

"तुम लोगों को देखते हो -- वे दुखी हैं क्योंकि उन्होंने हर मामले में समझौता किया है, और वे खुद को माफ नहीं कर सकते कि उन्होंने समझौता किया है। वे जानते हैं कि वे साहस कर सकते थे लेकिन वे कायर सिद्ध हुए। अपनी नजरों में ही वे गिर गए, उनका आत्म सम्मान खो
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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जमीनी स्तर क्या कोई नया परिवर्तन का वाहक बन सकता है "ब्लॉग" ?

नीचे टंगा लिंक श्यामपट में चिपका है   अपनी पहली ब्लॉग पोस्ट  का ! जिसे देखकर अपने स्व-प्रेरित मानसिक-ब्लॉग-व्रत को तोड़ने का मन बना |जरूरत एक नए ब्लॉग की ......?आवश्यकता आविष्कार की जननी है | बगैर ज़रूरत के किसी चीज़ का जन्म नहीं हो सकता है |
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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क्या आप इंटेलिजेंट समझते हैं अपने ...तो डरते क्यों हैं मूर्ख बनने से ? ज़रा हिम्मत तो दिखाइए !

ऐसा माना जा सकता है कि पूरे साल भर सच बोल-बोलकर ऊब जाने के बाद ही ऐसे किसी  मूर्ख  (फूल )दिवस के बारे में किसी ने शायद सोचा होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या आज  भी ऐसे किसी दिवस की दरकार है, जबकि लोग साल भर दूसरे को टोपी पहनाने  के
 
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देश में एक पाठक्रम लागू करने के अभियान को जोर का झटका

देश में एक पाठक्रम लागू करने के मानव संसाधन विकास मंत्रालय व नेशनल करीकुलम फ्रेमवर्क (NCF-2005) के अभियान को जोर का झटका लगा है। राष्ट्रीय पाठक्रम के तहत पहले चरण में एनसीईआरटी ने विज्ञान, गणित और हिंदी की किताबें तैयार कीं लेकिन उसकी विषयवस्तु और भाषा
 
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कम सीखा तो क्यों और पूरा सीख गया तो कैसे ?

यदि आप थोड़ा सा भी सोंचे तो पायेंगे कि मानव किसी न किसी रूप मे अपना मूल्यांकन करता आया है और उस मूल्यांकन के आधार पर अपनी जीवन की दशा और दिशा को निर्देशित करता आया है। हम यह भी जानते हैं की एक ग़लत मूल्यांकन किसी के भी जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता
 
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यही कारण है कि... बच्चे विद्यालय से ऐसे निकल भागते हैं जैसे जेल से छूटे कैदी।

पिछली कड़ी में आपने अब तक पढ़ा कि.... बच्चों के साथ एक तरह के विशेष अनुशासन की आवश्यकता सदैव ही पड़ती है। अनुशासन बनाये रखने के नाम पर दण्ड, का बहुतायत से प्रयोग किया जाता है। भय-दण्ड में गहरा अन्तर्सबंध है। बच्चे भय के सम्मुख असहाय हो जाते हैं और सीखने
 
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कौन इन्कार कर सकता है...... कि यह आवश्यक है ? पर.....

कौन इन्कार कर सकता है...... कि बच्चों के समूह के साथ काम करते समय एक तरह के विशेष अनुशासन की आवश्यकता सदैव ही पड़ती है। आमतौर परअनुशासन बनाये रखने के नाम पर दण्ड, का बहुतायत से प्रयोग किया जाता है।जिसके कभी -कभी बड़े घातक परिणाम वाली घटनाओं की चर्चा समाज
 
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कौन इन्कार कर सकता है...... कि यह आवश्यक है ? पर.....

कौन इन्कार कर सकता है...... कि बच्चों के समूह के साथ काम करते समय एक तरह के विशेष अनुशासन की आवश्यकता सदैव ही पड़ती है। आमतौर परअनुशासन बनाये रखने के नाम पर दण्ड, का बहुतायत से प्रयोग किया जाता है।जिसके कभी -कभी बड़े घातक परिणाम वाली घटनाओं की चर्चा समाज
 
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किताबों के संग

चिट्ठाकारी की सबसे बड़ी आवश्यकता निरंतरता है ….जो हम जैसे नौसिखियों के लिए बड़ी भारी पडती है सो कुछ ना कुछ छापने की  अपनी इन्स्टैंट छपास के क्रम में आज पेश है ….अपने कलाम साहब की पुस्तकों के बारे में चंद  लाइने ! आधी सदी से अधिक का वक्त मैंने
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
टैग: किताब
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…....क्या कहूँ ? नए वर्ष की शुभकामनायें !

    एक वर्ष बीता …सो अगला आया | कुछ विशेष कहने को नहीं | कई प्रश्न और विचार मन में …… पर  कदाचित मौन भी कई प्रश्नों का जवाब होता है?  इसलिए मात्र नव-वर्ष की बधाई स्वीकार करें |
 
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काहे नहीं बताते कि कौन सा डिजिटल कैमरा लिया जाय ?

कहतें हैं कि सीखना मनुष्य की प्रकृति है सो ….अपने इलाहाबाद संगोष्ठी से मिले अनुभवों से हमने जाना कि एक अदद कैमरे के बगैर हमारी ब्लॉग्गिंग की गाड़ी सुचारू रूप से नहीं चल सकती ..सो हमने अब निर्णय कर लिया है कि अब एक डिजिटल कैमरा ले ही लिया जाय | आप सभी&
 
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एक मौन सन्देश - माइक्रो फोटो पोस्ट !!

गणित आपकी राय ? a2a_linkname=document.title;a2a_linkurl="http://primarykamaster.blogspot.com/";
 
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लीजिये हाजिर है : हिन्दी में LinkWithin टाइटल (रिलेटेड पोस्ट विजेट) जी हाँ हिंदी में !

आ ज अगर आप पूरे ब्लॉग में ध्यान से देखें तो थोडा भी तकनीकी रूप से सक्षम ब्लॉगर के ब्लॉग में रिलेटेड पोस्ट विजेट के रूप में आपको LinkWithin का विजेट अवश्य मिल जाएगा | दरअसल अपने कई गुणों  के चलते लगभग प्रत्येक सक्रिय ब्लॉग में इसकी उपस्थिति मिल ज
 
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पुराना इतिहास डराता है कि बच्चा बोरिया बिस्तर बाँधने का समय आ गया है ?

ब्लॉग्गिंग की उलझनों पर बहुत बड़े -बड़े ज्ञानी कह गए सो हमारी क्या बिसात? फिर भी मन में था जो वह ठेल ही दिए.....शायद यह अपनी ब्लॉग्गिंग यात्रा का अगला पड़ाव ही हो ? कु छ कुछ किताबी या बहुत कुछ किताबी होती जा रही अपनी ब्लॉग्गिंग यात्रा पर बहुत दिन से क
 
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क्या सरकार उठा पायेगी इतना भार ?

गौरतलब है! कि बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की चुनौतियों से निपटने के लिए सूबे में तात्कालिक तौर पर 7000 नये स्कूलों और 90,000 अतिरिक्त क्लासरूम की जरूरत होगी। मौजूदा एक लाख स्कूलों को चहारदीवारी से घेरने की जरूरत
 
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केसरिया बालम आवो नीं पधारो म्हारै देस

मारू थारा देस में निपजै तीन रतन, इक ढोलो, दूजी मारवण, तीजो कसूमल रंग।।केसरिया बालम आवो नीं पधारो म्हारै देस।।केसर सूं पगल्या धोवती भले पधारो पीव, और बधाई या करूं, पल-पल वारूं जीव।।केसरिया बालम आवो नीं पधारो म्हारै देस।।
 
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बिन गुरु ज्ञान कहाँ से लाऊं?

शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल सुधार के कार्यक्रम में योग्य एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी चिंता का विषय है। लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षक अभी भी हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के सपनेका सबसे बड़ा व्यवधान यह ह
 
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बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दिलाने की डगर पर चलना उत्तर-प्रदेश के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण

केंद्र सरकार के अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार देने के बावजूद जमीनी हकीकत क्या है ?यह सवाल उत्तर-प्रदेश जैसे पिछडे राज्यों के सन्दर्भ में और अधिक प्रश्न खड़े करता है | यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इन आने वाली जमीनी दुश्वारियों से कैसे न
 
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ऐसा क्या है, इसे खेलने में जो हमें देखना चाहिए? वह हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं ?

ब चपना, खेलने और पढ़ने का होता है, लेकिन अब तो पढ़ाई का ही बोझा इतना अधिक हो गया है कि नौनिहालों का बचपना ही छिन गया है। पहले की तरह न वह उछल कूद कर पाते हैं और न ही बुआ, चाचा, ताई, बाबा, दादी आदि का सानिध्य पा रहे हैं तभी तो उनका मन बोझिल होता जा रह
 
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इस तरह हम भी पहुंचे हिंदी चिट्ठाकारी की दुनिया - राष्ट्रीय संगोष्ठी में

ज बसे सत्यार्थमित्र वाले सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी   और संयोजक संतोष भदौरिया का इ-निमंत्रण पत्र आया था , उसके  पहले ही हम पूरी तरह से अपना बस्ता (प्राइमरी का मास्टर और क्या ले जाता?) तैयार करके आयोजन में शामिल होने को तत्पर थे | पहले सोचा कि
 
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गणित ही थी जिसने सबसे पहले दर्शन से अपने को पूरी तरह से मुक्त कर लिया

चूं कि दर्शन  किसी विषय  के सभी पहलुओं पर विचार करता है ...सो गणित पर दर्शन के सम्बन्ध पर बात किये बिना इस विषय की समाप्ति सम्पूर्णता  पर प्रश्न चिन्ह लगाती | सो गणित शिक्षण और उसके सौंदर्य  से जुडी अंतिम किस्त .....जिसमे गणित पर
 
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प्रयोगात्मक पोस्ट : कृपया नजरअंदाज करें!

पुरालेखागार -------------------------------------- प्राइमरी का मास्टर ▼  2009 (80) ▼  October (10) दीपावली की शुभकामनाएं !! : स्नेह अपना दो ना दो,... कुतर्क का कोई स्थान नहीं है जी.....सिद्ध जो करना प... .....यह सब गणित की सामर्थ्य को बढ़ाता
 
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दीपावली की शुभकामनाएं !! : स्नेह अपना दो ना दो, दीप बन जलता रहूँगा|

मे री भाव-कामनाएं !! स्नेह अपना दो ना दो, दीप बन जलता रहूँगा|         हर अंधेरी रात में,         जब अकेले ही चलोगे         तुम्हारी राह का तम &nb
 
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कुतर्क का कोई स्थान नहीं है जी.....सिद्ध जो करना पड़ेगा?

प्रमाण महत्वपूर्ण है, लेकिन निगमनात्मक (निगमन-आधारित) प्रमाण के साथ बच्चों को यह भी जानना चाहिए कि चित्र व निर्मित  प्रमाण कब और क्या क्या प्रदान कर सकते हैं। प्रमाण देना एक ऐसी प्रक्रिया है जो संशय (शंका) करने वाले विरोधी पक्ष को आश्वस्त (और शा
 
प्रवीण त्रिवेदी PRAVEEN TRIVEDI
Oct 15 2009 04:23 AM
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जरूरत केवल इस विश्वास की है कि .......

बहुत से बच्चे गणित से डरते हैं और इस विषय में असफलता से भयभीत रहते हैं। जबकि ज्यादातर यह भय स्वजनित ना होकर पराजनित होता है |परिणामतः  वे जल्दी ही गणित की गंभीर पढ़ाई से विमुख हो जाते हैं।यह परिस्थिति  केवल इससे विमुख होने वालों के लिए ही नि
 
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फुरसतिया जी ने सही कहा यह चिट्ठाकारी तो निन्यानवे का फेर है.......और हम पड़े 99 के चक्कर में ?

वैसे फुरसतिया जी ने सही कहा यह चिट्ठाकारी तो निन्यानवे का फेर है, जो न फंसा वही सुखी। जो फंस गया वो बेचारा टिप्पणियों और ब्लॉग को हिट करने के चक्कर में दुबला हुआ जाता है। यों तो निन्यानबे का चक्कर मुहावरों में बहुत पहले से चला आ रहा है कबीर ने कहा ’’
 
प्रवीण त्रिवेदी PRAVEEN TRIVEDI
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प्रत्येक बच्चे के साथ इस विश्वास के आधार पर काम करे कि

अब बात करेंगे उन लक्ष्यों की जो हम चाहेंगे गणित शिक्षण से प्राप्त हों | (ध्यान दें - लक्ष्य का निर्धारण लक्ष्य प्राप्ति का पहला कदम है|) इसलिए सबसे पहले जरूरी है कि बच्चे को - स्कूली गणित का गूढ़ दर्शन समझाने के बजाय कुछ प्रारंभिक तरीके से उनमे गणित
 
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कुछ तो है उस दंडधारी शख्स में ....?

पता नहीं ? क्यों पर गाँधी जी मुझे किसी ना किसे कारणवश आकर्षित करते रहे हैं ....... पर शायद अनुयायी बनने की हद तक तो नहीं ! कुछ तो उस दंडधारी शख्स  में है जो सत्य और अहिंसा की बातें करते हुए आम आदमी की हद से आगे बढ़ता हुआ चला जाता है | बाकी असहमत
 
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गणित शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी के दिमाग को आकर्षित करने के लिए क्या कर सकती है?

गणित की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चे की गणितीकरण की क्षमताओं का विकास करना है। स्कूली गणित का सीमित लक्ष्य मुझे यही समझ आया है कि `लाभप्रद´ क्षमताओं का विकास, विशेषकर अंक ज्ञान-संख्या से जुड़ी क्षमताएँ, सांख्यिक संक्रियाएँ, माप, दशमलव व प्रतिशत। मुझ
 
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.....यह सब गणित की सामर्थ्य को बढ़ाता है।

प्रत्यक्षीकरण और निरूपण ऐसे कौशल हैं जिनको विकसित करने में गणित सहायक हो सकता है। परिमाण, आकार व रूपों का प्रयोग करके स्थितियों का प्रतिरूपण करने में गणित का सर्वश्रेष्ठ  प्रयोग होता है। गणितीय अवधारणाओं को भी कई तरीकों से निरूपित किया जा सकता ह
 
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ऑनलाइन आमंत्रण स्वीकार करें.....

आइये मदद के इस सफर में हम आप हम-राही बने !!! कई बार नए चिट्ठाकारों को नई जानकारियों , या तकनीकी शब्ब्दों या कई अन्य समस्यायों को लेकर बड़ी दिक्कतें आती हैं !! इसी प्रयोजन से यह चिटठा "ब्लॉग मदद "बनाया गया था  !! कृपया इस चिट्ठे को "सभी के द्वारा
 
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर
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मिड डे मील ....... पढ़ाई-लिखाई सब साढ़े बाइस !!

मास्टर जी छात्रों से इन दिनों होमवर्क नहीं बल्कि मध्याह्न भोजन का स्वाद पूछते हैं। मध्याह्न भोजन की निगरानी के बोझ तले दब कर शिक्षक शिक्षा की मुख्य धारा से दूर होते जा रहे हैं। विद्यालयों में दिनभर बर्तनों की खनक के बीच अभिभावकों और शिक्षकों के अरमान
 
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माइक्रो पोस्ट ठेलक

पिछले 3-4 महीनो के बीच जारी क्रमिक अनुपलब्धता  के बीच यह परिवर्तन !!   कैसा लगा आपको ?हैं ना ठेठ मास्टरी टाइप!!a2a_linkname=document.title;a2a_linkurl="http://primarykamaster.blogspot.com/";
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
Sep 22 2009 04:00 AM
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कक्षा 9 के छह विषयों में नया पाठ्यक्रम अब आन लाइन

माध्यमिक शिक्षा परिषद  ने कक्षा 9 के छह विषयों में परिवर्तित पाठ्यक्रम को तैयार करके उसे आन लाइन कर दिया है। कई  महीनो  की लंबी कवायद के बाद इसे सार्वजनिक किया  गया है। प्रत्येक विषय को एक पुस्तक में समेटने का प्रयास किया गया है। किस
 
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अब रटंत प्रणाली वाली शिक्षा को दरकिनार कर प्रयोगात्मक शिक्षा आत्मसात करेंगे

मूल मुद्दों पर  ध्यान देने के साथ पाठ्यक्रम परिवर्तन शायद अधिक प्रभावी होता ...... पर एक अच्छी पहल जिसे अनवरत जारी रहना चाहिए |बच्चे अब रटंत प्रणाली वाली शिक्षा को दरकिनार कर प्रयोगात्मक शिक्षा आत्मसात करेंगे। विद्यालय स्तर पर शिक्षकों को शिक्षण
 
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यह है डिप्लोमेसी

आर्कियोलोजी (archeology) में जो चीजें छुपी हैं , उन्हें आप सबके सामने लाने की कोशिश करते हैं ....... जबकि ......डिप्लोमेसी (diplomacy) में जिसे सब जानते हैं ; उसे सब छुपाने की कोशिश करते हैं |थॉमस पिकरिंग
 
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अब सुध आयी PRE- PRIMARY CLASSES चलाने की ...

बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने व इन कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों का पढ़ाई से मोहभंग रोकने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के पिटारे में इस बार भी कई योजनाएं हैं , जिनके पीछे विचार तो सकारात्मक हैं ...पर क्रियान्वन शून्य !!! बेसिक शिक्षा परिषद द्व
 
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर
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एक बार फिर पाठ्य-पुस्तकों में बदलाव :कुछ बढ़िया पर कुछ भ्रम पूर्ण

नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क के सुझावों के बाद राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद ( एससीईआरटी ) ने किताबों के कलेवर और कोर्स में बदलाव की प्रक्रिया काफी पहले से ही शुरू कर दी थी। इस बार करीब पन्द्रह किताबों के कलेवर और कोर्स में बदलाव किया गया है। जहाँ तक मेरी
 
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर
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फीस वृद्धि पर वही पुराणी सरकारी गोली मतलब नए दिशा निर्देश

सरकार ने हाल में ही उठ रहे फीस वृद्धि के बवंडर को थमने के लिए पूरा का पूरा एक पोथा भरके निर्देश जारी तो कर दिए हैं ...... पर होगा क्या ? वह हम आप सब जानते हैं ? क्योंकि यह राग माला तो हम सब जानते ही चले आ रहे है ... पिछले कई सालों से !! प्रदेश में का
 
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर