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मंत्र-तंत्र-यंत्र विज्ञान

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08 May 2010
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तिमिर

सूर्य की रश्मियों से ही चन्द्रमा में प्रकाश है और वह प्रकाशवान दिखाई देता है| जबकि यह दृश्य प्रत्यक्षतः स्पष्ट दिखाई नहीं देता है, कि सूर्य का प्रकाश चन्द्रमा पर है और अन्य तारा मंडल पर पड़ रहा है और वे उसी से जगमगा रहे हैं| यह सब अदृश्य रूप से होता है
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कुल देवता - कुल देवी साधना

जिनकी कृपा से कु;परिवार में शान्ति एवं सम्पन्नता आती है| कुल देवी-कुल देवता पुरे परिवार की रक्षा करते हैं, आने वाले संकटों को हटा देते हैं| इसीलिए सारी पूजाओं में यज्ञ में कुल देवता-देवी पूजा का विधान है, कुल देवी-कुल देवता साधना करने से परिवार में पितृ
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गुरु कृपा से कुल देवी की कृपा

गुरु आये और मैं जान भी नहीं पाया लेकिनगुरुदेव तो कृपालु है,इस जन्म के क्या पूर्व जन्म के शिष्यों का ध्या रखते है जब मैंने कुल देवी की कृपा प्राप्त की यद्यपि मैं संन्यासी तो नहीं रहा हूं, पर अपनी आदतों और स्वाभाविक प्रवृत्तियों को देखकर मैं अपने आप को
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वास्तविक तंत्र क्या है ?

- ऐसी ही कुछ सामाजिक कुरीतियों के कारण तंत्र जैसी गौरवशाली विधा घृणित हो गई, परन्तु तंत्र में बलि का तात्पर्य क्या नर बलि या पशु बलि से है ? मंत्र साधनाओं एवं तंत्र के क्षेत्र में आज लोगों में रूचि बड़ी है, परन्तु फिर भी समाज में तंत्र के नाम से अभी भी
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समर्पण

कथा महाभारत के युद्ध की है| अश्वत्थामा ने अपने पिता की छलपूर्ण ह्त्या से कुंठित होकर नारायणास्त्र का प्रयोग कर दिया| स्थिति बड़ी अजीब पैदा हो गई| एक तरफ नारायणास्त्र और दुसरी तरफ साक्षात नारायण| अस्त्र का अनुसंधान होते ही भगवान् ने अर्जुन से कहा - गांडीव
Feb 28 2010 06:31 PM
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शिवरात्री विशेष प्रार्थना

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुः साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः अखण्ड मंडलाकार व्याप्तं येन चराचरम तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरुवे नमः गुरुदेव ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव स्वरूप हैं| तथा साक्षात परब्रह्म स्वरुप हैं उन्हें
Feb 12 2010 09:43 AM
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दुर्लभ यंत्र और माला

साबर धनदा यन्त्र क्या आपको मालूम है कि साबर मन्त्रों के जप की अजीबो गरीब व अटपटी शब्द रचना होते हुए भी ये अत्यंत प्रभावी और तीक्ष्ण होते है? क्या आपको ज्ञात है, कि साबर साधनाओं में विशेष तंत्र क्रियाओं या कर्मकांड आदि की आवश्यकता नहीं होती? क्या आपको
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श्री नारायण दत्त श्रीमालीजी - भाग ५

हमारे पूर्वजों और ऋषियों के पास विशिष्ट सिद्धियां थी, परन्तु उनमें से काल के प्रवाह में बहु कुछ लुप्त हो गईं| उनमें भी बारह सिद्धियां तो सर्वथा लोप हो गईं थी, जिनका केवल नामोल्लेख इधर उधर पढ़ने को मिल जाता था पर उसके बारे में न तो किसी को प्रामाणिक ज्ञान
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भैरवी - भाग १

स्त्री केवल वासनापूर्ति का एक माध्यम ही नहीं, वरन शक्ति का उदगम भी होती है और यह क्रिया केवल सदगुरुदेव ही अपने निर्देशन में संपन्न करा सकते हैं।तंत्र के क्षेत्र में प्रविष्ट होने के उपरांत साधक को किसी न किसी चरण में भैरवी का साहचर्य ग्रहण करना पड़ता
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राहु यंत्र

जब राहु को अपने अनुकूल बना लिया है तो क्यों घबराते है जीवन की विपरीत स्थितियों में, क्योंकि राहु प्रदान करता है हिम्मत, साहस, शौर्य वाहन सुख, शक्ति और राहु समाप्त करता है दुःख, चिंता, दुर्भाग्य और संकट, बस आप कीजिये विधिवत राहु मंत्र जप। इसे किसी भी
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सर्वोच्च अनुभूति

अनुभूतियों की बात कितनी भी करें...परन्तु जब बछडा दौड़ कर अपनी माँ के थन से दूध पीने लगता है, तो उसे क्या अनुभूति होती है ?जब गौरैया का छोटा सा बच्चा अपनी माँ के डैनों में दुबक कर अपने को सुरक्षित महसूस करने लग जाता है, तो उसे क्या अनुभूति होती है ?और
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गुरु पादुका स्तवन

ॐ नमो गुरुभ्यो गुरुपादुकाभ्यो नमः परेभ्यः परपादुकाभ्यः ।आचार्य सिद्धेश्वर पादुकाभ्यो नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्यः ॥१॥मैं पूज्य गुरुदेव को प्रणाम करता हूँ, मेरी उच्चतम भक्ति गुरु चरणों और उनकी पादुका के प्रति हैं, क्योंकि गंगा -यमुना आदि समस्त नदियाँ और
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कुछ विशेष रोग निवारण मंत्र

यों तो किसी भी समस्या के समाधान हेतु अनेको उपाय हैं। परन्तु मंत्रों के माध्यम से समस्या के निवारण के पीछे धारणा यह है कि मंत्र शक्ति एवं दैवी शक्ति के द्वारा साधक को वह बल प्राप्त होता है जिससे कि किसी भी समस्या का समाधान सहज हो जाता है। उदाहरण के लि
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आर्य संस्कृति के रक्षक

प्रिया आत्मीय बंधुओं,समय का चक्र अपनी गति से चलता रहता है। उस गति में हर क्षण नित्य नवीन होता है। पुराने क्षण से अलग कुछ नया करने का आह्वान करता है। जीवन को लम्बी यात्रा न मानकर क्षण-क्षण जीने में ही आनन्द है और जो जीवन को भार समझाते हैं, यह कि जीवन
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श्री नारायण दत्त श्रीमालीजी - भाग ४

सिद्धाश्रम के संचालक, 'परमहंस स्वामी सच्चिदानन्द जी है', वे तो अपने-आप में अन्यतम,अद्वितीय विभूति हैं, समस्त देवताओं, के पुंञ्ज से एकत्र होकर के उनका निर्माण हुआ है, सब देवताओं ने अपना-अपना अंश देकर के ऐसे अदभुद व्यक्तित्व का विकास किया है, जिन्हें स
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पत्रिका की मुफ्त में वार्षिक सदस्यता

जय गुरुदेव, अगर आप मंत्र-तंत्र-यंत्र विज्ञान पत्रिका की मुफ्त में वार्षिक सदस्यता चाहते है तो कृपया आप का सम्पूर्ण पता भेजिए. (Please send your complete postal address in English only & for residents of india only). Mail: mtyvsid@gmail.com धन्यवाद वि
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श्री नारायण दत्त श्रीमालीजी - भाग ३

परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्द जी का व्यक्तित्व अपने-आप में अप्रतिम, अदभुतऔर अनिर्वचनीय रहा है। उनमें हिमालय सी ऊंचाई है, तो सागरवत गहराई भी; साधना के प्रति वे पूर्णतः समर्पित व्यक्तित्व हैं, तो जीवन के प्रति उन्मुक्त सरल और सहृदय भी; वेद, कर्मकांड और
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श्री नारायण दत्त श्रीमालीजी - भाग २

परमपूज्य सदगुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी एक ऐसे उदात्ततम व्यक्तित्व हें, जिनके चिन्तन मात्र से ही दिव्यता का बोध होने लगता हैं। प्रलयकाल में समस्त जगत को अपने भीतर समाहित किए हुए महात्मा हिरण्यगर्भ की तरह शांत और सौम्य हैं। व्यवहारिक क्षेत्र में
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श्री नारायण दत्त श्रीमालीजी - भाग १

चौरासी लाख योनियों में जीव जन्म लेते-लेते अंत में मनुष्य को जन्म मिलता है। मनुष्य योनी में भी जीवन के अनेक रसों, भोगों में लिप्त होने बाद जब उसे जीवन की निःस्सारता का बोध होता है, वहीं क्षण इश्वर के पथ पर, आत्म कल्याण एवं परमानंद के पथ पर बढ़ा पहला क
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महालक्ष्मी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसी दिन सेवत, हर विष्णु धाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ... उमा, रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ... दुर्गा रूप निरंजनि, सुख संपत्ति दाता । जो कोई तुमक
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शंकराचार्य विचारित - लक्ष्योत्तमा साधना

आदिगुरू शंकराचार्य के सम्बन्ध में हजारों कथाएं हैं उनमें से कुछ कथाएं उनके शिष्यों, भक्तों के अनुभव के आधार पर रचित की गई। इन सब कथाओं के सार में एक बात पूर्ण रूप से स्पष्ट होती है कि शंकराचार्य ने अपनी जीवन यात्रा में योगियों, यतियों और सन्यासियों से
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जब गुरुदेव से प्राप्त हुई - पराम्बा दीक्षा

जिस प्रकार एक बालक मां के गोद में होता है और मां उसके सर पर हाथ फेरती हुई निर्भयता प्रदान करती है उसी प्रकार सदगुरुदेव अपने शिष्य के मस्तक ललाट पर स्पर्श कर उसे शक्ति से युक्त करते है। यही तो शक्तिपात की क्रिया है। जिसमे शक्ति का एक अविरल प्रवाह गुरु से
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मैं तुम्हें उन इन्द्र धनुष के रंगों पर ...

गुरु पूर्णिमा पर सदगुरुदेव ने आहवान किया था यह शिष्य पूर्णिमा हैमैं तुम्हारें पिछले कई जन्मों का साक्षीभूत हूंमैंने अपना खून देकर तुम्हें सींचा हैमैं तुम्हारा हर दृष्टी से रखवाला हूंयह पर्व सही अर्थों में गुरु का पर्व है ही नहीं, यह तो शिष्य पर्व है,
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ज्ञान वही है, जो व्यवहार में काम आए

आचार्य बहुश्रुत के पास कई शिष्य रहते थे। उनमें से तीन शिष्यों की विदाई का जब अवसर आया, तब आचार्य ने कहा - कल प्रातः काल मेरे निवास पर आना। कल तुम्हारी आखिरी परीक्षा होगी। फिर तुम्हें घर जाने की अनुमति दूंगा। आचार्य बहुश्रुत ने रात्री में कुटिया के मा
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उर्वशी साधना - सौन्दर्य, सुख प्रेम की पूर्णता हेतु

रम्भा, उर्वशी और मेनका तो देवताओं की अप्सराएं रही हैं, और प्रत्येक देवता इन्हे प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहा है। यदि इन अप्सराओं को देवता प्राप्त करने के लिए इच्छुक रहे हैं, तो मनुष्य भी इन्हे प्रेमिका रूप में प्राप्त कर सकते हैं। इस साधना को सि
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वास्तविक ज्ञान

कनखल के समीप गंगा किनारे महर्षि भारद्वाज और महर्षि रैभ्य के आश्रम थे। दोनों में मित्रता थी। रैभ्य और उनके दोनों पुत्र परम विद्वान् थे तथा लोक में सम्मानित भी। भारद्वाज तपस्वी थे, किन्तु अध्ययन में रूचि न थी। भारद्वाज के पुत्र यवक्रीत भी पिता की भांति
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गुरु प्राप्ति - एक लक्ष्य

मनुष्य अपने आप में अधूरा और अपवित्र है। वह अपने आपको पूर्ण कहता है, मगर पूर्ण है नहीं, क्योंकि उसके जीवन में कोई न कोई अधूरापन रहता ही है, धन है तो प्रतिष्ठा नहीं, प्रतिष्ठा है तो पुत्र नहीं है, पुत्र है तो सौभाग्य नहीं, सौभाग्य है तो रोग रहित जीवन न
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शक्तिपात युक्त - दस महाविद्या दीक्षा

दस महाविद्या दीक्षाजिसे प्राप्त करना ही जीवन की पूर्णता कहा गया हैइस सृष्टि के समस्त जड़-चेतन पदार्थ अपूर्ण हैं, क्योंकि पूर्ण तो केवल वह ब्रह्म ही है जो सर्वत्र व्याप्त है। अपूर्ण रह जाने पर ही जीव को 'पुनरपि जन्मं पुनरपि मरणं' के चक्र में बार-बार स
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भैरव और कापालिक

मनाली से चालीस किलोमीटर दूर अव्यय पहाड़ प्रसिद्द है। एक बार हम सब उसी पहाड़ की चोटी पर बैठे हुए थे। स्वामी जी (मेरे गुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी जब वे संन्यस्त थेदैनिक पूजा संपन्न कर गुफा से बाहर निकले ही थे कि हम सबको देखकर उन्होनें आशीर्वचन क
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तंत्र की दृष्टी में होली एक विशेष पर्व

तंत्र के आदि गुरु भगवान् शिव माने जाते है और वे वास्तव में देवों के देव महादेव है। तंत्र शास्त्र का आधार यही है की व्यक्ति का ब्रह्म से साक्षात्कार हो जाये और उसका कुण्डलिनी जागरण हो तथा तृतीय नेत्र (Third Eye) एवं सहस्रार जागृत हो।भगवान् शिव ने प्रथ
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मंत्र शक्ति

भगवान् राम के पूर्वज सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के जीवन का एक प्रसंग है - एक बार लंका नरेश रावण, राजा हरिश्चंद्र की तपश्चर्या से प्रभावित होकर उनके दर्शन करने आया। राजमहल के द्वार पर पहुंचकर रावण ने द्वारपाल को अपने आने का प्रयोजन बताया और कहा - 'मैंने
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सदगुरुदेव का नव वर्ष संदेश - जिन्हें अवश्य अपनाएं

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, हमें गर्व है कि हमारा सिद्धाश्रम साधक परिवार, सद्गुरु कृपा से निरंतर बढ़ता जा रहा है। अब समय आ गया है कि यह परिवार संगठित रूप से महान कार्य कर सकता है और प्रत्येक साधक क्रियाशील है। साधक और शिष्य होने के साथ आपका घर-परिव
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मेधा सरस्वती साधना

बालकों में ज्ञान चेतना, स्मरण शक्ति अभिवृद्धि हेतु बालकों में सीखने समझने की क्षमता विशेष रूप से होती है इसलिए बालकों को सरस्वती-साधना अवश्य करनी चाहिए। यह केवल उनका ही नहीं, उनके माता-पिता का भी कर्तव्य है कि बालक सरस्वती-वन्दना नियमित रूप से अवश्य