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जज्‍बात

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13 Jun 2010
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टृक हादसा ही तो है भोपाल गैस कांड

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एएम अहमदी के इस फैसले पर काफी हायतौबा मचाई जा रही है कि उन्‍होंने भोपाल गैस हादसे से जुडी धाराओं में बदलाव कर इसे मामूली टृक हादसे सरीखा बना दिया, मुझे लगता है कि उन्‍होंने ठीक ही किया, हमारे देश में कानूनों और उनका पालन
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आखिर एंडरसन ने किया क्‍या है

भोपाल गैस हादसे के लिए इन दिनों हर कोई एंडरसन के पीछे हाथ धोकर पडा हुआ है, मानो उसे पकड लिया तो भोपाल में हुई 25 हजार मौतों और लाखों लाइलाज बीमारियों का हल मिल जाएगा, दुख तो इस बात का है कि भोपाल में गैस हादसा होने देने के लिए एंडरसन की यूनियन कार्बाइड
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लक्ष्‍मी की जिद

लक्ष्‍मी अपने साथ हुए अन्‍याय का प्रतिकार करना चाहती है। पिछले साल 24 नवंबर को सरे राह कुछ मध्‍यम वर्गीय कथित शहरियों ने उसका चीरहरण किया था। उसके शरीर पर वस्‍त्र का एक टुकड़ा भी नहीं रहने दिया गया था। शहरियों की यह नाराजगी इसलिए थी कि लक्ष्‍मी असम क
Dec 29 2009 11:57 AM
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अभी तो बस इतना ही

दोस्‍तो, अभी तो बस इतना ही कहना चाहता हूं कि बहुत दिनों से लिख नहीं पाया इसका खेद है। दिल से माफी मांगता हूं। इसका एक कारण तो यह था कि कुछ घरेलू काम ज्‍यादा समय मांग रहे थे और दूसरा मुख्‍य कारण यह था कि जिन मुद़दों पर लिखने का मन था वे जितना समय मांग
Dec 29 2009 11:57 AM
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भय और भ्रम का बाजार

भय बिनु होई न प्रीति', यानी बिना डर के दोस्ती नहीं होती। यह पुरानी कहावत है। इसका नया स्वरूप यह है कि 'भय बिनु होई न बिक्री'। यानी डर के बिना बाजार में माल बेचना संभव नहीं है। जी हां, डर या भय यानी इंसान की सबसे महत्वपूर्ण भावना। पहले जिस डर का इस्ते
Dec 29 2009 11:57 AM
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मेरा पैसा मेरा देश

आज इस देश को अपने सांसदों पर बलिहारी होना चाहिए। अबतक जो कुछ वे संसद से बाहर करते आए हैं आज वही 'दुस्‍साहस ' उन्‍होंने संसद के भीतर अंजाम देकर देश को साफ तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी करनी और कथनी का अंतर किस तेजी से घटता जा रहा है। आज
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और आप कहते हैं नक्‍सलवाद बढ़ रहा है

देश में बढ़ता नक्‍सलवाद हमारे, आपके सभी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस तीन जुलाई को जब समूचा देश अमरनाथ के मुद़दे पर श्राईन बोर्ड को दी जमीन वापस लेने के जम्‍मू कश्‍मीर सरकार के फैसले के विरोध की आग की लपटों में झुलस रहा था, गुजरात में गोधरा, पं
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कुछ और चित्र

हिमाचल का दूरस्‍थ गांव ताबो, दोनों तरफ वीरान ऊंचे पहाड़ों के बीच हरियाली का बिंदु नजर आए तो समझिए ताबो आ गया। एक दिन में 30 किलोमीटर का पहाड़ी सफर तय करते हुए एक नदी पार करते हुए। या यात्रा की थकान सतलुज के पानी में पैर डालने से दूर हो गई। उसके किनार
Dec 29 2009 11:57 AM
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हिमाचल यात्रा की याद कुछ चित्रों के जरिए

कुछ समय पहले मैं पहाड़ के संपादक व जानेमाने लेखक, पत्रकार शेखर पाठक जी के साथ हिमाचल की यात्रा पर गया था। उस दौरान खींचे गए कुछ फोटो हाल ही में यहां-वहां से मिल गए। मुझे फोटोग्राफी पसंद है, इसीलिए इन्‍हें भी यहां पोस्‍ट कर रहा हूं। उम्‍मीद है मेरी नज
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पहले अस्मिता बन तो जाए

गुजरात की वेबसाइट http://gujaratindia.com/ पर जाइए, पांच करोड़ गुजरातियों के सम्मान के प्रतीक पुरुष मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी इस 'बिजनेट स्टेट' में आपका स्वागत करते मिलेंगे। सचमुच गुजरात आजकल बिजनेस में पूरी तरह लिप्त हो चुका है। यह व्यापार गुजरात की र
Dec 29 2009 11:57 AM
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गांधी : व्यक्ति या विचार की एक परम्परा?

आचार्य राममूर्ति गांधी नाम का जो व्यक्ति था वह वह आज से 60 वर्ष पहले समाप्त हो गया। उसे मार दिया गया। मारनेवाले की उससे कोई निजी दुश्‍मनी नहीं थी। उसने यह मानकर मारा कि गांधी के विचारों से देश का अहित हो रहा है। सामान्य स्थिति में इस तरह का निर्णय का
Dec 29 2009 11:57 AM
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परंपरा का पानी

आज पर्यावरण दिवस है। दुनिया भर में ग्‍लोबल वार्मिंग से लेकर जल संरक्षण तक तमाम बहस-मुबाहिसे और तकरीरें होंगी। मैं इस मौके पर अपनी नेपाल यात्रा के दौरान हुए ऐसे अनुभव को बांटना चाहता हूं जो समस्‍या पर बात करने से ज्‍यादा समस्‍या के समाधान के मौके तलाश
Dec 29 2009 11:57 AM
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हाशिए के स्वर

उजाला छड़ी, खबर लहरिया, अपना पन्ना, दिशा संवाद, गांव सभा, गांव की बात, कलम, पंचतंत्र यह सूची काफी लंबी है। ये नाम हैं उन कुछ प्रकाशनों के, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में वैकल्पिक मीडिया के रूप में लंबे समय से सफलतापूर्वक सूचना देने में अपनी भागीदारी नि
Dec 29 2009 11:57 AM
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हमारी नदियों पर मंडराता खतरा

नदियां अब अविरल नहीं बहतीं। एक समय था जब लोगों को नदियों पर भरोसा था कि वह अपने मार्ग से विचलित नहीं होगी और गंतव्य पर जरूर पहुंचेगी। लेकिन यह लोगों की करतूतों का ही नतीजा है कि दुनिया की सबसे महान नदियां तक सुरक्षित समुद्र में मिल सकेंगी इसका कोई भर
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पर्यावरण- बचाने और बेचने की चिंता

बीती 22 मई का दिन दुनिया भर में जैव विविधता दिवस के रूप में मनाया गया और आने वाले 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने की परंपरा का भी बखूबी पालन होगा। ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया को वाकई पर्यावरण की बेहद चिंता है और वह भिन्न दिवसों, सेमिनारों, भाषणों, रैलियो
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अब हवा में भी नहीं रहने देंगे पानी

इस पर्यावरण दिवस की सबसे बड़ी खबर यही होनी चाहिए कि अब पानी के लिए बादलों या नगरनिगम के टैंकर अथवा नलों की राह नहीं ताकनी होगी। बाजार ने पानी को पैसों वालों के अंगूठे के नीचे दबाकर रखने की जुगत निकाल ली है। अमेरिका की एयर वाटर कारपोरेशन एटमोस फ्रिक वा
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विकास पत्रकारिता बनाम समाज

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संचार के साधनों में तेजी से हुई प्रगति के बावजूद आज हमें विकास संचार की संभावनाओं और जरूरतों पर बात करनी पड़ रही है। बीते कई दशाकों में जिस तेजी से संचार के साधनों में तकनीकी तरक्की हुई है उसी गति से संचार माध्यमों और मानवीय पह
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अन्नदाता की खुदकुशी का इंतजाम

रामनवमी के पावन दिन जब भारतीय जनता पार्टी नई दिल्ली में राम, रोटी और किसानों को राहत की रेवड़ियां बांटने वाला चुनाव घोषणा पत्र जारी कर रही थी, ठीक उसी समय भाजपा शासित मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से महज सौ किमी दूर स्थित पिपरिया के कुर्सीढाना गांव में
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क्‍या नर्मदा का होगा लोप

अमरकंटक में घटती हरियाली का अंदाजा इस सैटेलाइट फोटो से लगाएं , इसमें नर्मदा कुंड व आसपास के इलाके में फैला बंजर इलाका साफ तौर पर देखा जा सकता है। Normal 0 false false false MicrosoftInternetExplorer4 /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-
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Development Journalism vs. ‘Envelopment’ Journalism

Development Journalism vs. ‘Envelopment’ JournalismIt is some what ironical and unfortunate to talk about the need and the possibilities of development communication in an era that is being characterized as the era of communication revolution. And we are