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18 Jun 2010
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हिंदी सिनेमा के अमर मोटर साइकिल गीत --(४)

ये तब कि बात है जब रोबर्ट एम. पिर्सिग की ZEN and the art of motorcycle maintainence (1974) छप भी गयी होगी तो हिंदुस्तान के बाज़ारों में न आई थी और मोटर साइकिल चालन का मक़सद महज़ काम-काजी आवा-जाही या इश्किया चुहलबाज़ी तक महदूद था । आज भी ९५ प्रतिशत
 
मुनीश ( munish )
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एक साइकिल गीत भाई मीत के लिए

'किस से कहें' वाले मीत भाई को सभी गीत,ग़ज़ल के कद्रदान और एक बड़े नर्मदिल फनकार के तौर पे जानते हैं । उनके ब्लौग पे जाइए तो लगता है एक ऐसे शख्स की दुनिया में आ गए जो मौसिकी को जीता है । मग़र एक ज़माने में आप भीषण यायावर रहे हैं और मोटर साइकिल पे देश भर का
 
मुनीश ( munish )
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हिंदी सिनेमा के अमर मोटर साइकिल गीत -3

स्कूटर होता है , मोटर साइकिल होती है मग़र फिर फिर भी नायिका इसी कि सवारी पसंद करती है । ऐसी कई कहानियां जिनका ख़ुद ख़ाकसार नायक है यही बतलाती हैं बावजूद इसके कि बाइक जो है बड़ी जोखिम की चीज़ है ! मतलब ,बीच रस्ते पंचर हो जाए तो स्कूटर जैसी स्टेपनी इसमें
 
मुनीश ( munish )
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हिंदी सिनेमा के अमर मोटर साइकिल गीत

निस्संदेह आज तक का सबसे ज़्यादा गाया-बजाया, सुना-सुनाया गया लोकप्रिय मोटर साइकिलिया गीत जो पुराना पड़ता ही नहीं कभी !
 
मुनीश ( munish )
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....मग़र सौ मोटर-बाइक गीतों पे भारी है ये साइकिल गीत

शुरू की है तो जारी भी रहेगी मोटर साइकिलिया गीतों की श्रृंखला मग़र आज याद आ रहा है ये साइकिल गीत । फिल्मांकन हो, बोल हों, धुन और मायने हों --हर लिहाज़ से ये एक ज़बरदस्त गीत है और देखिये कहाँ से आ रहा है --एक खालिस बम्बइया कमर्शियल फिल्म से । सन ७९ में आई
 
मुनीश ( munish )
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हिंदी सिनेमा के अमर मोटर-साइकिल गीत --1

इन गीतों की शुरुआत कब हुई कहना कठिन है मग़र मोटे तौर पे इन्हें सत्तर के दशक की जागीर समझना कोई भूल न होगी । फिल्म 'धूम' जैसी फूहड़ फिल्मों में ये अब भी दीखते हैं मग़र उनमें व्याप्त नंगई मोटर साइकिल पे हावी हो चुकी है सो बात तब की जब ख़लील फाख्ता उड़ाया
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में " ये कौन चित्रकार है ...."

फिल्म 'बूँद जो बन गयी मोती ' से भारत व्यास की ये रचना । कुछ साल पहले तक बद्रीनाथ में वन विभाग के एक बोर्ड पे ये रचना पूरी लिखी दिखाई देती थी । ज़्यादा अशांत हो जब चित्त तो इस गीत का आनंद लें ,शर्तिया फायदा गारंटी से होता है ऐसा बाबा मूसा शाह बंगाली का कहा
 
मुनीश ( munish )
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धन्नो की आँखें मयखाने में .......

गुलज़ार की ये रचना फिल्म' किताब ' से है । स्वर आर.डी का और विचित्र प्रयोग पूर्ण संगीत भी उनका ---
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में आज छुक-छुक.......

कोयले के इंजन धीमे थे , धुआं भी करते थे मग़र उनकी सीटी का संगीत ओह... क्या कहने ! शिमला -कालका ट्रेक पे आज भी चलती है टॉय-ट्रेन मग़र डीज़ल से !सो वो संगीत बस इस गाने भर में बचा है । कभी-कभी यूं ही ये गीत देखना अच्छा लगता है मुझको । क्या आपको पसंद नहीं ये
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में '' ज़िन्दगी है क्या लट्टू या लड़की ....?"

फिल्म ' सत्यकाम ' के बिना अधूरा है हिंदी सिनेमा का इतिहास । ऋषिकेश मुख़र्जी के निर्देशन में बनी ये संवेदनशील फिल्म बात-बात में कुत्तों का खून पीने वाले धरम जी के होम -प्रोडक्शन की पेशकश थी । अगर आपने नहीं देखी तो हिंदी फ़िल्में देखते ही क्यों हैं साहिब
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में दो महात्मा

इनके जैसा न फिर कोई नाचा, न किसी ने ऐसा गाया । हर शब्द दिल से निकला है । मैं तो पूरा यकीन रखता हूँ इसभजन पर और आप ?
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में 'रोमन हौली डे '

मुझे अब भी याद है कि अभिनेत्री ऑड्रे हप्बर्न एक शहज़ादी की भूमिका में थीं और ग्रेगरी पेक एक पत्रकार की । अपने बहु-प्रचारित दौरे पे निकली शहज़ादी रोज़मर्रा के नीरस , मशीनी शेड्यूल से इतना उकता जाती है कि अपने रोम- प्रवास के दौरान भाग निकलती है और एक
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में एक ट्रेलर

आज बस ये ट्रेलर ! जिन्होंने देख रखी है उनके लिया भी ,जिन्होंनें नहीं देखी उनके लिए भी । जो युद्ध चाहते हैं उनके लिए भी और शांति के पुजारियों के लिए भी ,जी हां 'गन्स ऑफ़ नवरोन' --ये फिल्म सभी के लिए है !
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में के ..सेरा..सेरा...

'के सेरा - सेरा' माने होता वही है जो होना होता है ---
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में "बंबई से आया मेरा दोस्त....."

हिंदी सिनेमा के शराबी गीत ( वाक़ई अंतिम गीत ) उन सभी मयखाना प्रेमियों के साथ सुनना चाहता हूँ ये मस्त-मस्त गीत जिन्होंने शराबी गीतों का यहाँ भरपूर मज़ा लिया ....गीत जिनका मज़ा लेने के लिए शराबी होना कतई ज़रूरी नहीं है !
 
मुनीश ( munish )
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माना के बहोत बदनाम है ये ....

हिंदी सिनेमा के शराबी गीत (6).... (समीर भाई "कनैडा वाले" के इसरार पर जारी) अदाकार राजकुमार की अकड़ के किस्सों के बीच लोग ये भूल जाते हैं कि बड़-बोले डायलौग -बाज़ के बीच कितना संवेदन शील व्यक्तित्व छिपा था । भूषण पंडित नाम के ये साहब कभी असल पुलिस
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में लकी काका

हिंदी सिनेमा के शराबी गीत (अंतिम ) राजेश खन्ना के अभिनय के बारे में लोगों के ख्याल अलग -अलग हो सकते हैं मग़र जिस किस्म के गीत उन्हेंमिले वो किसी भी और कमर्शियल हिंदी हीरो के लिए जलन का बायस रहे हैं । बहरहाल , किसी के जले पे नमकछिडके बिना गाना सुनना बेहतर
 
मुनीश ( munish )
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लडखडाने दो उसे...

हिंदी सिनेमा के शराबी गीत (४) ।
 
मुनीश ( munish )
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ये हम सब यूं क्यूं नहीं पीते ........

हिंदी सिनेमा के शराबी गीत-३
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में माइकल

हिंदी सिनेमा के शराबी गीत --2
 
मुनीश ( munish )
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हिंदी सिनेमा के शराबी गीत-1

मदिरा को किसी चमत्कारी ,शक्तिदायी ,सर्व-सुखकारी पेय की गलत और मनघडंत इमेज के साथ पेश करते हुए नौजवानों को बिगाड़ने में हिंदी सिनेमा का ख़ास योगदान रहा है । आज भी बेवक़ूफ़ लौंडे-लपाड़े ग़मज़दा धर्मेन्द्र की तरह 'नीट' पीने पे अड़ते दिखाई दे जायेंगे फिर भले
 
मुनीश ( munish )
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वो मिस रजनीगंधा मयखाने में...

रजनीगन्धा --ये नाम आजकल एक पान-मसाले के ब्रांड के तौर पे ज़ियादे प्रचलित है जिसे हमारे पत्रकार दोस्त गाहे -ब-गाहे चाबते नज़र आया करते हैं । एक फूल होते हैं रजनीगन्धा के जो परदे पे आज तक महका करते हैं सन १९७४ से जबके मिस रजनीगन्धा ने इन्हें गुलदान में
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में 'डाकिया डाक लाया....'

लिखने वाले ने लिखा हम क्या लिखें ऐसे गीतों के बारे में । बस देख -सुन कर खुश हो लेते हैं और ब्लॉग -जगत में इन्हें बाँटनें का मकसद अपने हम-ख़याल दोस्तों को ढूंढना होता है । अगर ये गीत आपके दिल को ई-मेल के ज़माने में छू जाता है तो आप-हम हमखयाल हुए न
 
मुनीश ( munish )
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ओ जट्टा आई बैसाखी........

दिल्ली में बैसाखी तो अब बस कैलेण्डर में दिखती है । गाँव, देहात ख़ास कर पंजाब-हरयाणा के अब भी इस पर्व पर झूमते दिखते हैं आख़िर गेहूं की फसल जो कटी है भाई ! कई साल पहले फिल्म आई थी 'ईमान धरम' , इसके जैसा बैसाखी गीत आज तक फिर नहीं बना हालांकि इसमें किसानों
 
मुनीश ( munish )
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आज----- दम मारो दम ........

भारतीय संस्कृति के अनुरक्षण एवम संवर्धन की दिशा में भारत कुमार उर्फ़ मनोज कुमार और सदाबहार देव साहब दोनों का योगदान श्लाघनीय रहा है , प्रशंसनीय रहा है । दूसरे विश्व युद्ध के बाद की पहली पीढ़ी जब जवान हुई तो अमरीका और यूरोप दोनों में हिप्पी कल्ट का आगाज़
 
मुनीश ( munish )
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चिड़ीमारों के देश में

बड़े सवेरे निकलता हूँ और देर से घर पहुंचता हूँ सो गौरय्या को लेकर जो हाय-तौबा , उट्ठा-पटक मची हुई थी उस पर यकीं न होते हुए भी चुप था । आज मौक़ा मिल गया और सवेरे सात बजे ये तस्वीरें मैंने अपने आँगन में खुद खेंची हैं । ध्यान से देखें गौरय्या ही है न
 
मुनीश ( munish )
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लस्सी ...लस्सी... !

हूश हरियाणवी बच्चे ,जिनके साथ मैं पला बढ़ा , अक्स़र किसी भी बड़े -छोटे को पकड़ लेते और कहते ''तू कह लस्सी '' या ''ताऊ बोल लस्सी '' और जब वो बोल देता ''लस्सी'' तो जवाब होता ''हत्तेरी नाक में रस्सी '' और फ़िर लस्सी और रस्सी की इस rhyme पर लगता एक पुरज़ोर
 
मुनीश ( munish )
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अलविदा मारुति--८००.

आज के बाद दिल्ली में मारुति-८०० की बिक्री बंद हो जायेगी । पुरानी ८०० चलेंगी और बिकेंगी मग़र नई ८०० की बिक्री अब यहाँ प्रतिबंधित है । फिलहाल, एस्टिलो चलाता हूँ मग़र एक लम्बे समय मैंने मारुति-८०० की मजेदार सवारी की मौज ली है और कभी एक पोस्ट इस ऐतिहासिक
 
मुनीश ( munish )
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कुरुक्षेत्र से लौट कर

दिल्ली से महज़ १६० किलो मीटर दूर स्थित कुरुक्षेत्र जाना यूँ तो कई बार हुआ है मग़र बतौर ब्लौगर वहां जाने का ये पहला मौक़ा था । जाना भी किसी काम-काज के सिलसिले में था मग़र सोचा जब आ ही गया हूँ तो क्यों न कुछ तस्वीरें आपके लिए ले चलूँ सो ब्रह्म सरोवर,
 
मुनीश ( munish )
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ये है असली मनाली

यूं तो मनाली की कहानी आदि-पुरुष मनु से जुड़ी है मग़र मनाली का जो रूप आज दिखाई देता है वो शहर तो तब बसना शुरू हुआ जब कश्मीर में आतंक की दूकान खुलने के बाद वहां पर्यटन ठप्प पड़ने लगा और बाबू लोगों ने हिमाचल का रुख किया । दरअस्ल, मनाली शहर जिस गाँव के नाम पर
 
मुनीश ( munish )
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कॉलर को थोड़ा ऊपर चढ़ा के ....सिगरेट के धुएं का छल्ला बनाके

कौन कहता है मर चुकी कविता ? कभी-कभी उसकी साँसों की आवाज़ सन्नाटे में गूंजती है अब भी ये गीत बनकर । कविता माने पोयट्री ज़िन्दा है बॉस ! न मानो तो लो सुन लो ये ग़ज़ल .............. आभार-- टी.सीरीज़
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में शांतिलोक

मयखाना आते रहें हैं तो उत्तराखंड स्थित लांसडाउन के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा आपने । अरसा हुआ वहाँ गए । तब भी सुना था कि उससे करीब ४० किलो मीटर आगे ताडकेश्वर धाम नामक एक सुरम्य स्थल है , मग़र वहाँ जा नहीं सका था मैं। हाल में कुछ मित्र होकर आये , तारीफ भी की
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में ' लव सेक्स और धोखा'

मुझे इस फिल्म का इंतज़ार था . फ़िल्में एक से एक बढ़ कर बनती रहती हैं मगर दिबाकर बनर्जी की कोई भीफिल्म इन तमाम फिल्मों से एक मायने में मेरे लिए ख़ास होती है . दरअस्ल, दिल्ली के एक ख़ास कमीने तबके को पकड़ पाने की जो आँख दिबाकर के पास है वो दिल्ली-६ बनाने वाले
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में अबे सुन बे गुलाब .......

'महाप्राण ' निराला ' की एक कविता है 'कुकुरमुत्ता '। हाल में चंडीगढ़ के रोज़ गार्डेन में ली गयी अपनी तस्वीरों को इस कविता के साथ छापने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ । इन तस्वीरों को आपने पिछली पोस्ट में देखा और सराहा है मग़र चाहता हूँ कि आप इन्हें फिर
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में गुलाब

गुलाब खूबसूरत है मग़र इतना 'ओवर-एक्स्पोस्ड' भी कि इसकी खूबसूरती पे दिल मचलता नहीं , तोड़ ही लेनेको हाथ बढ़ते नहीं । फिर इसकी वो जानी -पहचानी महक जो कई मंदिरों , मज़ारों और श्मशानों औरमयखानों की स्मृतियों का अजब घाल-मेल पैदा करती है । मैं जंगलों में आप ही
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में राशिफल

रोज़ की तो नहीं कहता ,बाक़ी इतवार के अखबार को खोलते ही मैं सबसे पहले राशिफल बांचता हूँ । हालांकि कुछ ही देर में उसको भूल भी जाता हूँ मगर जाने क्यों ? मुझे याद है कई साल पहले इंडियन एक्सप्रेस में पीटर वीडल राशि- फल लिखते थे जो कई बार सच हुआ करता था , फ़िर
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में 'ईमान-धरम'

१९७७ में देश मुखर्जी के निर्देशन में आयी थी 'ईमान धरम' ।हैरत की बात है कि लीड-एक्टर अमिताभ बच्चन ने इसे खुद अपनी सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना है मग़र आज इसे लोग भूल चुके हैं .....शायद अपने ईमान और धरम की ही तरह । अब बताइये ये भी कोई बात हुई हैं ! मेरा
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में 'ईमान-धरम'

१९७७ में देश मुखर्जी के निर्देशन में आयी थी 'ईमान धरम' ।हैरत की बात है कि लीड-एक्टर अमिताभ बच्चन ने इसे खुद अपनी सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना है मग़र आज इसे लोग भूल चुके हैं .....शायद अपने ईमान और धरम की ही तरह । अब बताइये ये भी कोई बात हुई ! मेरा मतलब
 
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फौजी गया जब गाँव में.....

ठेठ उत्तर - भारत के ग्रामीण जीवन का एक चित्र ब-ज़रिये चलचित्र ' आक्रमण' (१९७५) । क्या संगीत ! क्या बोल !कहते हैं गीतकार आनंदबक्षी पहले फ़ौज में थे , सुनिए .............. कोई शक ?
 
मुनीश ( munish )