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22 Jan 2010
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शिक्षा प्रणाली की खामियां - बेक़सूर मासूम बच्चे देते कुर्बानियां !

हाल ही मैं देश के कई हिस्सों से बच्चों द्वारा आत्महत्या जैसे अप्रिय और दुखद कदम उठाने की खबर आती रही है । इस तरह की घटनाओं मैं समय दर समय इजाफा होते जा रहा है । पढ़ाई मैं स्वयं की अथवा माता पिताओं की आशा अनुरूप परिणाम न आने अथवा थोपी गई शिक्षा या अधिक
 
दीपक कुमार भानरे
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न विपक्ष न सरकार- बढती हुई महंगाई से नहीं हे कोई सरोकार !

बढती मंहगाई पर मीडिया और समाचार पत्र लगातार ख़बरें पर ख़बरें दिखा रहें हैं और छाप रहें हैं । महंगाई है सुरसा की मुख की तरह दिन दूनी और रात चोगुनी कहावत को चरितार्थ करते हुए गुणात्मक वृद्धि करती जा रही है , आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहें है चाहे अनाज
 
दीपक कुमार भानरे
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असंतोष और उपेक्षा से उपजी हताशा का परिणाम है - प्रथक राज्य की मांग !

असंतोष और उपेक्षा से उपजी हताशा का परिणाम है - प्रथक राज्य की मांग ! तेलंगाना राज्य को प्रथक राज्य बनाने की घोषणा के बाद , अब देश के हर कोने से प्रथक राज्य गठन की मांग उठने लगी है । कुछ लोग प्रभावशाली और कारगर प्रशासनिक व्यवस्था क्रियान्वयन और नियंत्
 
दीपक कुमार भानरे
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ग्लोबल वार्मिंग - एक सकारात्मक पहल आवश्यक !

कोपेनहेगन मैं ग्लोबल वार्मिंग्स पर चल रहे सम्मलेन मैं सभी विकसित , विकासशील और अविकसित देश ओधोगिक विकास की गति धीमी होने , सुख सुविधाओं के संसाधनों मैं कमी और देश का विकास अवरुद्ध होने अथवा धीमी होने की कीमत पर कार्बन उत्सर्जन की मात्रा मैं कमी ग्लोब
 
दीपक कुमार भानरे
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ऐसी ख़बरें अब हैरान नही करती - विचलित और दुखित जरूर करती है !

हाल ही मैं मधु कोड़ा द्वारा काली कमाई से अरबों रुपयों एकत्रित करने का समाचार अख़बारों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया मैं छाया रहा । किंतु ऐसा लगता है की अब देश के लोग अब ऐसी ख़बरें सुनकर और पढ़कर हैरान नही होते होंगे , क्योंकि नेताओं और मंत्रियों के भ्रष्टाचार
 
दीपक कुमार भानरे
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कितना जिम्मेदार विपक्ष है हमारे पास !

कितना जिम्मेदार विपक्ष है हमारे पास ! हमेशा से सत्ता आरूढ़ पार्टी अथवा जन प्रतिनिधि को ही देश मैं चल रही विभिन्न गतिविधियों हेतु जिम्मेदार माना जाता है एवं उसे ही जनता के आक्रोश और आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है । क्या सत्ता से बाहर बैठे विपक्षी जन प
 
दीपक कुमार भानरे
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विश्वसनीयता किसने खोई - इ वि ऍम मशीन ने , जनता ने या फिर राजनेताओं ने !

हाल ही मैं तीन राज्यों के चुनाव परिणाम आने पर राजनीतिक पार्टियों द्वारा विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न खड़ा किया गया । जन्हा कोई इ वी एम् मशीन की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर रहा है तो कोई जनता की विश्वसनीयता पर तो , वन्ही जनता राजनेताओं की विश्व
 
दीपक कुमार भानरे
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दिवाली पर मिलावट खोरी , कालाबाजारी और मंहगाई की धूम !

दिवाली पर मिलावट खोरी , कालाबाजारी और मंहगाई की धूम ! जी हाँ इस दिवाली पर आप कुछ खरीदने जा रहें है । आकर्षक पैकिंग मैं मिलावटी मिठाई और खाद्य सामग्रियां , विशेष छूट के साथ महेंगे कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक समान और कालाबाजारी के कारण महेंगे होते अनाज और डा
 
दीपक कुमार भानरे
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विनम्र अपील धार्मिक उत्सव आयोजन कर्ताओं के नाम !

देश मैं ईद और नवरात्र के पर्व के अवसरों पर भक्तिमय उल्लाश और खुशियों का सुखद वातावरण बना हुआ है । जगह जगह गाँव और शहर मैं पंडाल , स्वागत द्वार अवं तोरण द्वार सजे हुए हैं । कंही ईद के दावतों का आयोजन हो रहा है तो कंही मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई
 
दीपक कुमार भानरे
Sep 25 2009 10:19 PM
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स्वास्थय सेवाओ मैं सुधार हेतु सुझाव !

देश मैं स्वास्थय सुबिधायें दिन प्रतिदिन महँगी और आम लोगों की पहुच से दूर होते जा रही है । न तो योग्य और प्रक्षिशित चिकित्षों की पर्याप्त उपलब्धता है , और न ही पर्याप्त मात्रा मैं दवाएं की उपलब्धता है । चिकित्षकों की कमी और उनका ग्रामीण क्षेत्रों मैं
 
दीपक कुमार भानरे
Sep 23 2009 09:23 PM
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जनता - जानवर या जनार्दन ?

जनता - जानवर या जनार्दन ?जनता जानवर है या जनार्दन या भगवान । यह तो हमारे देश के नेता तय करते हैं । वक़्त वक़्त के हिसाब से नजरिया बदलता है । चुनाव के समय जब वोट की आवश्यकता होती है तब तो जनता जनार्दन अथवा भगवान् होती है बाकी समय तो जानवर होती है और यही सोच
 
दीपक कुमार भानरे
Sep 17 2009 05:31 PM
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भ्रष्ट्राचार को देश की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनने से रोकना होगा !

क्या भ्रष्टाचार देश के लोगों की कार्यसंस्कृति बन गया है और कंही न कंही भ्रष्टाचार को शिष्टाचार के रूप मैं स्वीकार करने की मौन स्वीकृति दी जा चुकी है । क्योंकि अवसरवादिता के इस युग मैं जरूरत पड़ने पर अधिकाँश लोग अपना काम निकलवाने हेतु किसी न किसी रूप मैं
 
दीपक कुमार भानरे
Sep 15 2009 11:04 PM
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लोकतंत्र - जनता के ऊपर शासन और जनता के पैसों पर सुखासन करने का नाम है !

लोकतंत्र जनता का , जनता के लिए और जनता द्वारा शाशित शाशन कहलाता है । क्या आज के बदलते दौर के साथ इसके मायने नही बदल गया हैं , और इसे नए सिरे से परिभाषित किए जाने की जरूरत नही है । तो क्या आज की जननायक के चाल चलन और चरित्र को देखकर नही लगता है । वो पाँच
 
दीपक कुमार भानरे
Sep 09 2009 11:44 PM
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क्या महिलाओं की नेत्रत्व क्षमता - स्थानीय निकायों के चुनाव तक सीमित है !

जिस देश मैं राष्ट्रपति के पद पर एक महिला आसीन है , सत्ता मैं काबिज़ गठबंधन की सर्बोच्चा एवं सर्वमान्य नेता एक महिला है , जन्हा आज महिला सभी क्षेत्रों मैं पुरुषों के साथ बराबरी से कंधे से कंधे मिलकर कार्य कर रही है क्या उस देश की महिलाओं की नेत्रत्व क्षमता
 
दीपक कुमार भानरे
Aug 30 2009 02:45 PM
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प्रतिभाओं को अवसर - इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सराहनीय प्रयास !

इस देश मैं प्रतिभाओं को कमी नही है बस जरूरत है तो बस एक अदद अवसर और उचित मंच की जिसके माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सके । न जाने ऐसी कितनी ही प्रतिभाएं है जो एक उचित अवसर के अभाव मैं गुमनामी के अंधेरे मैं दम तोड़ देती है । एक टीवी चॅनल के रियलिटी
 
दीपक कुमार भानरे
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ऐसा सच सामने लाया जाए जो देश और समाज हित मैं हो !

एक टीवी चॅनल मैं इन दिनों प्रसारित हो रहे एक करोड़ इनाम वाले - सच का सामना कार्यक्रम पर सच अथवा हकीकत के सार्वजानिक किए जाने पर व्यापक बहस का मुद्दा बना हुआ है । एक और जन्हा यह कार्यक्रम सेलिब्रिटी / पर्तिभागी के निजी जीवन के बिविन्ना पहलुओं की सच्चाई को
 
दीपक कुमार भानरे
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देश और जनता के हितों से जुड़े अपराधिक मामलों की प्रगति की जानकारी देना - अनिवार्य हो !

देश मैं आए दिन समाचारपत्रों और न्यूज़ चनलों के माध्यम से देश और जनता के हितों से जुड़े अपराधिक मामलों की ख़बरों को जोर शोर से प्रस्तुत किया जाता है और धीरे धीरे दिन बीतने पर ये मामले ओझल होने लगते हैं और उनकी जगह कोई नई ब्रेकिंग न्यूज़ स्थान बना लेती
 
दीपक कुमार भानरे
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लोकतंत्र का यह कैसा एकतरफा समझोता !

जब भी कोई संस्था अथवा संगठन अथवा व्यक्ति किसी संस्था अथवा व्यक्ति को अपने कार्यों को संपादित करने एवं व्यवस्थाओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी सौपती है तो उनके बीच दो पक्षीय समझोता होता है और तय मापदंड और शर्तों के आधार पर कार्य करने को राजी होते हैं ।
 
दीपक कुमार भानरे
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शासकीय लोगों द्वारा ही - शासकीय संस्थाओं की उपेक्षा / बेजा उपयोग !

देश अथवा प्रदेश के मंत्री हो अथवा बड़े अधिकारी हो अथवा अधिक वेतन और ऊँचे ओहेद वाले कर्मचारी है प्रायः यह देखने मैं आता है की वे स्वयं अथवा उनके परिजन शासकीय संस्थाओं जैसे स्कूल , अस्पताल अथवा अन्य शासकीय संस्थाओं से सेवा प्राप्त करने हेतु जाने से कतर
 
दीपक कुमार भानरे
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यह भेद का भाव कब मिटेगा !

एक इंसान का दूसरे इंसान मैं भेद अर्थात अन्तर करने का यह भावः प्राचीन काल से चला आ रहा है । कभी ऊंची और नीची जाती के रूप मैं तो कभी उच्च कुल और निम्न कुल के रूप मैं तो कभी आमिर और गरीब के रूप मैं । किंतु यह इंसानी समाज ज्यों ज्यों जितना आधुनिक , पढालि
 
दीपक कुमार भानरे
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चुनाव आचार संहिता के साथ ही भाषण, रैली , सभाएँ और चुनावी प्रचार प्रसार बंद हो .

जब भी देश अथवा प्रदेश मैं चुनाव की तिथियों की घोषणा होती है वैसे ही देश मैं आचार संहिता लागू कर दी जाती है और सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्था द्वारा जनहित अथवा जनता को प्रभावित करने वाले नए किए जाने वाले कार्यों को बंद करा दिया जाता है और नए वादे अथवा
 
दीपक कुमार भानरे
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वर्तमान राजनीतिक परिद्रश्य मैं राष्ट्रीय सरकार की दरकार !

वर्तमान लोकसभा चूनाव के मद्देनजर राजनेताओ और राजनीतिक पार्टी मैं मर्यादाओं , सिद्धांतो , नीतियों और विचार धारों को ताक मैं रखकर दल बदल और दलों के आपस मैं अवसरवादी गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने की जो कबायद चल रही है वह देश और देश के लोगों के सामने लोकतंत्र
 
दीपक कुमार भानरे
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प्रधान मंत्री को भी सीधे जनता द्वारा चुना जावे !

सभी पार्टी अपने अपने हिसाब से प्रधान मंत्री पद का दावेदार तय कर रही है । तो कही व्यक्तिगत तौर पर अपने को प्रधान मंत्री के पद का दावेदार बता रहे है । अब इसमे यह बात अलग है की प्रधान मंत्री पद के इन दावेदारों को स्वयम अपनी ही पार्टी मैं कितना एकमत से स
 
दीपक कुमार भानरे
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सारी रोक टोक आम लोगों के उत्सव और त्योहारों पर क्यों ?

दिवाली पर फटाके न फोडे , रंगों की होली न खेले सिर्फ़ तिलक होली खेलें , लकडियों की होली न जलाएं , मूर्तियों का विसर्जन तालाबों और नदियों मैं न करें , उत्सवों पर ज्यादा बिजली का प्रयोग न करें इत्यादि इत्यादि । कंही पर्यावरण के नाम पर , कंही जल सरक्षण क
 
दीपक कुमार भानरे
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क्या अगली सरकार/संसद मैं महिलाओं की आबादी के हिसाब से समान भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी .

किसी भी राज्य अथवा देश के सत्ता शासन मैं सभी की समान भागीदारी सुनिश्चित की जाती है ताकि सभी वर्ग को समान प्रतिनिधित्व मिल सके और सभी अपनी बात को देश के पटल पर रख सके और जब सरकार का गठन हो तो सभी वर्गों की भागीदारी से जन हित और देश हित के लिए एक सर्वम
 
दीपक कुमार भानरे
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श्री अग्रवाल के गंगा को बचाने के भागीरथी प्रयास के हम भी सहभागी बने .

दिनांक 16-02-09 का दैनिक भास्कर मैं प्रकाशित श्री विकास मिश्रा का लेख पढ़ा जिसमे जिसमे उन्होंने लिखा है कि " श्री जी डी अग्रवाल पिछले डेढ़ महीने से पवित्र गंगा को बचाने के उद्देश्य अनशन पर बैठे हैं । किंतु टी आर पि बढ़ाने वाली मसाला ख़बर न होने के कार
 
दीपक कुमार भानरे
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मेरा एक वोट- भ्रष्ट और बेईमान लोगों को संसद मैं जाने से रोक सकता है ?

कहा जाता है की बूँद बूँद से सागर भरता है अतः यदि सभी अपना वोट सोच समझकर दे तो हम अच्छे और इमानदार लोगों को संसद मैं भेज सकते हैं और एक स्वस्थ्य और इमानदार सरकार और साथ ही स्वस्थ्य लोकतंत्र को स्थापित करने मैं सहायक हो सकते हैं ।। किंतु क्या मेरा एक व
 
दीपक कुमार भानरे
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महिला उन्नति का मार्ग पब , पाश्चात्य और लिव इन रिलेशन जैसी संस्कृति से गुजरता है .

देश मैं जब कभी - कंही भी मंगलोर जैसी घटना घटित होती है तो घटना के विरोध मैं कई स्थापित एवं स्वघोषित महिला हितों के हिमायती लोग और संगठन , धार्मिक संगठन एवं धर्म के ठेकदारों की तरह आगे आते रहते है । जो की एक अच्छी बात है । किंतु यह विरोध घटना के विरोध
 
दीपक कुमार भानरे
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स्लम डोग मिलेनियर- स्वदेशी माल पर विदेशी कलई चढ़ने पर श्रेष्ठ .

वही कहानी , वही परिवेश और वही पुराणी विषय वस्तु , और तो और कलाकार और संगीतकार भी भारतीय । बस अन्तर है तो इतना की इसे विदेशी लोगों ने विदेशी भाषा मैं बनाया है , और फ़िल्म का नाम अंग्रजी भाषा यानी की विदेशी भाषा मैं रखा गया है स्लम डोग मिलेनियर । और शा
 
दीपक कुमार भानरे
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Give and Take पर निर्भर है ब्लॉगर की दुनिया !

ये दुनिया का दस्तूर है की इस हाथ से ले तो उस हाथ से दे । आख़िर जब तक आप दोगे नही तब तक आप कुछ प्राप्त करने की आशा नही कर सकते हैं । सरकारी कामकाजों की तो बात ही छोड़ दो , यंहा तक की भगवान् के पास भी बिना लिए दिए कोई काम नही बनता है । तो अब आप कैसे उम्
 
Deepak Bhanre