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31 Dec 2009
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कुछ लिख पाऊँगा... कभी जाना ना था।

हम इंसान काफ़ी पेचीदा नसल के मालूम होते हैं। हम में अच्छे और बुरे, दोनों की हदें मौजूद हैं। जैसे एक भव-संसार हमारे बाहर, उतना ही अन्दर। सोच है, भाव हैं, एहसास हैं। इन एहसासों को परिभाषित करना मुश्किल है, क्योंकि हर एहसास से कई लड़ियाँ जुड़ी हैं, जो एक
 
Atul Mongia
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अगर तू... तू ना होता।

अगर तू, तू ना होता , महकता कारवां-ए-सफ़र ना होता । सम्चित्त मज़ारों में, रंगो का दखल ना होता , रोज़मर्रा ज़िंदगी में, एक दूसरा अमल ना होता , अगर तू, तू ना होता । महकते कारवां में अब दर्द का बसेरा है , खिलखिलाती धूप में कुछ शाम का अँधेरा है । यूं तो फिर
 
Atul Mongia
Dec 29 2009 11:55 AM
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पहली कविता

मेरा दरवाज़ा खटखटाता नही मेरे घर, अब कोई आता नही । कोई ना कहता, बात करो मुझसे , ख़ुद को बतलाता, मैं प्यार करूं तुझसे । कोई ना मेरा नाम दोहराता , हाथ से किताब, ना कोई ले जाता । बड़ी बातें अब कोई भूल जाता नही , छोटी बातों पे चिढचिडाता नहीं । सुन्दरता में
 
Atul Mongia
Dec 29 2009 11:55 AM
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क़लम के कुछ सिपाही...

दिल से निकल जाती जो बात, तो बात कहाँ होती । तन्हाई में ना आती जो याद, तो मुलाक़ात कहाँ होती । --------------------------------------------- दर्द खंजर सा, सीने में सना, मालूम होता है । ज़रा लहू टपके, जाने तो सही, इश्क़ फरमाया था । ---------------------
 
Atul Mongia
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लोगों का जुमला

काली रात में देखा था मंज़र पहले भी, दीन के उजियारे में, फ़कत, पहली बार देखा है। यूं तो जगमगाती थी रौशनी तब भी, सूरज के चौबारे में, खीची आज रेखा है। जगह की पहचान ढली, समय की ताल में, लोगों का जुमला मगर, जैसा तब था, अब भी वैसा है। बतियाते बेसबब, प्रकाश
 
Atul Mongia
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'एक' सुख

है हाथ मेरे कुछ नही , मैं अकेला, बेजान, निस्वप्न । दुखों की पोटली ढोता , एक मैं । है अन्दर सब खाली , बाहर निरी कंगाली । तो आज अचानक , यह सुख कहाँ से आया । एक अकेला मैं, कबसे रहा अकेला , ना समाज का हुआ, ना प्यार का, ना किसी काम का । परजीवी का जीवन मेर
 
Atul Mongia
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'सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनो का मर जाना'

सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनो का मर जाना' । ऐसा मैं नही कहता, पंजाबी के प्रसिद्ध कवि 'पाश' कह गए। पर मैंने भी इस वाक्य को निजी तौर पे जिया है, आत्मसाथ किया है । सपने यूं तो , कई हो सकते हैं, सफ़र का सपना , हमसफ़र का सपना , आशाओं का सपना , निराशाओं क
 
Atul Mongia
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मेरा बड़ा ज़ुल्म...

मेरा ज़ुल्म ना छोटा, के बहुत बड़ा है , ऐ अज़ीज़ों, मुझको प्यार करना ना आया । कुछ की कोशिशें, दिल लगाने की इबादत , ताउम्र तवील रातें, है तन्हाई की आदत । सुर्ख पाक़ हुस्न-ए-दिलारा रास ना आया , शरीक-ए-हयात-ए-ख्वाब मुझको ना भाया । उसने किया प्यार, बेइंतहा नि
 
Atul Mongia
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क्या करते हो ?

जान पहचान का पहला सवाल, क्या करते हो ? लिखते हो, कवी हो, पर क्या करते हो ? अब क्या कहें, कुछ कोशिश तो करें: दुनियादारी से कटा मेरा सवेरा , गुमनाम पहर का गुमनामी बसेरा , कुछ ना करने की कला में माहिर , एक बेकार हूँ मैं । गिरते सब्ज़ पत्ते, आवाज़ हूँ सुन
 
Atul Mongia
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जीवन का सवाल

चाँद ने कहा , तू कौन है , ज़मीं पे खड़ा , आसमां से जुड़ा , बहते शब- ओ- सहर में कुछ बहता हुआ । राह ने कहा , कहाँ तेरी दिशा , साँस की धड़कन , टहलती बिन सरगम , झील की नईया , सिरकती बिन खिवईया । मौसम ने कहा , कैसी तेरी खिज़ा , कलियाँ हुई बेरंगी , बसंती पेड़
 
Atul Mongia
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क़ब्र यादों की

हर ख्वाइश का अंजाम नही होता , मोहब्बत में मुकम्मल मकाम नही होता । दिल-ओ-दर्द में वक्त ही अकेला है , खालीपन के खालीपन में यादों का मेला है । देखते ही देखते झुर्रियां बढ़ जाएँगी , पुरानी थम के कुछ नई गढ़ जाएँगी । वक्त के कठ्गारे में सब साथ छोड़ जाएँगे ,
 
Atul Mongia
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साँप सीढ़ी

साँप से बचकर सीढ़ी चढ़ गए , ग्यारह में वह रम गई । करती बातें वह फूलों से , पेड़ की शाखाएं सहलाती । हाथी देख दौड़ कर जाती , केले और बिस्किट वह खिलाती । उसकी शाम कभी ना आए , दिन में ही वह दिल बहलाए । जिसका सूरज ढल गया है , उसकी रात कभी ना आए । दिल में ए
 
Atul Mongia
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An every day

A long tiresome sultry dayThat time of the yearPallid, humid month of May.I bask in the shade of a treeBirds and flowers, go aboutRehearsing their daily spree.My time has stopped, eternity asunderI should be workingInstead, walk on the hill, in shameless
 
Atul Mongia
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Born Anew

They say, they have arrived . I never have, I never will , How can I, I'm an artist . It's in my nature to find more ,To constantly seek, rigorously explore . Nothing's in my hands to reach there , Except to just persist and persevere . I was born once .
 
Atul Mongia