अनुनाद's Image

अनुनाद

http://anunaad.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
16 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
229
पाठक भेजे
14022
पसंद
454
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
61.23
पसंद करें
2
नापसंद करें

वियतनामी भाषा में चूमना : ओशन वोंग

वियतनामी भाषा में चूमनामेरी दादी ऐसे चूमती हैजैसे पिछवाड़े के आँगन में बम हों फूट रहे,रसोईघर की खिड़की से होकर जहाँपुदीना और चमेली अपनी महक फैलाती हो,जैसे कोई लाश कहीं गिर रही हो भरभरा करऔर किसी बच्चे की जांघ की नसों से होकरजैसे लौट रही हो लपटें,बिदा के
 
भारत भूषण तिवारी
पसंद करें
2
नापसंद करें

इटारसी-भुसावल पैसिंजर : तालबेहट स्टेशन - मध्य रेल्वे

यह पुरानी कविता है। मेरी कविताओं की पिछली पोस्ट पर अपनी टिप्पणी में चन्दन इसे याद किया तो सोचा संजय व्यास की बस के बाद अपनी ट्रेन यहाँ लगा दूँ....शायद पहले कभी लगायी भी हो......इस कविता की ट्रेन यूँ तो झांसी से भुसावल जाती है पर लोग इसे इटारसी-भुसावल
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

संजय व्यास की कविता - चौथी किस्त

बस की लय को पकड़ते हुएये बस दो रेगिस्तानी जिला मुख्यालयों को जोडती हैजो दिन में शहर और रात में गाँव हो जाते हैसुबह ये शहर का सपना लिए जगते हैं और रात को सन्नाटा लिए सो जातें हैंइनके बीच सदियों का मौन हैं, सिर्फ कहीं कहीं जीवन तो कहीं इतिहास मुखर हैं।बस की
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
2
नापसंद करें

अन्त्योदय और कविता लिखना

पिकासो का यह विख्यात चित्र गुएर्निका यहाँ से साभारमेरी ये दो कविताएं कादम्बिनी के जून अंक में छपी हैं, लेकिन वहाँ कम्पोजिंग के दौरान इनमें काफ़ी फ़ेरबदल हो गया। इन्हें मूल और दुरुस्त रूप में यहाँ लगा रहा हूँ।अंत्योदय आज के जीवन की मुश्किल ये कि स्वप्नों
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
2
नापसंद करें

संजय व्यास की कविता - तीसरी किस्त

फ्रेम एक भरी पूरी उम्र लेकरदुनिया से विदा हुई दादी के बारे मेंसोचता है उसका पोताबड़े से फ्रेम में उसके चित्र को देखता।विस्तार में फ्रेम को घेरे उसका चेहराबेशुमार झुर्रियां लिएजिनमे तह करके रखा है उसने अपना समय।समय जो साक्षी रहा हैकई चीज़ों के अन्तिम बार
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
1
नापसंद करें

संजय व्यास की कविता - दूसरी किस्त

घर गृहस्थी में धंसता पुराना प्रेम पत्र (एक काव्यकथा) " श्री गोपीवल्लभ विजयते"बम्बोई(तिथि अस्पष्ट)प्यारी सुगना,मधुर याद.श्री कृष्ण कृपा से मैं यहाँ ठीक हूँ और तुम भी घर पर प्रभु कृपा से सानंद होंगी.मेरा मन तो बहुत कर रहा है कि पत्र के स्थान पर स्वयं
 
शिरीष कुमार मौर्य
May 31 2010 07:30 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अजेय की कविताएँ / हिमालय की कविताएँ : एक लम्बी पोस्ट

आत्मकथ्य इन कविताओं में हिमालय का घूमंतू जीवन है. हिमालय के भीतर और ट्रांस हिमालय के आदिम समुदायों में दो तरह की जीवन धाराएं हैं एक जो सेटेल्ड है, और दूसरा जो पशुपालक है और अभी तक ख़ानाबदोशों का जीवन जी रहा है. मैं उस सेटेल्ड समुदाय से आता हूँ जिस के पास
 
शिरीष कुमार मौर्य
May 27 2010 07:55 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

होमलैंड सिक्योरिटी : बफ़ व्हिटमन-ब्रॅडली

होमलैंड सिक्योरिटीघंटे दर घंटे दिन प्रतिदिनएअरपोर्ट सुरक्षाकर्मीखड़ी रहती है एक्सरे मशीन के पासबगल से गुज़रते भूतों कोमॉनिटर पर देखते हुएतह किये हुए कपड़ों के हलके धारीदार खाके में बहती हुईंधुंधले किनारों वाली स्याह आकृतियाँवह अपने काम अच्छी हैउसने सीख
 
भारत भूषण तिवारी
May 25 2010 10:31 PM
पसंद करें
-1
नापसंद करें

अशोक कुमार पाण्डेय की एक कविता

एक पुरस्कार समारोह से लौटकरवह सीकरी का दरबार ही था भरा-पूराऔर वहां संत ही थे सारेयह ग़र्मियों की एक ख़ुशनुमा शाम थीजब शहर के सारे पेड़ मुरझा चुके थेउस लान की घास रंगों से भी ज़्यादा गहरी हरी थीऔर इतनी ताज़ी कि शायद ओस भी शर्माती होगी उन पर गिरने से
 
शिरीष कुमार मौर्य
May 21 2010 05:45 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

स्त्रियों की खिलखिलाहटें - लाइज़ेल म्यूलर / अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेन्द्र

स्त्रियों की खिलखिलाहटेंधू धू कर जला देती हैं अन्याय के महल चौबारेऔर झूठी मनगढ़ंत कहानियाँइनमे तप कर सुन्दर सफ़ेद दीप्ति से निखर जाती हैं...ये संसदीय गलियारों को थर्रा देती हैंखिडकियों को धक्के मार मार करखोल डालती हैं पूरा प्रशस्तजिस से धज्जियाँ बन बन कर
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
2
नापसंद करें

आज मंगलेश जी का जन्मदिन है ...

होने के प्रमाण मंगलेश जी के बग़ैर दृश्य की कल्पना नहीं की जा सकती और यह सिर्फ़ साहित्यिक दृश्य नहीं है. यह जीवन, संघर्ष और सौन्दर्य का दृश्य है. यह मेरी ज़िन्दगी का दृश्य है. यह बात कितनी भी भावुक या अजीब लग सकती है लेकिन मंगलेश जी को समझने के बाद कोई
 
शिरीष कुमार मौर्य
टैग: निजी
पसंद करें
3
नापसंद करें

संजय व्यास की कविता - एक

मैं अनुनाद के लिए जिन कवियों की कविता हासिल करना चाहता रहा हूँ...संजय उनमें से एक हैं। इस बार काफ़ी संकोच के बाद अंततः उन्होंने मेरे अनुरोध का मान रखा है। संजय व्यास जोधपुर में रहते हैं और मैं नहीं जानता कि उनकी कविता उनके ब्लॉग के अलावा भी कहीं छपी है।
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

पुराने दोस्त

वेन गोग़ की पेंटिंग गूगल से साभारपुराने दोस्त याद आते हैं पुराने दोस्त स्मृतियों में रहते हैंमेरा जीवन तीन चौथाई स्मृतियों से बना है और एक चौथाई उम्मीदों सेतीन चौथाई में भी दोस्त एक चौथाई में रहते हों शायद दूसरी कई सारी चीज़ों के साथहो सकता है दूसरी
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

लूसिले क्लिफ्टन : यादवेन्द्र

इस वर्ष फरवरी में ७३ वर्ष की आयु में स्तन कैंसर से १६ वर्षों तक जूझने के बाद प्रसिद्ध अमेरिकी अफ़्रीकी कवियित्री लूसिले क्लिफ्टन (१९३६-२०१०)का निधन हुआ.अमेरिका में उन्हें अपनी अश्वेत बिरासत का गर्व करने के साथ साथ बेवाकी,चुटीलेपन और स्त्रीवादी सोच के लिए
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

गाज़ा में कविता है लापता : बफ़ व्हिटमन-ब्रॅडली

गाज़ा में कविता है लापतागाज़ा में कविता है लापताहालाँकि उसके देखे जाने की छुटपुट और अपुष्ट सूचनाएं हैंएक कहता है कि उसे गटर से बहते हुएउफनती हुई खून की नदी में मिलते देखादूजा खबर देता है कि बम फटने से मलबे और मिट्टी में बदल गईइमारत के नीचे उसकी चीखें
 
भारत भूषण तिवारी
Apr 27 2010 09:13 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

गिरिराज किराडू की कविताएँ

अनुनाद के भले दिन लगे हैं। मनोज के बाद अब हमें गिरिराज की कविताएँ मिली हैं। एक आम शिकायत है कि गिरि की कविताओं में कला है ! उसे महज कलाकार मानने और दूसरों से भी ऐसी उम्मीद रखने वाले बहुत सारे आत्मीय मित्र हैं मेरे। जी हाँ... इनमें कला है लेकिन वो कला, जो
 
शिरीष कुमार मौर्य
Apr 22 2010 02:08 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

मनोज कुमार झा की कविताएँ - दूसरी किस्त

मुझे बस उत्सव में शामिल कर लो तस्वीर और वक्तव्य प्रतिलिपि से साभार बाँसक ओधि उखाड़ि करै छी जारनिहमर दिन नहि घुरतकि हे जगतारिनि(नागार्जुन, पत्रहीन नग्न गाछ, १९६८)(बाँस की जड़ें खोदकर लाता और मात्र वही जलावन, ऐ जगतारनी क्या मेरे दिन नहीं फिरेंगे?)एक स्त्री
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

पोएट्री ऑफ़ विटनेस : कैरोलिन फोर्शे

साक्ष्य (विटनेस) की कविता पाठक को रूबरू कराती है उसकी व्याख्या से जुड़ी एक दिलचस्प समस्या से. हम अभ्यस्त हैं अपेक्षाकृत सरल श्रेणियों के: फ़र्क करते हैं "वैयक्तिक" और "राजनीतिक" कविताओं में; पहली श्रेणी से भान होता है प्रेम और भावनात्मक क्षति के गीतों
 
भारत भूषण तिवारी
टैग: विचार
पसंद करें
2
नापसंद करें

मनोज कुमार झा की कविताएँ

मनोज कुमार झा की कविताओं को "युवा कविता" का लेबल देते हाथ ठिठक गए ...फिर सही लेबल दिया "श्रेष्ठ हिंदी कविता" ! जी हाँ - यह नौजवान साथी प्रगतिशील हिंदी कविता की परंपरा से जीवनद्रव खींचता हुआ हमारे समय की श्रेष्ठ हिंदी कविता लिख रहा है। बिहार की धरती
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
2
नापसंद करें

कुछ हट कर ...

सोचता हूँ आज अपनी ही एकरसता तोड़ी जाए। ये ग़ज़ल दस बरस पहले कही गयी थी और आज अचानक एक पुराना रजिस्टर पलटते हुए मिली। बता दूँ कि १७ कि उम्र में पहली बार मेरा लिखा कुछ छपा था - राजाराम भादू द्वारा सम्पादित दिशाबोध नामक अखबार में मेरी पांच ग़ज़लें ! तो उन
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
1
नापसंद करें

कविता की काया को देखना- दूसरी किस्त /प्रस्तुति यादवेन्द्र

अब्बास कैरोस्तामी की ही एक और फिल्म है विंड विल कैरी अस, जो आधुनिक फारसी कविता की बेहद महत्वपूर्ण स्तम्भ फ़रोग फ़रोख्जाद की इसी शीर्षक की कविता से प्रभावित है.इस फिल्म में यूँ तो जीवन मृत्यु के सवाल को अपनी तरह से देखने का प्रयास किया गया है,पर फिल्म जिस
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
1
नापसंद करें

कविता की काया को देखना - प्रस्तुति : यादवेन्द्र

अब्बास कैरोस्तोमी आधुनिक ईरानी सिनेमा के शिखर पुरुष माने जाते हैं,इतना ही नहीं सिनेमा विशेषज्ञ उन्हें आज दुनिया के दस सर्व श्रेष्ठ फिल्म निर्देशकों में गिनते हैं.उन्होंने साहित्य की गहरी समझ वाले सिनेमा की नयी भाषा गढ़ी है,जिसमे इरान के श्रेष्ठ कवियों की
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
3
नापसंद करें

औरतों की दुनिया में एक आदमी

वे दुखों में लिथड़ी हैंऔर प्रेम में पगीदिन-दिन भर खटीं किसी निरर्थक जांगर मेंबिना किसी प्रतिदान केरात-रात भर जगींउनके बीच जाते हुएडर लगता हैउनके बारे में कुछ कहते कुछ लिखतेदरअसलअपने तमामतर दावों के बावजूदकभी भीउनके प्रति इतने विनम्र नहीं हुए हैं हमइन
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
1
नापसंद करें

विश्व रंगमंच दिवस (२७ मार्च) पर विस्साव शिम्बोर्स्का की कविता

दुखांतमेरे लिए दुखांत नाटक का सबसे मार्मिक हिस्साइसका छठा अंक है जब मंच के रणक्षेत्र में मुर्दे उठ खड़े होते हैं अपने बालों का टोपा संभालते हुएलबादों को ठीक करते हुएजब जानवरों के पेट में घोंपे हुए छुरे निकाले जाते हैं।और फांसी पर लटके हुए शहीदअपनी
 
pratibha
पसंद करें
0
नापसंद करें

कपिलदेव त्रिपाठी की एक कविता

कविता की किताबकल की सुबह के बारे मेंकल वाले कल के पहले वाले कल ही सोच लिया जाना चाहिएयह सोचते हुए कल सोचा किकल कविता की वह किताब पढ़ूंगादफ़्तर जाने के पहले - किसी लावारिस वक़्त मेंदूबे जी से मिलनाक्या आज ही zaroori हैकल न भी मिलेंतो क्याइस तरह तो कविता
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

भुतहा मकान के बाहर : मुक्तिबोध के लिए - हरि मौर्य

यह मेरे पिता की कविता है, कमाल की बात ये कि इसे उन्होंने 63 वर्ष की उम्र में लिखा है। उनके अतीत में बहुत पीछे 1962-63 के ज़माने में यानी उनके छात्रजीवन में कभी कहीं कुछ कविताएं थीं और भाऊ समर्थ,रामेश्वर शर्मा, नागार्जुन आदि से उनपर मिली ख़ूब प्रशंसा भी।
 
शिरीष कुमार मौर्य
टैग: निजी
पसंद करें
1
नापसंद करें

हवा के माथे की सलवटें : सिनान अन्तून

1हवा है एक अंधी माँलाशों के ऊपर सेलड़खड़ाती गुज़रतीकफ़न भी नहींबादलों को बचाओ तो सही मगर कुत्ते हैं बहुत ज्यादा तेज़ 2 चाँद है कब्रिस्तानरौशनी काऔर सितारे हैंकलपती औरतें 3हवा थक गईढो-ढोकर ताबूतऔर एक ताड़ के पेड़ के सहारेटिक गई एक उपग्रह ने पूछा:अब किस
 
भारत भूषण तिवारी
पसंद करें
0
नापसंद करें

बख्तियार वहाब्ज़ादे : अनुवाद एवं प्रस्तुति- यादवेन्द्र

१९२५ में जन्मे बख्तियार वहाब्ज़ादे अजरबैजान के सबसे प्रसिद्द कवियों में शुमार किये जाते हैं.अजरबैजान की आज़ादी के लिए सोविएत संघ से अलग होने की लड़ाई में उनका सक्रिय योगदान रहा है...खास तौर पर अज़र भाषा को ले कर वे खासे संवेदनशील रहे हैं. अपनी भाषा के
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

ऐसे तो हम लड़ाई हार जाएंगे

डॉ. मोहनलाल गुप्तायदि धन खो जाये तो समझिये कि कुछ नहीं खोया, स्वास्थ्य खो जाये तो समझिये कि कुछ खो गया किंतु चरित्र खो जाये तो समझिये कि सर्वस्व खो गया। इस समय भारतीय समाज के भीतर इस कहावत से ठीक उलटा काम हो रहा है। लोग अपने स्वास्थ्य और चरित्र को बेच कर
 
Dainik Navajyoti
पसंद करें
2
नापसंद करें

आभा बोधिसत्व की एक कविता

सीता नहीं मैं तुम्हारे साथ वन-वन भटकूँगीकंद मूल खाऊँगीसहूँगी वर्षा आतप सुख-दुखतुम्हारी कहाऊँगीपर सीता नहीं मैंधरती में नहीं समाऊँगी।तुम्हारे सब दुख सुख बाटूँगीअपना बटाऊँगीचलूँगी तेरे साथ परतेरे पदचिन्हों से राह नहीं बनाऊँगीभटकूँगी तो क्या हुआअपनी राह खुद
 
शिरीष कुमार मौर्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

नवनीता देवसेन की कवितायेँ

नवनीता देवसेन राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाषा और साहित्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और आदरणीय नाम है. यह उनकी जबर्दस्त बहुआयामी प्रतिभा ही है कि उन्होंने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में स्तरीय लेखन किया जो बहुत पसंद किया गया. बारह वर्ष की उम्र में
 
pratibha
टैग: कविता
पसंद करें
0
नापसंद करें

मैं चुपके से कहता अपना प्यार: जॉन बर्जर

(महाकवि नाज़िम हिकमत की कालजयी कविता यादवेन्द्र जी के सुन्दर अनुवाद में पढ़ने के बाद बारी है जॉन बर्जर के इस निबंध की. हिकमत की स्मृति में लिखे गए इस निबंध (के हिंदी अनुवाद) का प्रथम प्रकाशन प्रतिलिपि-९ में हुआ था।) मैं चुपके से कहता अपना प्यार(जनवरी
 
भारत भूषण तिवारी
पसंद करें
2
नापसंद करें

आज हमारे हिस्से का महिला दिवस है !

पता नहीं क्यों ...... पर आज ये एक अटपटी और बेहद निजी पोस्ट... इस थोड़ी-सी कैफ़ियत के साथ...१९९९ के बसंत में मित्र से जीवनसाथी बनने जा रही सीमा हर्बोला ने तय किया था कि शादी महिला दिवस के दिन करेंगे ....कोर्ट में अर्ज़ी लगायी पर एस० डी० एम०
 
शिरीष कुमार मौर्य
टैग: निजी
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्या होता है स्त्री होना -आलोक श्रीवास्तव की कविताएं : चयन - प्रतिभा कटियार

इस पोस्ट के साथ प्रतिभा कटियार अनुनाद की टीम का हिस्सा बन रही हैं। अनुनाद परिवार की ओर से मैं उनका स्वागत करता हूँ। ब्लॉग जगत में प्रतिभा एक सुपरिचित शख्सियत हैं। उनका रचनात्मक संग - साथ निश्चित रूप से अनुनाद को और समृद्ध बनाएगा। यहाँ महिला दिवस के अवसर
 
शिरीष कुमार मौर्य
टैग: विविध
पसंद करें
0
नापसंद करें

नाज़िम हिक़मत की एक कविता

अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्रतुर्की के विश्व प्रसिद्द कवि नाज़िम हिक़मत की ये बेहद चर्चित युद्ध विरोधी कविता हिरोशिमा पर अमेरिकी अणु बम गिराए जाने के दस साल बाद लिखी गयी थी और दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओँ में न केवल इसका अनुवाद हुआ बल्कि अनेक देशों के
 
शिरीष कुमार मौर्य
Mar 06 2010 11:27 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

माइकल जैक्सन अनुनाद पर ?

कुबेरदत्त समकालीन हिन्दी कविता के एक सुपरिचित और आत्मीय सहभागी है। उन्होंने दूरदर्शन के लिए लगातार साहित्य के कई ऐसे कार्यक्रम बनाए हैं, जिन्हें आज दस्तावेज़ माना जाता है। मल्टीमीडिया में तेज़ी से बढ़ती अपसंस्कृति और हत्यारी सभ्यताओं के हस्तक्षेप के बीच
 
शिरीष कुमार मौर्य
टैग: विविध
Mar 02 2010 08:33 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

होली पर चोरी ...

मुझे याद है अपने बचपन और बाद में अपने छोकरेपन किंवा छिछोरपन में हम गाँव(नौगाँवखाल) भर से लकड़ी का सामान चोरी कर होली में जला दिए करते थे और गाँव भर की गाली खाते थे...ये आदत अब भी गयी नहीं और गाँव भर की तो नहीं पर दो साथियों की गाली शायद खानी पड़े..... पर
 
शिरीष कुमार मौर्य
टैग: विविध
Mar 01 2010 12:35 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

रीता पेत्रो की कविताएँ - अनुवाद एवं प्रस्तुति यादवेन्द्र

१९६२ में अल्बानिया की राजधानी तिराना में जनमी रीता पेत्रो स्टालिन कालीन साम्यवादी पाबंदियों से मुक्त हुए अल्बानिया की नयी पीढ़ी की एक सशक्त कवियित्री हैं.उन्होंने तिराना विश्वविद्यालय से अल्बानी भाषा और साहित्य की डिग्री ली और बाद में एथेंस विश्वविद्यालय
 
शिरीष कुमार मौर्य
Feb 28 2010 08:43 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दहशत : हरीशचन्द्र पाण्डे की एक कविता

दहशतपारे सी चमक रही है वहमुस्कुराते हुए होंठों के उस हलके दबे कोर को देखोजहाँ से रिस रही है दहशतएक दृश्य - अपने अपने भीतर बनते बंकरों काएक ध्वनि - फूलों के चटाचट टूटने कीएक कल्पना - सारे आपराधिक उपन्यासों के पात्रजीवित हो गए हैंबहिष्कृत स्मृतियाँ लौटी
 
भारत भूषण तिवारी
Feb 28 2010 04:16 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुमार विकल की कुछ कविताएँ

चम्बा की धूप--------ठहरो भाई,धूप अभी आएगीइतने आतुर क्यों होआखिर यह चम्बा की धूप है-एक पहाड़ी गाय-आराम से आएगी.यहीं कहीं चौगान में घास चरेगीगद्दी महिलाओं के संग सुस्ताएगीकिलकारी भरते बच्चों के संग खेलेगीरावी के पानी में तीर जाएगी.और खेलकूद के बादयह सूरज
 
Ek ziddi dhun
Feb 24 2010 09:52 AM