मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य's Image

मस्तराम का का दर्शन और साहित्य

http://mastram-zee.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
20 Feb 2008
कुल प्रविष्टियां
25
पाठक भेजे
4644
पसंद
17
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
185.76
पसंद करें
0
नापसंद करें

वह एक है, पर नाम अनेक-हिंदी शायरी

हमने पूछा दुनिया के मालिक का पता उन्होने ढोल बजाने वालों का घर बता दिया जो पहुंचे वहाँ सुना शोर तो हमने मालिक को भुला दिया वह है एक पर नाम अनेक डर था की कहीं हम लें नाम उनका कहीं और अधिक शोर न मच जाये अगर कहीं हमने भीड़ से अलग नाम लिया --------------
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अपने घर का बजट बनाने से क्या फायदा-हिंदी शायरी

गृहणी ने गृहस्वामी से कहा ''आज मैंने महिलाओं की एक किताब में पढा कि घर का खर्च भी बजट बनाकर करना चाहिए'' गृहस्वामी ने कहा ''बजट बनाने के लिए भी कागज़ और पेन चाहिए जो अपने बजट में नहीं आ सकतीं पड़ोस से उधार लेकर अख़बार और किताब जो तुम पढ़कर बढाती हो ज्ञ
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

स्वार्थों के होते मेहमान-हिंदी शायरी

चेहरे पर है दिखावटी मुस्कान नहीं होता नीयत का भान बदन पर हैं जगमगाते वस्त्र धारण किए दिल में काली नियत लिए भरोसे के लिए निकल रहे हैं शब्द जुबान से निरंतर विश्वास और धोखे का मालुम नहीं अन्तर मन की आंखों से पढोगे जब उनको उनके शब्दों के अर्थों का अर्थ स
पसंद करें
0
नापसंद करें

फिर क्यों मन मचलता-हिंदी शायरी

कभी मन उदास हो कर कहीं चले जाने को करता कहीं और जाकर नये दोस्त ढूँढने के लिए मचलता पर यह है उसकी चंचलता जो सच यहाँ है वही वहाँ भी है धोखे और वफ़ा तो कहीं भी हो सकते जगह बदलने से हालात नही बदल सकते सच जानते हुए भी मन क्यों मचलता
पसंद करें
0
नापसंद करें

तब बदल जायेगा परिदृश्य-हिंदी शायरी

रात्रि के शीतल पलों में चन्द्रमा की हल्की रोशनी में देह पर धवल वस्त्र चारों और बिखर रही इत्र की खुशबू हाथों में गुलाब लिए प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए निकला है वह कितना सुन्दर लगता है दृश्य पर जब सूरज चमकेगा अपनी अग्नि से धरती को प्रज्जवलित करेगा अपनी
पसंद करें
0
नापसंद करें

दीवारों पर लिखे सत्य पढे नहीं है-हिंदी शायरी

रिश्तों में अब कोई दरार नही है क्योंकि अब लोगों के दिलों में अब उनके लिए कोई जगह बची नहीं है भाई और भाई के बीच अब कोई दीवार नहीं खड़ी नही रह सकती क्योंकि रिश्ता रह गया है जैसे हवा में लटकी तख्ती नफ़रत जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि समय के कमी की वजह से क
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब तक रहेंगे असलियत से अनजाने-हिंदी शायरी

जश्न मनाने के लिए लोग ढूंढते बहाने खाली हैं प्यार से दिल, आंखों से लगते आंसुओं को छलकाने मन में उदासियों का छाया है ढेर खुशियों को ढूँढ़ते हैं टके में सेर खुश होने के मतलब से अनजाने कोई पीता है शराब के जाम कोई ढूँढता अय्याशी के काम नाचने-गाने की महफ़ि
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बंद किये हैं जिन्होंने सोच के दरवाजे-हिंदी शायरी

बंद किये हैं जिन्होंने अपनी सोच के दरवाजे किसीका दर्द क्यों सुनेंगे, चाहे बजाओ बाजे अपने दिल में बस अपना ख्याल ही उनको कर जाते हैं दूसरों से हमेशा झूठे वादे अपने मतलब के लिए चाहे जहाँ चले जाते न हो कोई वास्ता तो, पुराने जख्म कर देते ताजे ऐसे लोगों से
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

फिर भी नफ़रत होती नहीं कम -हिंदी शायरी

वादा किया था हमने उनसे जिन रास्तों पर होगी उनकी बस्ती कभी नहीं गुजरेंगे उनसे हम उनके पास नहीं रखेंगे कभी कदम चलने के लिए और भी राहें है उसी पर हम चलते जाते फिर भी राह पर टकरा जाते हम करते उनको सलाम तो वह मुहँ फेर चले जाते दुनिया में प्यार की बात कितन
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कौन करता हैं हमारा इंतजार-हिंदी शायरी

दिल में ख्याल आते और जाते हैं कुछ याद रहते और कुछ भूल जाते हैं जिन्दगी का कारवाँ चलता है सच के साथ अपने को होता है बस अपना ही हाथ मिलते हैं हमसफ़र कुछ देर के लिए अपनी मंजिल आते ही साथ छोड़ जाते हैं किसका इन्तजार करें कौन करता है हमारा इन्तजार दूसरों क
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मामला दहेज़ का है-हिंदी शायरी

क्या वह दिन गए जब कहा जाता था कि माता-पिता भगवान् होते हैं अब तो ऐसा लगता है सबके लिए बच्चे एक तरह से सजावटी पकवान होते हैं बेटी को तो गिरा देते हैं गर्भ में ही जवान बेटे की शादी में भी चाहते हैं ढेर सारा दहेज़ कर देते हैं उसे बूढा उसकी ख्वाहिशों का
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

इंसान क्यों शेर कहलाना चाहता है-दो हिंदी क्षणिकाओं

इंसान कभी इंसान बनकर नहीं रहना चाहता किसी पराये का भला करता नहीं किसी बेबस को सहारा देता नहीं किसी के मन के दर्द का हाल लेता नहीं पर फिर भी फरिश्ता कहलाना चाहता पंजों में नाखून नहीं है जो किसी पर अत्याचार होने से रोक सके पंजों में वह ताकत नहीं है कि
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

फिर भी तमाशा चल रहा है-हिंदी शायरी

चमकता हुआ झूठ सब तरफ चमक रहा है तेज रौशनी से लोगों की आँखें चकाचौंध में बंद हो जातीं पूरे समाज का कदम बहक रहा है सड़कों पर हो गयी है खामोशी तमाशों का काम अब बंद कमरों में हो रहा है मदारी अब रास्ते में आवाज देकर नहीं बुलाता लोगों की भीड़ बन्दर-बंदरिया
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

असल में दानवता सब जगह खेले-हिंदी शायरी

प्रहलाद ने तो की थी भक्ति वैभव को दी थी चुनौती तपस्या से मिली थी उसे शक्ति पर आज तो वैभव की रौशनी देखकर सब अंधे हो जाते हैं उसकी शक्ति के आगे सब लाचार नजर आते हैं चकाचौंध में युवक-युवतियों की आसक्ति मन में व्यसनों की चादर ओढे हैं होलिका भी ऐसी चादर क
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिना यकीन के दुनिया चल नहीं सकती-हिंदी शायरी

उनका चेहरा देखकर ही हमने उन पर यकीन कर लिया उनकी नीयत से मुहँ फेर लिया जो फेरा उन्होंने मुहँ अपने किये हुए वादे भूल गए हम फिर भी करते रहे उम्मीद पर कभी वादे भी पूरे किये जाते हैं इरादे कितने भी हों बिना मतलब के काम भला इस जमाने में कभी किये जाते हैं
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पहले अपना इलाज करवा लो-हिंदी शायरी

आशिक ने लिखा ''अपने खून की स्याही से यह प्रेम पत्र लिख रहा हूँ इसे स्याही न समझना अपना इश्क अपने दिल के टुकड़े पर लिख कर इजहार कर रहा हूँ इसे कागज़ मत समझना तुम मुझे प्रेम कर आजमा लो'' लौटती डाक से जवाब आया ''अपना खून चेक करवा लो ख़त में सब लिखा हुआ नी
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिन्दगी का सच कोई नहीं जानता-हिंदी शायरी

कुछ सवालों के जवाब नहीं होते कुछ सवाल ही अपने आप में जवाब होते लाजवाब हैं वह लोग जो सवालों के जाल से दूर होते किसी के सवाल को दो जवाब कुछ का कुछ समझ जाये तो फिर बवाल मच जाये न दो जवाब तो भी मुसीबत ऐसे में बेहतर हैं न किसी की सुने न किसी को कुछ बताएं
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

माफ़ करना भाया-हिंदी शायरी

प्रेमी ने लिखा अपनी प्रेमिका को ''भूल जाना मुझको मेरे दिल में अब किसी और का चेहरा भाया अब तो तुम्हारी जगह उसका नाम मेरी जुबान पर आता नहीं चल सकता तुम्हारे साथ अधिक हालांकि मैंने अपने दिल को खूब समझाया'' नीचे उसने लिखा ''देखो अप्रैल फूल बनाया'' दूसरे
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

तरक्की नाम की चिडिया संवेदनशील हो गयी है-हिंदी शायरी

तरक्की आख़िर किस चिडिया का हैं नाम जिसके उड़ने की चर्चा आम हो गयी है जमीन पर कभी आती क्यों नहीं या ऊंची इमारतों में रहने की आदी हो गयी हैं डरती होगी नीचे उतरने में क्योंकि दिखाई देंगे भूखे नंगे लोग रास्ते में रोटी और प्यास से तड़पते हुए बीमार अस्पताल
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आदमी के मिजाज नहीं बदलते-हिंदी शायरी

बहार के मौसम में पेडों पर पते चले आते और पतझड़ में बिछड़ जाते हैं कभी पेडों को पते आने पर खुश होते नहीं देखा उनके बिछड़ने पर रोते नहीं देखा पर इंसानों की आदत हैं हर मौसम में रोना इसलिए उसकी जिन्दगी में हमेशा पतझड़ ही देख पाते हैं जिनके यहाँ आता है बसंत
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ऐसे में कहां जायेंगे यार-हिंदी शायरी

कहीं जाति तो कहीं धर्म के झगड़े कहीं भाषा तो कहीं क्षेत्र पर होते लफड़े अपने हृदय में इच्छाओं और कल्पनाओं का बोझ उठाये ढोता आदमी ने उड़ने से पहले ही अपने पर खुद ही कतरे शहर हो गये हैं जैसे युद्ध के मैदान किले बन गये हैं रहने के मकान पत्थर फिर बने लगे
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेपरवाह होकर चलते वही अपनी मंजिल पाते-हिंदी शायरी

अपनी इज्जत की खातिर लोग कभी दिखाते हैं दरियादिली तो कभी तंगदिल हो जाते खुशफहमी में जीते हैं सभी इंसान कि दुनियां वाले उनकी तरफ ही देखते है दूसरों की नजरों की परवाह करते अपनी राह से हटा लेते नजर इसलिये चलते चलते ही भटक जाते देखते हैं मस्तराम ‘आवारा’ अ
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

छद्म नाम से मोहब्बत मोबाइल हो गयी-हास्य व्यंग्य

एक प्रेमी से उसके मित्र ने पूछा-‘तुम्हें यकीन है कि तुम्हारी प्रेमिका तुमको सच्चा प्यार करती है?’ उसने कहा-‘हां, इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है। वह अब किसी दूसरे को प्यार कर ही नहीं सकती।’ मित्र ने कहा-‘उसे आजमा कर देख लो। तुमने उसे मोबाइल का उपहार दिय
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

देखने का होता है अपना-अपना नजरिया-हिंदी शायरी

देखने का होता है नजरिया अपना-अपना किसी के लिये कोई चीज हकीकत है किसी के लिये होती है सपना कोई कार पर कार बदलता है कोई पैदल ही चलता उसके लिए अपनी कार होती है सपना कोई रहता है ऊंची इमारतों और चमकदार महलों में तो कोई ईंट और पत्थर ढोकर उनका निर्माण कर मज
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दिखावे के लिए अमन का पैगाम-हिंदी शायरी

आदमी देखना चाहता हर चीज पर लिखा अपना नाम जिंदगी भर करता इसके लिए काम अपनी ख्वाहिशें पूरी करने के लिये कई जगह टेकता अपना मत्था ले जाता अपने घर के लोगो का जत्था नख से शिख तक माया का मोह मूंह में जपता राम देखें हैं मस्तराम आवारा ने इस दुनियां में कई लोग
Dec 29 2009 11:51 AM