"हिन्दी भारत"

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12 Jun 2010
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तब यह धोखा कैसे सम्भव है ?

मौलिक विज्ञान लेखनझूम रहे थे जुगनू नानाविश्वमोहन तिवारी, एयर वाइस मार्शल, (से.नि.)  जुगनू का नाम लेते ही मन में एक खुशी की लहर दौड़ जाती है। बरसात की नहाई संध्या की इन्द्रधनुषी मुस्कान याद आ जाती है। वर्षा ऋतु में तारों की आँख मिचौनी याद आ जाती
 
डॉ.कविता वाचक्नवी Dr.Kavita Vachaknavee
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लक्ष्मी का वाहन उल्लू क्यों

 मौलिक विज्ञान-लेखनलक्ष्मी का वाहन उल्लू क्योंविश्वमोहन तिवारी, एयर वाइस मार्शल, से. नि.   पुराणों में वर्णित विभिन्न देवी देवताओं के अपने अपने निश्चित वाहन हैं, यथा लक्ष्मी का वाहन उल्लू,  कार्तिकेय का  मयूर, सरस्वती का
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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'ईश्वर कण' (गाड पार्टिकल)

मौलिक विज्ञान लेखन'ईश्वर कण' (गाड पार्टिकल)- विश्व मोहन तिवारी, एयर वाइस मार्शल, से. नि.  'ईश्वर कण' की खोज का प्रयास 'लार्ज हेड्रान कोलाइडर' की मदद से हो रहा है जिसमें दस अरब डालर (विश्व का सर्वाधिक खर्चीला वैज्ञानिक
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
May 28 2010 05:14 AM
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'डायनोसोर' अचानक ६.५ करोड़ वर्ष पूर्व समाप्त

मौलिक विज्ञान लेखन'डायनोसोर' अचानक ६.५ करोड़ वर्ष पूर्व समाप्त इस आश्चर्यजनक घटना - कि 'डायनोसोर' अचानक ६.५ करोड़ वर्ष पूर्व समाप्त हो गए थे' - के प्रमाण मिलते हैं जिऩ्हें अधिकांश वैज्ञानिक आज स्वीकार करते हैं। इस सन्दर्भ में अचानक का अर्थ होगा 'कुछ हजार
 
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कराची में तिरंगा

कराची में भारत की धरोहररियाज़ सुहैलबीबीसी उर्दू संवाददाता, कराचीकराची में स्थित इस सरकारी स्कूल पर तिरंगा बना हैपाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची के बीचों-बीच एक इमारत पर नज़रें एकाएक ठहर जाती हैं क्योंकि वहाँ दिखाई देता है - भारत का झंडा.ये झंडा
 
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"हमें स्वयं कहीं उन की कमी महसूस नहीं हुई"

कल कविता कार्यशाला का आयोजन के विषय में लिखा ही था।उक्त आयोजन की सम्पन्नता के पश्चात् यह आवश्यक लगा कि गत ३ दिनों में विभिन्न माध्यमों से आए सन्देशों को सुरक्षित कर लिया जाए। (कुछ सन्देश तो कल के पन्ने पर ही हैं)  इस बहाने इन सबके प्रति हार्दिक
 
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कविता कार्यशाला का आयोजन

मित्रो! जैसा कि आपको ज्ञात ही है कि कविता कार्यशाला का यह आयोजन आप सभी के अत्यन्त उत्साह व सार्थक सहयोग से सम्पूर्ण हुआ। मैं आप सभी भागीदारों को हार्दिक धन्यवाद देना चाहूँगी कि  आपने इसे जीवन्त, सक्रिय और सफल बनाया। अनेक रचनाकारों की
 
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बाधाओं के बीच नई चाल में ढल रही हिंदी

बाधाओं के बीच नई चाल में ढल रही हिंदीकांति  कुमार जैन जब मैं पिछले दिनों की प्रसिद्ध फिल्म लगे रहो मुन्नाभाई देखकर लौट रहा था तो मेरे 20 वर्षीय नाती ने अचानक मुझसे पूछा- नानाजी मैंने कक्षा में गांधीवाद के बारे में तो पढ़ा था
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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ज़रूर आएँ

ज़रूर आएँ© डॉ.कविता वाचक्नवी/Dr. Kavita Vachaknavee
 
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जिज्ञासाओं का प्रसार

मौलिक विज्ञानलेखन   जिज्ञासाओं का प्रसारब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य (१०)गतांक से आगे अभी ब्रह्माण्ड के विषय में अनेक जिज्ञासाएँ  हैं। ब्रह्माण्ड का उद्भव कैसे प्रारम्भ हुआ? बिन्दु में ब्रह्माण्ड का सागर समाया कैसे? 10–४५ सैकैण्ड के
 
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May 14 2010 04:56 AM
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मेरी ज़ात है ......

मेरी जात है .........अगर हम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को आरक्षण देते रहना चाहते हैं तो जन-गणना में जाति का हिसाब तो रखना ही होगा| उसके बिना सही आरक्षण की व्यवस्था कैसे बनेगी ? हाँ, यह हो सकता है कि जिन्हें आरक्षण नहीं देना है, उन सवर्णों से उनकी जात
 
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मेरी ज़ात है ......

मेरी जात है......अगर हम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को आरक्षण देते रहना चाहते हैं तो जन-गणना में जाति का हिसाब तो रखना ही होगा| उसके बिना सही आरक्षण की व्यवस्था कैसे बनेगी ? हाँ, यह हो सकता है कि जिन्हें आरक्षण नहीं देना है, उन सवर्णों से
 
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माँ का खत

"माँ का ख़त" बलबीर सिंह `करुण' राजीव अग्रवाल (यूएसए) के सौजन्य सेनवम हिंदी महोत्सव में, बलवीर सिंह 'करुण' जी ने अपनी कविता 'माँ का ख़त' का पाठ किया था। समय की सीमा का सम्मान करते हुए, उन्होंने बेटे के जवाब को श्रोताओं से वंचित रखा। मैंने उस
 
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अदृश्य ऊर्जा की खोज की नई विधि

मौलिक विज्ञानलेखनअदृश्य ऊर्जा की खोज की नई विधि (मई २००९)ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य  (८)गतांक से आगेबेर्यान एकूस्टिक आसिलेशन ( बेर्यान ध्वनिक दोलन) के वर्णक्रम का अध्ययन करने वाली एक नई प्रविधि है 'बेर्यान आसिलेशन स्पैक्ट्रोस्कोपिक सर्वे' -
 
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आने वाला समय हिंदी का है*

पुस्तकचर्चा आने वाला समय हिंदी का है*- ऋषभदेव शर्माबहुभाषिकता की दृष्टि से भारत संभवतः विश्व भर में सर्वाधिक विविधताओं और विचित्रताओं वाला देश है। हजारों मातृभाषाएँ यहाँ हजारों साल से बोली जाती हैं। भिन्न भाषा भाषियों के बीच परस्पर संवाद
 
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May 05 2010 04:12 AM
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एफ.एम. प्रसारण बनाम भूमण्डलीकरण का भक्तिगीत

एफ.एम. प्रसारण बनाम भूमण्डलीकरण का भक्तिगीत-प्रभु जोशीये आठवें दशक के ‘पूर्वार्द्ध' के आरम्भिक वर्ष थे और श्रीमती इंदिरा गांधी गहरी ‘राजनीति-शिकस्त' के बाद अपनी ऐतिहासिक विजय की पताकाएँ फहराती हुईं, फिर से सत्ता में लौटी थीं। इस बार वे शहरी मध्यम-वर्ग के
 
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मत कर मोह तू : देवनागरी के रोमनीकरण के विमर्श

 " विमर्श के लिए लेख पुनः प्रेषित है,असग़र वजाहत के सुझाव पर कि हिंदी रोमन लिपि में भी लिखी जाये. ज़रूरी नहीं है कि सुझाव स्वीकार ही किया जाये  लेकिन इस पर विमर्श तो किया ही जाना चाहिएउमेश "इस सन्देश के साथ प्राप्त लेख को  पाठको के विमर्श
 
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May 03 2010 04:34 AM
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अदृश्य पदार्थ की चुनौती

मौलिक विज्ञानलेखनअदृश्य पदार्थ की चुनौतीब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य (८)गतांक से आगेअदृश्य पदार्थ के अस्तित्व का सैद्धान्तिक आधार भी है। स्फीति युग के सिद्धान्त के अनुसार स्फीति युग में तो पदार्थ का घनत्व क्रान्तिक घनत्व1 के बराबर था। अतः इस समय भी बराबर
 
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काश, यही काम भारत करता !

काश, यही काम भारत करता !डॉ. वेदप्रताप वैदिककई बार मैं सोचता हूँ  कि क्या दुनिया में ईरान जैसा भी कोई देश है ? इतना निडर, इतना निष्पक्ष और इतना सच बोलनेवाला देश ईरान के अलावा कौनसा है ?किसी ज़माने में माना जाता था कि गाँधी और नेहरू का भारत निष्पक्ष
 
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क्रिकेट की बीमारी और गुलामी

क्रिकेट की बीमारी और गुलामी लेख की पीडीफ फाईल यहाँ देखें © डॉ.कविता वाचक्नवी/Dr. Kavita Vachaknavee
 
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जिन्ना से बड़े किसी नेता इंतज़ार

© डॉ.कविता वाचक्नवी/Dr. Kavita Vachaknavee
 
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‘अदृश्य’ पदार्थ (डार्क मैटर) और ‘अदृश्य’ ऊर्जा (डार्क इनर्जी)

मौलिक विज्ञान-लेखन ‘अदृश्य’ पदार्थ (डार्क मैटर) और ‘अदृश्य’ ऊर्जा (डार्क इनर्जी)ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य (७)गतांक से आगे इस प्रतिगुरुत्वाकर्षण जैसे बल को समझाने के लिये ही अदृश्य ऊर्जा की संकल्पना की गई है। किन्तु इसके साथ ही अदृश्य पदार्थ की
 
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प्रकाश का अन्धमहासागर

मौलिक विज्ञान-लेखनब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य ६गतांक से आगे प्रकाश का अन्धमहासागरलगभग तीन लाख वर्षों तक ब्रह्माण्ड में प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा अन्य नाभिक, फोटॉन, इलैक्ट्रॉन तथा न्युट्रिनो के अपारदर्शी महासागर में एक दूसरे से टकराते रहे किन्तु दिख
 
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१३ अप्रैल बैसाखी १९१९ को जलियाँवाला बाग के इस प्रांगण में

१३ अप्रैल बैसाखी १९१९ को जलियाँवाला बाग के इस प्रांगण में गोलियाँ खाकर बलिदान हुई हुतात्माओं को शत शत प्रणाम।Memorial SymbolDescription© डॉ.कविता वाचक्नवी/Dr. Kavita Vachaknavee
 
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आज की हिंदी कविता और उसकी पर्यावरण संलग्नताएँ

                                                     आज की हिंदी कविता में पर्यावरण  डॉ.
 
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‘स्फीति युग’ : ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य (५)

मौलिक विज्ञान लेखनब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य  ५गतांक से आगे ‘स्फीति युग’इस पहेली को समझाने के लिये एलन गुथ ने यह परिकल्पना प्रस्तुत की कि ब्रह्माण्ड का प्रसार उस समय अत्यंत तेजी से हुआ, जितनी तेजी से आज हो रहा है उससे कहीं अत्यधिक तेजी से
 
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Apr 09 2010 03:20 AM
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शनैः शनैः की जा रही है, जिसकी बिदाई

style="width:220px;height:130px;float: right;border-top: 1px solid#000; border-bottom: 2px solid #000; padding: 5px;">लेकिन यह तो वह चाह ही रही होगी कि उनकी नस्ल को उन्होंने अपने सामने दम तोड़ते देखा और कुछ भी नहीं किया, इस लांछन से बचने की कोशिश करती
 
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‘महा एकीकरण युग’

 मौलिक विज्ञान लेखन‘महा एकीकरण युग’ब्रह्मांड के खुलते रहस्यगतांक से आगे आज अधिकांश वैज्ञानिक सहमत हैं कि मूल ब्रह्म–अण्ड का महान विस्फोट (‘बिग बैंग’) लगभग 1370 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ था। विस्फोट के शून्य सैकैण्ड से 10–43 सैकैण्ड तक क्या हुआ
 
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"हिन्दी भारत"

पुस्तक समीक्षा तेलुगु साहित्य का परिवर्तनशील परिदृश्‍यऋषभदेव शर्मानिखिलेश्‍वर (1938) तेलुगु साहित्य के दिगंबर कविता (अकविता) आंदोलन के छह प्रवर्तकों में से एक हैं. वे विप्‍लव रचयितल संघम (क्रांतिकारी लेखक संघ) के सक्रिय संस्थापक के रूप में भी जाने
 
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षड्यंत्र को `ज़रूरत’ बताने की मासूमियत का मर्म

गत दिनों हिन्दी भारत के अंक में जब मैंने माननीय राजकिशोर जी का रोष व  विचारपूर्ण लेख प्रकाशित किया रोमन कथा वाया बाईपास अर्थात् हिन्दी पर एक और आक्रमण तो मुझे कुछ ईमेल मिले जिनमें  लोगों ने लिखा/ पूछा कि असगर वजाहत जी ने हिन्दी
 
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रोमन कथा वाया बाईपास अर्थात् हिन्दी पर एक और आक्रमण

रोमन का रोमांस श्री असगर वजाहत के इस आह्वान को स्वीकार करते हुए मुझे प्रसन्नता है कि 'आज समय का तकाजा है कि हम हिन्दी भाषा की लिपि पर विचार करें और इस संबंध में जनमत बनाने पर विचार करें।' मेरा खयाल है, विचार करने पर कोई नई बात सामने आती है, तभी जनमत
 
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पाठकों की अदालत में अपने दोषी या निर्दोष होने की अपील

आतंकवादी ऐसे बनाती है पुलिसमुझे इस बात के लिए माफ किया जाए कि मैं कई बार अपने खिलाफ चल रहे मामले की चर्चा कर चुका हूँ । मामला अब भी अदालत में हैं और वहाँ जो फैसला होगा सो होगा, मैं अपने पाठकों की अदालत में अपने दोषी या निर्दोष होने की यह अपील
 
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पंद्रह साल से क्या होगा

पंद्रह साल से क्या होगा संसद में अल्पसंख्यकों के अलावा और किसी प्रकार का आरक्षण नहीं होना चाहिए, यह मानते हुए भी मेरी समझ में नहीं आता कि स्त्रियों के लिए आरक्षण के जिस विधेयक पर इतना शोर बरपा हुआ है, उसकी अवधि सिर्फ पंद्रह साल क्यों है। मजे की बात यह है
 
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शमा पर क्यों जलते हैं परवाने

शमा पर क्यों जलते हैं परवानेदाग का एक शेर इस विषय पर सटीक बैठता है जो उन्होंने तेरह वर्ष की उम्र में लिखा था : शमा ने सर पे रखी आग कसम खाने कोबखुदा जलाया नहीं मैंने परवाने को। तब परवान जला कैसे? परवाना खुद ही अपनी आग में जल गया। कम से कम शमा ने
 
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व्यापक प्रौद्योगिकी और प्रयोजनमूलक हिन्दी

 व्यापक प्रौद्योगिकी और प्रयोजनमूलक हिन्दीडॉ. ओम विकासप्रौद्योगिकी और संस्कृतिमानव सभ्यता में बेहतर और गुणवत्ता के लिए सतत प्रतिस्पर्धात्मक विकास होते रहे हैं । शक्ति के मशीनीकरण से औद्योगिक क्रांति हुई, उत्पादन बढ़ा, टिकाऊ, सुन्दर उत्पाद कम कीमत पर
 
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भारत में अन्तरिक्ष युग का उदय : मौलिक विज्ञानलेखन

गतांक पर उठे कुछ प्रश्नों के समाधान तिवारी जी ने ईमेल से सीधे प्रश्नकर्ताओं को भी यद्यपि भेज दिए हैं पुनरपि उन शंकाओं के उत्तर उस आलेख से अगली इस कड़ी के साथ भी देने की अनिवार्यता के कारण प्रथम उन उत्तरों को ही देखें, पश्चात अगली कड़ी को यहाँ प्रश्नोत्तर
 
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Mar 05 2010 07:11 PM
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विश्व पटल पर हिंदी : अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी

विश्व पटल पर हिंदी हिंदी विभाग, चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ इन दिनों जब देश में महाकुंभ का आयोजन हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के लोग भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव और जिज्ञासा रखते हुए भारत में आ रहे हैं। इसी तरह से चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय के
 
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Feb 26 2010 06:54 PM
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गणतंत्र के अक्षुण रहने व समर्थ बनने/ बनाने हेतु

!!भारत के सभी वीरगति पाए महानायकों व संस्कृति पुरुषों की स्मृति !! को !! विनम्र प्रणाम !! गणतंत्र दिवस पर भारतीय गणतंत्र के अक्षुण रहने व समर्थ बनने/ बनाने हेतु शुभकामनाएँ. लम्बे समय बाद नेट पर बैठ कर कुछ संवाद का सुयोग हो पाया है. वस्तुतः ३१ दिसंबर से
 
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अब देश में रात को भी विशाल ध्वजदंड पर फहराया जा सकेगा राष्ट्रीय ध्वज

सांसद श्री नवीन जिंदल ने रचा एक और इतिहास अब देश में रात को भी विशाल ध्वजदंड पर फहराया जा सकेगा राष्ट्रीय ध्वज गृह मंत्रालय ने श्री जिंदल के प्रस्ताव को दी अनुमतिनई दिल्ली, दिसंबर 23, 2009। सांसद श्री नवीन जिंदल ने फिर इतिहास रच दिया जब 22 दिसंबर 200
 
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एक और हजार का फर्क

एक और हजार का फर्क डा. वेदप्रताप वैदिक भारत में गरीब होने का अर्थ जैसा है, वैसा शायद दुनिया में कहीं नही है| भारत में जिसकी आय 20 रू. से कम है, सिर्फ वही गरीब है| बाकी सब ? यदि सरकार और हमारे अर्थशास्त्रियों की मानें तो बाकी सब अमीर हैं| 25 रू. रोज़
 
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