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कोतुहल

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01 Jun 2010
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उसने आने से मना किया था कभी ! हाल ऐ दिल!

इंतज़ार भी अजब राहत दिया करता,जबकि मालूम हो, उसने लौटकर आने से मना किया था कभी ।
Jun 01 2010 01:00 PM
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गिरेबाँ झाँकना सीखा नहीं उन्होंने अब तक ! त्रिवेणी की कोशिश!

शिकायत सी है उन्हें हम से, अब भी बेवफा समझते हैं हमें,!!! गिरेबाँ झाँकना सीखा नहीं उन्होंने अब तक.
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बस स्टॉप और तेरी यादों से रिश्ता! हाल ऐ दिल!

कल कोई ज़िक्र वफ़ा का कर रहा था कहीं...और मैं फिर आदतन तुम्हे याद कर बैठा........ क्या करूँ पागलपन गया जो नहीं है अभी........फिर उस शख्स की बातें ध्यान से सुनने लगा और ..........और..........और फिर सोचा अब भी लोग वफ़ा पे यकीन करते हैं?........यूँही शिक़वे
May 25 2010 09:05 PM
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अगर ये फासला ना होता, तो क्या ये मज़ा होता ? त्रिवेणी की कोशिश!

याद जब भी आती है, तो आँखें नाम हो ही जाती हैं,तेरी बातों की यादों में, ये ग़ोते लगाती हैं ,!!!अगर ये फासला ना होता, तो क्या ये मज़ा होता ?
May 16 2010 02:30 PM
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मैं तेरी यादों से कितना दूर चला आया हूँ। त्रिवेणी की कोशिश!

न है अब दिल को दुखाने की वजह,न कोई रोने का सबब ही बाकी है,!!!मैं तेरी यादों से कितना दूर चला आया हूँ।
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जाने से पहले ख़ता तो बता जाता। हाल ऐ दिल!

उसके जाने का हमें अफ़सोस तो बहुत था,मगर उससे भी ज़्यादा अफ़सोस उसकी बेरुख़ी था,उसको जाना था, तो चला जाता, हम ना रोकते उसे,मगर जाने से पहले ख़ता तो बता जाता।
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कम्बख्त बेवफा ना होता, तो मेरे दिल में ही रह रहा होता। हाल ऐ दिल!

बात करता है ज़ालिम तो,ज़ुबां से दिल में उतर जाता है ,कम्बख्त बेवफा ना होता,तो मेरे दिल में ही रह रहा होता ।
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और वो मुझे ग़म देता रहा! हाल ऐ दिल!

वो मुझे ग़ैर समझता रहा उम्र भर,और मैं उसे अपना कहता रहा ,वो मुझसे दूर रहा करता था हर दम,और मैं अपनी ज़िन्दगी में उसे रखता रहा,था एक नादान मैं ही,मैं उसके ग़म में रोता रहा,और वो मुझे ग़म देता रहा... Pic from:http://www.fineartprintsondemand.com/
May 01 2010 09:10 PM
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"कुछ ख्वाब कभी सच नहीं हुआ करते।'' हाल ऐ दिल!

मैं आज फिर,रोज़ की तरह सो कर उठा,तुम्हें ढूंढा कुछ देर,बिस्तर पर हाथ मारते हुए,फिर याद आया,"कुछ ख़्वाब कभी सच नहीं हुआ करते।''
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कमी शायद मुझी में थी! दो लाइन!

मेरे दिल में रहकर भी, वो बेगाना ही रहा,कमी शायद मुझी में थी, या जगह थोड़ी कम रही होगी....
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कमबख्त दोस्त ही रहता, तो अच्छा होता। दो लाइन!

वो तो एक अच्छा दुश्मन भी ना बन सका,कमबख्त दोस्त ही रहता, तो अच्छा होता।
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तेरे लबों के बोल, रंगीन हैं, रंगों की तरह! त्रिवेणी की कोशिश!

बरसते हैं यूँही रंगों की तरह,और दिल को गुलज़ार कर जाते हैं,!!!तेरे लबों के बोल, रंगीन हैं, रंगों की तरह.....
Feb 28 2010 03:59 PM
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काश उनको भी हम ये बता पाते... त्रिवेणी की कोशिश!

थी तरस हमको भी मुहब्बत की,थी तरस हमको भी दीदार-ऐ-यार की,!!!काश उनको भी हम ये बता पाते...
Feb 21 2010 11:00 AM
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तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये। हाल ऐ दिल!

यूँ सोचता हूँ के कभी मिलूँ,तुझसे अचानक कहीं,खौफ़ बस इतना है,के तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये।
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लगता है आज फिर मेरी नमाज़ क़ज़ा होगी। त्रिवेणी की कोशिश!

यूँ हवा में उड़ती हुई ज़ुल्फें तेरी,और उनमें मचलते हुए मेरे अरमान,!!!लगता है आज फिर मेरी नमाज़ क़ज़ा होगी।
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काश वक़्त मुड़कर चला आता। त्रिवेणी की कोशिश!

चलता जा रहा हूँ बस यूँही,उन्ही रास्तों पर तुम्हारी यादों के साथ,!!!काश वक़्त मुड़कर चला आता।
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SVM education centre और मैं.

तीन माह से अधिक हो गया है एक N G O में पढ़ते हुए। सोचा था कम रो वैसे भी रहा हूँ, कुछ जन सेवाकर भी कमाकर देखते हैं। आज से ३ महीना पहले जब मुझसे स्कूल के प्रिंसिपल ने मिल्कात की थी तो कहा तो यही था के यहाँ आपको जन सेवा करने क मौका मिलेगा, जगन आपको हम उतनी
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ये झूठ इतना खूबसूरत क्यूँ होता है? त्रिवेणी की कोशिश!

यूँ बरसते हैं उसकी आँखों से आंसू,जैसे सीप से मोती निकलकर बिखर रहे हों,!!!ये झूठ इतना खूबसूरत क्यूँ होता है?
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हमने हँसकर क़ुबूल उसको कर लिया। त्रिवेणी की कोशिश!

था मुक़द्दर में कोई,काँटा, फूल के साथ,हमने हँसकर क़ुबूल उसको कर लिया।
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आज वो शख्श भीड़ में भी तनहा नज़र आता है... हाल ऐ दिल!

उसकी ख्वाहिश थी कुछ तो अलग करने की, इस तरह चलने की और भीड़ से अलग लगने की, शायद कुछ और ही मंज़ूर ख़ुदा को रहा होगा, आज वो शख्श भीड़ में भी तनहा नज़र आता है...
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कहाँ रात जाती है? कहाँ दिन जाता है? हाल ऐ दिल!

बेख़याली में भी कभी उनका जो ख़याल आता है, फिर किसको ख़बर है, कहाँ रात जाती है? कहाँ दिन जाता है?
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जिस डगर का कोई आसमान ना हो। हाल ऐ दिल!

उधर जाने की क्या सोचूँ के जिधर तेरे नाम ना हो, मेरे लिए है वो डगर, जिस डगर का कोई आसमान ना हो।
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उन्होंने चेहरे पढ़ने क हुनर सीख लिया. हाल ऐ दिल!

यूँ कतरों में गुज़र रही थी ज़िन्दगी अपनी, और उन्होंने क़तरों से तर दामन कर लिया, हम सोचकर बैठे थे ना कहेंगे ग़म उनसे, पर उन्होंने चेहरे पढ़ने क हुनर सीख लिया.
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फिर बनके आंसू उनकी पलकों में शब् काटी। त्रिवेणी की कोशिश!

इंतज़ार कल फिर किया उनका, और उनसे मुलाक़ात भी की, ! ! ! फिर बनके आंसू उनकी पलकों में शब् काटी।
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अब ज़िन्दगी ने हकीक़त से रूबरू कराया है। त्रिवेणी की कोशिश!

हम भी कभी ख़्वाबों पे यकीं किया करते थे , रात रात भर नए ताने बुना करते थे, ! ! ! अब ज़िन्दगी ने हकीक़त से रूबरू कराया है।
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यूँ तमाशा सर-ऐ-महफ़िल तो ना दिखाना था। हाल ऐ दिल!

तुम्हे यूँ लौटकर ना आना था, टूटा हुआ वो ख़्वाब फिर से तो ना दिखाना था, मैं यूँही सब्र कर चूका था ज़ालिम, यूँ तमाशा सर-ऐ-महफ़िल तो ना दिखाना था ।
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वो कहता है मैंने उसे अपना नहीं समझा। हाल ऐ दिल!

कुछ भी नहीं माँगा था मैंने कभी उससे, वो कहता है मैंने उसे अपना नहीं समझा।
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उनसे भी कभी रूठकर देखेंगे हम. त्रिवेणी की कोशिश!

थी तमन्ना कल भी, है तमन्ना आज भी, ! ! ! उनसे भी कभी रूठकर देखेंगे हम।
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लोग ज़ख्म देकर भूल क्यूँ जाते है? त्रिवेणी की कोशिश!

वो मुझसे पूछ रहा है मेरे दर्द का हाल, करता है बातें मेरी दवा लेकर आने की, ! ! ! लोग ज़ख्म देकर भूल क्यूँ जाते है ?
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कमबख्त होंठ मेरे दिल का साथ नही देते। त्रिवेणी की कोशिश!

हाल-ऐ-दिल , ग़म-ऐ -जहाँ और मेरे मुस्कुराने की आदत, ! ! ! कमबख्त होंठ मेरे दिल का साथ नही देते।
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तुम्हारे जाने का यक़ीन नही हुआ! हाल ऐ दिल!

आज फिर तुम्हारे, एक sms के, इंतज़ार में बैठा हुआ हूँ, फ़ोन की हर सरसराहट पे लगता, ये कॉल तुम्हारा ही होगा, जैसे हर रोज़ आया करता था, तुम्हारे जाने से पहले, न जाने क्यूँ, अभी तक, तुम्हारे जाने का यक़ीन नही हुआ!
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अब हम साथ नही हैं। त्रिवेणी!

ख़ता उसकी न पूछिए, ख़ता मेरी न बताईये, ! ! ! बस याद ये रखिये के अब हम साथ नही हैं।
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तेरे अफसाने भी न! त्रिवेणी!

मुझको रुलाने ये फिर आ गए हैं, रात भर जगाने ये फिर आ गए हैं, ! ! ! तेरे अफसाने भी न दुश्मन मेरे हैं॥
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ज़िन्दगी बेशक़ गुज़रती तन्हाईयों में,कम से कम उम्रभर का दर्द तो न मिला होता। हाल ऐ दिल!

काश ऐसा न हुआ होता, मैं तुझसे मिला न होता, ज़िन्दगी बेशक़ गुज़रती तन्हाईयों में, कम से कम उम्रभर का दर्द तो न मिला होता। मैं जिसको सावन समझता था, वो मौसम पतझड़ न हुआ होता, उन खुशबूदार पेड़ों की छाँव में, वो इश्क का काँटों भरा फूल न मिला होता, ज़िन्दगी ब
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तुम चले क्यूँ नही जाते ? : यूँही चलते चलते

यूँ फूल भी ज़रा छुपकर मुस्कुराने लगे हैं,भँवरे भी इस बाग़ से बचकर जाने लगे हैं,तुम यहाँ से उठकर चले क्यूँ नही जाते?तुम्हे देखकर नज़ारे भी शर्माने लगे हैं।
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ख़ंजर! हाल ऐ दिल !

उसने मुझे देखा और ख़ंजर छुपा लिया,मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा लिया,!!!लगता है बाकी अब भी है कुछ शर्म उसमे...
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हो रहा है जो भी कुछ,इसको ऐसे तो नही होना था। हाल ऐ दिल!

आज फिर कुछ सालों के बाद,फिर वहीँ खड़ा हूँ उसी दोराहे पर,फिर सोच रहा हूँ कहाँ जाऊँ,आज खड़ा इस दोराहे पर,हो रहा है जो भी कुछ,इसको ऐसे तो नही होना था!हूँ बेचारा आज फिर,हूँ लाचार सा,देखता हूँ सबको आते जाते,मगर ख़ुद हूँ बीमार सा,जाने इंतज़ार है मुझे किस बात
Sep 18 2009 03:05 PM
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यूँही नहीं कोई, छोड़ के जाता किसीको! हाल ए दिल!

आज ऑरकुट पे घुमते घुमते एक फोरम में, एक सवाल से दो चार हुआ. किसी लड़की ने पूछा के क्या सिर्फ लडकियां ही बेवफा होती हैं? लड़के बेवफा नहीं होते क्या? सवाल जायज़ था, शायद उस फोरम को बनाने वाला भी सोच रहा होगा के ये क्या कह दिया. बेवफा तो कोई भी हो सकता है,
Aug 09 2009 10:28 PM
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फलसफ़ा जिंदगी का, तमाम हो चुका अपना। हाल ऐ दिल

जिंदगी की किताब के कुछ खाली पन्ने, आज भी कुछ अल्फ़ाज़ों के लिखे जाने के इंतज़ार में हैं। नादान है ये अभी नही जानते, के फलसफ़ा जिंदगी का, तमाम हो चुका अपना।
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कोतुहल

ख़बर रखते रहे ज़माने की,और ये याद ना रहा, कब आखिरी बार मिले थे तुझे। गुज़रे गए अनजाने में,हम उन गलियों से, जहाँ आखिरी बार मिले थे तुझे।