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सूरज प्रकाश का रचना संसार.........

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31 Dec 2009
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पन्‍द्रहवीं कहानी - क्या आप ग्रेसी राफेल से मिलना चाहेंगे?

चर्चगेट। मुंबई में पश्चिमी रेलवे में उपनगरीय ट्रेनों का अंतिम पड़ाव। आप जब वहां पहुंचेंगे तो स्टेशन के अहाते से बाहर निकलने के लिए तीन तरफ के लिए तीन चार रास्ते मिलेंगे। दायीं तरफ, बायीं तरफ और सामने, नाक की सीध में। सीधे चलने पर बायीं तरफ खुलने वाला
 
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चौदहवीं कहानी - फैसले

बद्रीप्रसाद वापिस लौट रहे हैं। एकदम हताश। टूटे हुए। अपने ही घर से बेगाने होकर। अपनों द्वारा ही ठुकराए जा कर। यह ठुकराया जाना नहीं है तो क्या है? क्या इसी दिन को देखने के लिए इतने बरस इंतज़ार किया था उन्होंने! एकदम ठूंठ-से दिन गुज़ारे। तनहा रहे। जैसे
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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तेरहवीं कहानी - शिब्बू

हमने उस वक्त तक दौड़ में मिल्खा सिंह का ही नाम सुना था। हमें तब तक पता नहीं था कि बड़ी रेसों में दौड़ने के लिए खास तरह के जूतों की और तकनीक की ज़रूरत होती है। हमें यह भी पता नहीं था तब तक कि किसी भी दौड़ में अव्वल आने के लिए समय की गणना के लिए सेकेंड
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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बारहवीं कहानी - रंग–बदरंग

उन्हें दूसरे पैग से नशा होने लगा है। दिमाग में हल्की–हल्की सी झनझनाहट शुरू हो गयी है। कुछ भी सिलसिलेवार नहीं सोच पा रहे हैं। `ऑन द राक्स' व्हिस्की के गिलास पर बार–बार पानी की बूँदें जम जाती हैं। वे उन बूँदों को बड़ा होते और गिलास के पैंदे की तरफ तेजी
 
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ग्‍यारहवीं कहानी - आँख मिचौली

आँख मिचौली कैंप डायरी पहला दिन जिस जगह हमने कैंप लगाया है, वह समतल जमीन का एक छोटा–सा टुकड़ा है। नीचे की तरफ पहाड़ी नाला और ऊपर की तरफ सड़क। आसपास ऊबड़–खाबड़ जमीन है जिस पर बेतरतीबी से जंगली झाड़ियाँ उगी हुई हैं। हालाँकि हमें यहाँ सिर्फ सात दिन रहना
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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दसवीं कहानी – फ़र्क

कुंदन आज बहुत खुश है। आज का दिन उसे मनमाफिक तरीके से मनाने के लिए मिला है। खूब घुमायेगा बच्चों को। पार्क, सिनेमा, चिड़ियाघर। किसी अच्छे होटल में खाना खिलायेगा। आज उसे मारुति वैन चलाते हुए अजब-सा रोमांच हो रहा है। रोज यही वैन चलाता है वह, पर रोज के चल
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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नौवीं कहानी - टैंकर

लुधियाना से जब करतारा ने टैंकर हाइवे पर लगाया तो रात के ग्यारह बज चुके थे। दिसम्बर की सर्द रात, सत्तर और अस्सी के बीच रेंगती स्पीडोमीटर की सुई और पूरी बोतल ठर्रा चढ़ाए व्हील पर बैठा करतारा। उसकी सीट के पीछे वाली लम्बी बर्थ पर दो-दो कम्बलों में खुद को
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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आठवीं कहानी

खो जाते हैं घर बब्बू क्लिनिक से रिलीव हो गया है और मिसेज राय उसे अपने साथ ले जा रही हैं। उन्होंने क्लिनिक का पूरा पेमेंट कर दिया है। - ओ के डाक्टर, तो फिर मै इसे ले जा रही हूं। कोई भी बात होगी तो मैं आपको फोन पर बता दूंगी। वे चलते समय डॉक्टर की अनुमत
 
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सातवीं कहानी - छोटे नवाब, बड़े नवाब

आखिर फैसला हो ही गया। हालांकि इससे न छोटा खुश है, न बड़ा। बड़े को लग रहा है-छोटे का इतना नहीं बनता था। ज्यादा हथिया लिया है उसने। छोटा भुनभुना रहा है-बड़े ने सारी मलाई अपने लिए रख ली है। मुझे तो टुकड़ा भर देकर टरका दिया है, लेकिन मैं भी चुप नहीं बैठू
 
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छठी कहानी - बाबू भाई पंड्या

बाबू भाई पंड्या से मेरी मुलाकात डॉक्टर भाटिया ने करायी थी। उन दिनों मेरी पोस्टिंग अहमदाबाद में थी और डॉक्टर भाटिया सिविल अस्पताल के बर्न्स विभाग मे काम कर रहे थे। डॉक्टर भाटिया की पत्नी पारुल मेरी दोस्त थी और उसी ने भाटिया को मेरे लेखन के सिलसिले में
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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पांचवीं कहानी - पत्थर दिल

शिरीष, कैसे हो! फोटो से तो यही लगता है, आगे के सारे बाल झड़ गये हैं। शायद चांद भी निकल आयी हो। चश्मे का नम्बर तो पता नहीं बदला या नहीं, पर इस फोटो में तुमने जो चश्मा लगा रखा है, तुम पर जंच रहा है। वह पहले वाला लापरवाही का-सा अंदाज शायद अभी भी छोड़ा न
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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मेरी चौबीसवीं कहानी - मर्द नहीं रोते

मित्रो मेरी चौबीसवीं कहानी - मर्द नहीं रोते का आनंद लीजिये इस लिंक पर http://www.sahityashilpi.com/ सूरज प्रकाश
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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बाजीगर - तेईसवीं कहानी

बाजीगर खबर हाथों हाथ पूरे दफ्तर में फैल गयी है। सभी लपक रहे हैं उस तरफ। जो भी सुनता है, चार को सुनाता है, फिर कानों सुनी को आंखिन देखी करने के लिए टीले की तरफ बढ़ जाता है। जो लोग उस तरफ से आ रहे हैं, ऐसे बतिया रहे हैं, हो-हो कर रहे हैं, मानो संसार का
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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उपन्‍यास देस बिराना ई बुक के रूप में

हमारे मित्र रवि रतनामी ने अपने ब्‍लाग rachanakar.blogspot.com पर कुछ दिन पहले पाठकों तक मेरी दो किताबें ई बुक्‍स के जरिये पाठकों तक पहुंचायी हैं। ये हैं चार्ली चैप्लिन की आत्‍म कथा का अनुवाद http://www.esnips.com/doc/26a37191-f6a2-41b2-8946-119ab4c77
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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अल्बर्ट -1984 में लिखी पहली कहानी

में सारिका में मेरी लिखी पहली लघु कथा पुरस्कृत हुई थी। उसे पढ़ कर आकाशवाणी बंबई में काम कर रहे कवि अनूप सेठी ने पत्र भेजा था कि मैं आकाशवाणी में आ कर एक कहानी रिकार्ड करवा जाऊं। तभी बहुत जद्दोजहद के बाद ये पहली कहानी लिखी और रिकार्ड करायी गयी थी। अभी
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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चार्ली चैप्लिन की आत्‍मकथा का अनुवाद रचनाकार.ब्‍लागस्‍पाट पर

मित्रो आप मेरे द्वारा अनूदित चार्ली चैप्लिन की आत्‍मकथा अब आप http://rachanakar.blogspot.com/2008/08/1_29.html पर किस्‍तों पर पढ़ सकते हैं. रवि जी ने पिछले तीन दिन में इसकी पांच किस्‍तें पोस्‍ट की हैं. पूरी आत्‍मकथा लगभग 550 पेज की थी और मेरे ख्‍याल
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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बाइसवीं कहानी रचनाकार.ब्‍लागस्‍पाट पर

मित्रो आदान प्रदान योजना के तहत मेरी लम्‍बी कहानी देश, आज़ादी की पचासवीं वर्षगांठ और एक मामूली सी प्रेम कहानी आप रचनाकार.ब्‍लागस्‍पाट पर पढ़ें. लिंक यहां दे रहा हूं. मेरे अपने ब्‍लाग पर रचनाएं आती रहेंगी http://rachanakar.blogspot.com/2008/08/blog-po
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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इक्‍कीसवीं कहानी - घर बेघर

घर बेघर लंदन से महेश आया हुआ है। यारी रोड का अपना मकान खाली कराने के लिए। दो बरस पहले जब वह हमेशा के लिए लंदन बसने के इरादे से बंबई से गया था वो एक भरोसेमंद एजेंट की मार्फत एक बरस के लिए अपना मकान एक मलयाली को दे कर गया था। तय हुआ था कि वह ठीक एक साल
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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बीसवीं कहानी - करोड़पति

इस समय भी वह लिफ्ट के पास खड़ा इशारे से किसी न किसी को अपनी तरफ बुला रहा होगा या फिर कैंटीन में बैठा अपनी ताजा रचना जोर - जोर से पढ़ रहा होगा। जिसने भी उससे आंख मिलायी, उसी की तरफ उंगली से इशारा करके अपनी तरफ बुलायेगा और भर्राई हुई आवाज़ में कहेगा, ''
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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19वीं कहानी - मातमपुर्सी

इस बार भी घर पहुंचने से पहले ही बाउजी ने मेरे लिए मिलने जुलने वालों की एक लम्बी फेहरिस्त बना रखी है। इस सूची में कुछ नामों के आगे उन्होंने ख़ास निशान लगा रखे हैं, जिसका मतलब है, मुझे उनसे तो ज़रूर ही मिलना है। इस शहर को हमेशा के लिए छोड़ने के बाद अब
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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18वीं कहानी - दिव्या, तुम कहाँ हो?

सपना देख रहा हूं क्या? या सब कुछ मेरे सामने घट रहा है। मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि कहीं कुछ गड़बड़ है। न मैं पूरी तरह होश में हूं न बेहोशी में। मैं जागने और नींद के बीच इधर से उधर झूल रहा हूं। हिचकोले खा रहा हूं। सरकस के एक्रोबैट्स की तरह। ऊपर से हवा
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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सत्रहवीं कहानी - डर

शारदा काम पर लौट आयी है। गोद में महीने भर का बच्चा लिये। दरवाजा मिसेज रस्तोगी ने खोला। उसे देखते ही खुश हो गयीं, ''बधाई हो शारदा। अच्छा हुआ तू आ गयी। तू जो ल़ड़की लगा गयी थी थी, वह तो एकदम चोट्टी थी। नागे भी कितने करती थी। देखूं तो सही, कैसा है तेरा
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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सोलहवीं कहानी - सही पते पर

आज का सारा शेड्यूल बिगड़ गया। एक तो गाड़ी आठ घंटे लेट और ऊपर से मद्रास बंद। स्टेशन पर कोई ऑटो, टैक्सी नहीं। ऑफिस की गाड़ी आकर कब की चली गयी होगी। किस्मत से सहयात्री मिलीटरी वाला है। उसी की जीप में लिफ्ट लेकर होटल तक पहुंच पाया हूं। अब एक पूरा बेकार,
 
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Dec 29 2009 11:53 AM
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कहानी - छूटे हुए घर

वे महिलाएं अपनी जिंदग़ी के सबसे कठिन दौर से गुज़र रही थीं। वे बेहद चिड़चिड़ी हो गई थीं और हमेशा शिकायत के मूड में रहतीं। इन दिनों उनके पास बातचीत का सिर्फ एक ही टॉपिक था। इस विषय के अलावा वे न तो कुछ कहना चाहतीं, न सुनना। वे मौके या जगह की भी परवाह नहीं
 
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Sep 18 2009 03:31 PM
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उर्फ़ चंदरकला – 1991 की अश्लीलतम कहानी

ये कहानी 1976 की घटना पर 1991 में लिखी गयी थी और नवम्बर 91 में वर्तमान साहित्य में छपी थी। कहानी छपते ही हंगामा मच गया था। वार्षिक ग्राहकों ने अपना चंदा वापिस मांगा, देश भर में इसकी फोटोकॉपी करा के प्रतियां बांटी गयीं, गोष्ठियां हुईं, साल भर कहानी के
 
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