सवेरे सवेरे ख़बर पढ़ी की विख्यात ग़ज़ल गायिका इकबाल बानो का मंगलवार को लाहौर में निधन हो गया। आज उनकी याद में उन्हीं की आवाज़ में कलामे-फैज़ हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे हम देखेंगे ....... वो दिन कि जिसका वादा है
कुछ पुराने कैसट्स मिल गए जिसमें सर्वश्री शरद जोशी, केपी सक्सेना आदि के स्वर में ही उनकी व्यंग्य रचनाऍं हैं । शुरुआत करते हैं श्री के पी सक्सेना जी की एक बेहतरीन गद्य रचना से। सुनिए हॉकी पर राजनीति के पैनल्टी स्ट्रोक की कहानी उनके अपने अंदाज़ म
आज बात करते हैं किताबों की दुकान की। जहॉं जाइये अपने पसंद की पत्रिका पढि़ये, वो भी बिना घर से बाहर निकले। जी हॉं, मैं बात कर रहा हूँ एक ऑनलाइन मैगज़ीन स्टोर की। इस ऑनलाइन मैगज़ीन स्टोर का पता है http://www.ezinemart.com/ इस स्टोर में अधिकांश किताब
बचपन से डैडी कों फोटोग्राफी करते देख रहे हैं इसलिए फोटोग्राफी ने छुटपन से ही आकर्षित किया है। आज के इस डिजिटल युग में फोटोग्राफी काफी सस्ती हो गई है। हॉं शुरुआती खर्चा ज़रुर है कैमरा लेने का पर उसके बाद तो चाहे जितनी तस्वीरें लिजिए, फिल्म खत्म हो
इंडिया टुडे पत्रिका के नए अंग्रेज़ी दैनिक मेल टुडे ने हिन्दी चिट्ठाकारी पर एक लेख छापा है। 9 फरवरी को पेज 14-15 पर अभिषेक शुक्ला द्वारा लिखे इस लेख को आप मेल टुडे की साइट पर भी देख सकते हैं। सूचनार्थ प्रेषित
पिछले कई दिनों से दलित पत्रकार की तलाश जारी है। पता नहीं मिला या नहीं? अगर मिल गया हो तो बहुत अच्छा वर्ना इसके न मिलने कर ठीकरा भी गैर दलितों के सिर पर फोड़ा जाएगा। दलितों के विकास में गैरदलितों की भूमिका को ऐसे पेश किया जाता है जैसे पिछले साठ सालों
पुरस्कारों की घोषणा हो गई। अब हल्ला करने की बारी है, उनकी जो छपासी हैं। किचकिच-मिचमिच चलती रहेगी। यह होना ही है और आगे भी होता रहेगा। यह तो प्रकृति का नियम है और इस सबका अलग मजा है। खैर... अनूप जी, ममता जी और अजित जी को मिले इस सम्मान के लिए सारे
बहुत दिनों बाद आया हूँ। लिखने को कुछ खास है नहीं पर फिर क्या, बहुत सारे मित्र ऐसे जिनके पास लिखने को कुछ नहीं होता पर फिर भी लिखते हैं । दरअसल ब्लॉग ने उन सब लोगों के लिए वरदान है जो 'छपास' रोग से पीडि़त हैं। कुछ भी लिखो, कैसा भी लिखो। बटन दबाओ और
राम लीला के दिन हैं। हमारे मोहल्ले में भी रामलीला होनी तय हुई। आसार कुछ ऐसे बने कि लगा शायद राम के जन्म लेने से पहले ही रामलीला कमेटी और मोहल्ला समिति में महाभारत हो जाएगी। मुद्दा था मोहल्ले के बीचोंबीच ताजा-ताजा बने पार्क में रामलीला करवाने को ल
क्या पुल तोड़ा जाए ? क्या पुल है ? है तो किसने बनाया ? अगर बनाया तो क्या बनाने वाला कभी था ? सरकार तय नहीं कर पा रही है कि राम को आधिकारिक रूप से स्वीकारें या नहीं।हलफ़नामे पर हलफनामे दाखिल किए जा रहे हैं। पहली बार राम को लेकर तूतू-मैंमैं होते दे
आज फिर शनिवार है और सुना है कि आज शनि अमावस्या भी है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार आज के दिन शनिदेव अपने चलने की दिशा बदलते हैं। जिससे उनका जो प्रभाव बाकी राशियों पर पड़ता है उसमें भी फ़र्क आ जाता है। इस पूरी जानकारी के बाद ये आसानी से समझा जा सकता
इंशा साहब की एक नज़्म (१) यह बच्चा किसका बच्चा है ? यह बच्चा काला काला सा यह काल सा मटियाला सा यह बच्चा भूखा भूखा सा यह बच्चा सूखा सूखा सा यह बच्चा किसका बच्चा है ? जो रेत पे तन्हा बैठा है ना इसके पेट मे रोटी है ना इसके तन पर कपड़ा है ना इसके सर पर
दुनिया में शांति बनाए रखने और आतंकवाद का खात्मा करने के लिए आज सुबह एक तानाशाह ने दूसरे तानाशाह को फाँसी पर लटका दिया। खुद के रोपे हुए बीज को पहले पेड़ बनने में पूरी मदद की, इरान को खत्म करने के लिए इराक में सद्दाम को बढ़ावा दिया, जब-जब जरुरत पड़ी
क्योंकि ...... क्योंकि सपना है अभी भी - इसलिए तलवार टूटे, अश्व घायल कोहरे डूबी दिशायें, कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धुंध-धूमिल, किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी ...... क्योंकि है सपना अभी भी! तोड़ कर अपने चतुर्दिक का छलावा जबकि घर छोड़ा,
निठल्ला बैठा था, गलत मत समझिये मैं सशरीर ऑफिस में था। अब ऑफिस में ही तो व्यक्ति चिंतन करता है, निठल्ल चिंतन। तो सोच रहा था कि क्या करूं, आठ घंटे कैसे कटें, ध्यान आया कि इस कम्प्यूटर नाम के जीव ने कहते हैं कि सारी दुनिया को एक डिब्बे में समेट
माथे पर चिंता की लकीरें आ गई जब पता चला की फीस केवल डिमाण्ड ड्राफ्ट से ही भरी जाएगी। डिमाण्ड ड्राफ्ट सुनते ही बैंक याद आया बैंक को याद किया तो सरकार याद आई, अब सरकार याद आई तो सरकार का काम भी याद आना ही था, और बस वो याद आते ही सब भूल गयाा तत्काल ऑ
आखिरकार कम्प्यूटर फॉर्मेट करना पडा, तो जाकर हिन्दी टाइप चालू हो पाया ा अभी भी कुछ समस्याऐं हैं कौनसा कीबोर्ड लेआउट सबसे उपयुक्त है, रेमिंगटन में पूर्णविराम कहॉं है बहुत सारी ऐसी छोटी छोटी दिक्क्तें हैं जो धीरे धीरे दूर हो जाएंगी पर सबसे अच्छी
आखिरकार मैं हिन्दी मे ब्लॉग लिखने में सफल हो ही गया, सफलता अभी आंशिक है, यह ब्लॉग में ऑफिस के कम्प्यूटर से लिख रहा हूँा घर पर अभी तक इंडीक आईएमई ठीक ढंग से इंस्टॉल नहीं हुआ है , उसमें अभी भी हिन्दी टाइपराइटर लेआउट नहीं चालू हो पाए हैं, टाइप क
आज मेरे न चाहते हुए भी चुनाव आयोग ने ही मेरे को पप्पू बना दिया। तीन पोलिंग स्टेशनों के धक्के खाने के बाद और करीब 22 लिस्टें खुद देखने के बाद मैंने मान लिया कि मैं पप्पू हूँ। सवेरे तैयार होकर पोलिंग स्टेशन पहुँचे तो एक पार्टी के कार्यकर्ता ने बत
कक्षा आठ या नौं में इतिहास की किताब में कांग्रेस के गठन के बारे में बताया था कि श्री एलन ऑक्तावियन ह्यूम ने 1885 में कांग्रेस का गठन किया। नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस को 125 साल की बुढि़या क्या बोला, कांग्रेसी हत्थे से उखड़ गए। अब जिसकी पैदाइ
आप सबको शुभ हो। पिछले वर्ष अप्रैल-मई में वेबदुनिया पर घूमते हुए मेरे को वर्ष भर के व्रत-त्यौहारों की एक सूची मिली थी। मैंने चिरकालीन भारतीय साधन ' जुगाड़ ' का उपयोग करते हुए उसे अपने और अपने परिजनों-मित्रों के बीच कैलेण्डर रूप में साझा कर लिया था।