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चोखेर बाली

http://blog.chokherbali.in/
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11 Jun 2010
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तलाक की राह आसान

सुना है तलाक अब आसान हो जायेंगे. तलाक आज के दौर की जरूरत बन चुके हैं, सो अदालत को लगता है कि उसकी राह की अड़चनों को भी कम किया जाना चाहिए. अदालत को यह भी लगता है कि इससे जिंदगी कुछ आसान हो जायेगी. ऐसा हो भी सकता है. आखिर हर पल बूंद-बूंद रिसते हुए रिश्तों
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विरोध के "हथियार' - ब्लॉग,फेसबुक ,इंटरनेट .......

मनीषाशिकागो की जैन मैकराइट ने ईरानी धर्म गुरु का विरोध शुरू करके फेसबुक पर अपनी तरह का आंदोलन ही चला दिया है। इस धर्माधिकारी ने कहा था कि औरतों के उघड़े बदन को देखकर ईश्वर नाराज हो जाता है और इससे जलजले आते हैं। इसका विरोध छुटपुट रूप में कई जगह दिखा।
 
सुजाता
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एक काल्पनिक पत्र निरुपमा का, मां के नाम

युवा पत्रकार अनुपमा की पत्र शैली में यह प्रतिक्रिया निरुपमा हत्याकांड से जुड़े पहलुओं को समझने की कोशिश करती है। मोहल्ला लाइव पर प्रकाशित यह मां के नाम बेटी निरुपमा का काल्पनिक पत्र मन को छूने के साथ ही, वो सारे सवाल भी उठाता है, जो निरुपमा की स्थिति में
 
आर. अनुराधा
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एक जादुई गोली के पचास साल

राजकिशोरउस गर्भनिरोधक गोली को, जिसे अंग्रेजी की दुनिया में पिल कहते हैं, आधिकारिक मान्यता मिले हुए पचास साल हो गए। यह अवसर खुशी मनाने का है। स्त्री स्वतंत्रता के पक्षधरों को कुछ खास खुशी होनी चाहिए, क्योंकि पिल ने स्त्री समुदाय को एक बहुत बड़ी प्राकृतिक
 
सुजाता
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मदर्स डे के बहाने

ये जानते हुये भी कि जीवन रचने की अनूठी शक्ती सिर्फ औरत के हिस्से आयी है, और पालन पोषण की जिम्मेदारी भी. फिर भी औरत की कोख पर उसका अधिकार नहीं है, स्त्री का माँ रूप सिर्फ एक ख़ास सन्दर्भ में ही स्वीकार्य है, बाकी वों लगातार स्त्री के लिए अपमान और बंधन और
 
स्वप्नदर्शी
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सवाल तो हैं ही, निरुपमा के लिए भी और प्रियभांशु के लिए भी

- प्रणव प्रियदर्शी(निरुपमा मसले पर मेरी पिछली पोस्ट निरुपमा के बहाने अब एक बार अपने भीतर झांकें, प्लीज़! पर प्रणव प्रियदर्शी ने यह लंबी टिप्पणी मेल के जरिए मुझे भेजी। इसे एक नई पोस्ट की तरह लगाना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा, यह मान कर इसे यहां दे रही हूं।
 
आर. अनुराधा
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निरुपमा के बहाने अब एक बार अपने भीतर झांकें, प्लीज़!

स्त्री का कोई धर्म नहीं होता और धर्म ने उसके लिए सिर्फ बेड़ियां बनाईं हैं, और धर्म के ठेकेदार और पितृसत्ता के चौकीदार हाथ मे हाथ मिलाए सत्ता की सीढियाँ चढते हैं और मिल बाँट कर 'धर्म विमुख औरतों' को सबक सिखाते हैं, और....सब मंजूर, सब सही। पर हम कब तक
 
आर. अनुराधा
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जब स्त्री धर्म के प्रतिकूल आचरण करती है तो धर्म उसका विनाश कर देता है

सच यह है कि "स्त्री का कोई धर्म नही होता ,हर धर्म ने उसके लिए सिर्फ और सिर्फ बेड़ियाँ ही बनाई हैं " इस पोस्ट को लिखे बहुत दिन नही हुए ! मनोज-बबली काण्ड को बीते भी अधिक दिन नही हुए । LSD ने फिल्म जगत मे क्या मुकाम बनाया पता नही , लेकिन उसकी एक कहानी ऐसे
 
सुजाता
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बलात्कार के मामले में सबूत के तौर पर पीड़िता का बयान काफी है

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि बलात्कार के मामले में, खास तौर पर अगर पीड़ित निरक्षर है तो उसके बयान को पूरी तरह माना जाए। आरोपी को दोशी करार देने के लिए पीड़ित के बयानों की सत्यता की जांच करने की जरूरत नहीं है। साथ ही कहा गया कि अगर मामला देर से दाखिल
 
आर. अनुराधा
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चुड़ैल

- अनामिका "क्योंकर हुआ करते हैं उलटे पाव चुड़ैलों के ?क्योंकर चुड़ैल बन जाती हैंजच्चा-चर में टन्न बोल गयी औरतें? "डरते डरते मैने नानी से पूछा था!नानी थी फूलों की टोकरी!जब भी हम घबराते उसमे ही ढूह लगाते।ज़्यादातर प्रश्नों के उत्तर थे उसी टोकरी मेंलेकिन
 
सुजाता
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रंगमंच पर स्त्री छवि

महिला रंगकर्मियों की रंगमंच पर एक सार्थक उपस्थिति रही है। खास कर स्वातंत्र्योत्तर आधुनिक रंगमंच पर, वरन अपने आरंभिक युग में पुरुष ही महिलाओं की भूमिका निभाते रहे। फ़िर समाज में हाशिये पे रहने वाली जाति बेडिन की महिलओं ने और बदनाम ईलाके की महिलाओं ने में
 
सुजाता
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ये रचती इतिहास सखी !

                                  
 
रेखा श्रीवास्तव
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वर्ना रोज़ कोई न कोई श्रीधरम अफसोस करेगा......

"माँ कहती है कि भगवान की लीला देखो । अपने गाँव के दुखी मियाँ की चौदह साल की बेटी सबीना की दो-ढाई वर्ष पहले शादी हुई थी ।वह गर्भवती हुई और प्रसव के दौरान ही चल बसी ।दो महीने के भीतर ही दुखी मियाँ ने अपने दामाद का गम दूर करने के लिए अपनी दूसरी बेटी रुबिना
 
सुजाता
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स्त्री का कोई धर्म नही होता !

प्रिय फिरदौस , आपके साहसी लेखन की मै मुरीद हो चली हूँ । पिछले दिनों ब्लॉग पर हो रहे धर्म-शादी -लव जिहाद के बवाल पर नज़र पड़ी । सच यह है कि "स्त्री का कोई धर्म नही होता ,हर धर्म ने उसके लिए सिर्फ और सिर्फ बेड़ियाँ ही बनाई हैं " । धर्म , ताकत और सत्ता यह
 
सुजाता
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सानिया और शोएब की शादी में कमजोर कड़ी कौन?

सानिया मिर्जा के शोएब से शादी के मामले में ताजा खुलासा यह है कि शोएब ने मान लिया है कि उसकी शादी पहले आएशा से हुई थी, जो हैदराबाद की निवासी है। दूसरे दिन ऐसी भी चर्चा थी कि आएशा को चुप कराने के लिए शोएब ने 15 करोड़ का की डील की। खैर!आएशा को, खुद को शोएब
 
आर. अनुराधा
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निगाहें मिलाने को जी नहीं चाहता

पिछले दिनों उत्तराखंड के एक सुदूर गांव में बने पर्यटन स्थल पर एक जर्मन छात्रा से मुलाकात हुई। वह हिंदुस्तान के बारे में पढ़ाई कर रही है और इंटर्नशिप के लिए हर साल तीन-चार महीने के लिए यहां आती है। यहां आना उसके पाठ्यक्रम का जरूरी हिस्सा है।उससे बातचीत के
 
आर. अनुराधा
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मानववाद का ही एक अंग है नारीवाद

राजकिशोरमानववाद का ठीक-ठीक अर्थ क्या है, मैं नहीं जानता। इसे लेकर मानववाद की धाराओं के बीच भी मतभेद है। इसलिए मानववाद को इस रूप में परिभाषित करना उपयोगी और निरापद, दोनों जान पड़ता है कि मनुष्यता ने जो कुछ भी श्रेष्ठ अर्जित किया है, वही मानववाद है। इससे
 
आर. अनुराधा
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क्या, कहीं कोई जवाब है?

मैं राइट टू एजूकेशन वाली खबर पढ़कर खुश थी पिछले दिनों, इसी बीच मेरी एक मेरी एक दोस्त का फोन आया। मेरी दोस्त गायनोकोलॉजिस्ट है. उसके फोन ने बेचैन कर दिया. उसके पति के एक दोस्त (जो कि यूपी के एक महत्वपूर्ण जिले में डीएम हैं) उसके नर्सिंग होम में अपनी पत्नी
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पानी के झगडे में गई इस गर्मी की पहली जान

कल ही एक अख़बार की खबर , इंदौर में पानी के झगडे में एक युवती को अपनी जान गंवानी पड़ी , ने सोचने पर विवश कर दिया कि कब तक हम पानी को लेकर जागरूक नहीं होंगे और जहाँ पानी अधिक है वंहा जल की बर्बादी को रोकने के लिए जनजागरण अभियान की आवश्यकता है .......अन्यथा
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बुरके के पीछे से विद्रोह की आवाज

राजकिशोर नकाब, हिजाब या बुरके के पीछे सिर्फ मुस्सिम कट्टरपंथ की शिकार ही नहीं छिपी होती, बल्कि रेडिकल विचार भी पनप रहे होते हैं, यह सऊदी अरब की कवयित्री हिसा हिलाल ने साबित कर दिया है। सऊदी अरब वह मुल्क है, जिसने इस्लाम की सबसे प्रतिक्रियावादी व्याख्या
 
सुजाता
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जो न देवियाँ हैं , न तितलियाँ

नाक-मुँह सिकोड़े टी.वी. पर ‘राखी का स्वयंवर’ देखते हुए बहुतों का जी यह सोचकर हलकान हुआ जाता था कि एक उद्दण्ड लड़की अपने सेलिब्रिटी होने के घमंड मे गंगा किनारे के छोरे को स्वयम्वर से बाहर का रास्ता दिखाती है और “बहू नही नौकरानी चाहिए” जैसी हमारे समाज की
 
सुजाता
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सहजीवन के दो उदाहरण - प्रेमचंद से

राजकिशोर प्रेमचंद को जितनी बार पढ़ा जाए, उतनी बार लगता है कि वे अपने समय से आगे थे। उन्होंने सिर्फ बात बनाने के लिए नहीं कहा था कि साहित्य राजनीति की मशाल है। वे इसमें यकीन भी रखते थे। यह दुख की बात है कि प्रेमचंद के प्रशंसक कुछ खास बातों के लिए ही
 
सुजाता
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महिला दिवस की बिलेटेड शुभकामनाएं?

नोन, तेल, लकड़ी...जब से होश संभाला, तब से इन्हीं में मन रमाया। आस पास वालों की नजर में शादी लायक देह हुई तो शादी के लिए लड़का खोजना शुरू किया। लंबी ऊंची गोरी गठीली देह। खेत में हाथ चलाती तो घास सरपट कट जाती। खड़ी फसल भी फर्र फर्र कटवा डालती। लड़की किस्मत
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महिलाओं ने जीती एक और जंग

आरक्षण पर शुरुआती किला फतह करने के बाद शुक्रवार को महिलाओं ने एक और जंग जीत ली। सेना में स्थायी कमीशन देने को लेकर जारी भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में महिलाओं ने विजय श्री हासिल कर ली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सैन्य सेवा में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का सरकार
 
Akanksha~आकांक्षा
Mar 13 2010 05:00 PM
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धर्म का लबादा ओढ़े ये मानवता के भक्षक

कानपुर भले ही छूट गया हो, पर अभी भी वहाँ की ख़बरें देख-पढ़ लेती हूँ. चार साल से ज्यादा का रिश्ता इतनी जल्दी छोड़ भी तो नहीं पाती. कानपुर भले ही कभी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी रहा हो, पर आज का कानपुर अपराध के लिए कुख्यात है, वो भी मूलत: महिलाओं के
 
Akanksha~आकांक्षा
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आरक्षण में आरक्षण बेमानी क्यों है

राजकिशोर पिछ़ड़े वर्ग के तीनों नेता - मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और शरद यादव -- देश भर की निगाह में खलनायक बन गए हैं। उनके गुस्से के कारण महिला आरक्षण विधेयक 8 मार्च के ऐसिहासिक दिन लागू नहीं हो सका। हालांकि मैं विधायिका में किसी भी प्रकार के
 
सुजाता
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नारी होने पर गर्व !!

महिला-दिवस सुनकर बड़ा अजीब लगता है. क्या हर दिन सिर्फ पुरुषों का है, महिलाओं का नहीं ? पर हर दिन कुछ कहता है, सो इस महिला दिवस के मानाने की भी अपनी कहानी है. कभी महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई से आरंभ हुआ यह दिवस बहुत दूर तक चला आया है, पर इक सवाल सदैव
 
Akanksha~आकांक्षा
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स्त्रियां,जो मर्दवादी विमर्श से बाहर है

वर्चुअल स्पेस में मर्द लेखकों की एक ऐसी जमात है जो कि देश और दुनिया के तमाम मसलों पर लिखने का अधिकार रखते हैं। जाहिर है इन तमाम मसलों में स्त्रियां भी शामिल हैं। बल्कि स्त्रियों पर लिखते हुए अधिकार इतना अधिक है कि उनका लेखन विमर्श से कहीं ज्यादा
 
विनीत कुमार
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कुछ निवेदन

राजकिशोर आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। भारत के लिए यह दिन विशेष महत्व का होनेवाला है। मीडिया को उम्मीद है कि सोमवार को महिला आरक्षण विधेयक पास हो कर रहेगा। सरकार अगर सचमुच चाहती है, तो यह असंभव नहीं है। संख्या का गणित उसके पक्ष में है। लेकिन आरक्षण के
 
सुजाता
Mar 08 2010 07:42 AM
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ये हाईप्रोफाइल युवतियां ??

कई बार कुछ ख़बरें मन को झकझोरती हैं, ग्लानि पैदा करती हैं. ऐसी ही इक खबर पर नज़र गई कि सैक्स रैकेट के आरोप में ढोंगी बाबा राजीव रंजन द्विवेदी के साथ पकड़ी गई छह हाईप्रोफाइल युवतियों को लेकर दुनिया चाहे कुछ भी सोच रही हो, लेकिन उनको इसका मलाल नहीं है। किसी
 
Akanksha~आकांक्षा
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अमेरिकी महिला सैनिक पुरुष साथियों की हवस तले

कई बार विकसित देश यह दर्शाते हैं कि उनके यहाँ महिलाओं की स्थिति बेहतर है, पर तथ्य तो कुछ और ही कहते हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान और इराक में तैनात अमेरिकी महिला सैनिक अपने पुरुष साथियों की हवस का
 
Akanksha~आकांक्षा
टैग: sexual harassment
Mar 05 2010 07:35 AM
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जगमगाती रहे ये 'किरण'

आज अपने एक परिचित से मिलने जाना हुआ, वहाँ दैनिक जागरण कानपुर का 03 मार्च का अंक देखा। एक समाचार देखकर उसे पढ़े बिना नहीं रहा गया। एक महिला की कर्मठता की कहानी है, स्वयं को बहुत अच्छा सा लगा। आपके सामने बिना किसी भूमिका के उस महिला किरन की कहानी रख रहे
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
Mar 04 2010 10:18 PM
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लिपस्टिक की औकात

राजकिशोर बीसवीं शताब्दी की एक बड़ी खूबी यह थी कि उसने सबको उसकी औकात बता दी। और तो और, महाबली पूंजीवाद को भी नहीं छोड़ा। देखते-देखते दुनिया का एक हिस्सा लाल हो उठा। इस हिस्से में पूंजी थी, पर पूंजीपति नहीं था। तानाशाही को भी उसकी औकात बताई गई। हिटलर की
 
सुजाता
Mar 01 2010 04:54 PM
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होली पर्व की रंग भरी शुभकामनायें

*** होली पर्व की रंग भरी शुभकामनायें ***आकांक्षा यादव
 
Akanksha~आकांक्षा
Feb 28 2010 12:08 PM
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दर्द का महिमामण्डन खतरनाक है !

एक वक़्त था जब अमिताभ बच्चन की फिल्म 'मर्द' का यह डायलॉग बहुत मशहूर हुआ था- जो मर्द होता है, उसे दर्द नही होता ।मैने यह फिल्म नही देखी पर अन्दाज़ा लगा सकती हूँ कि मर्द होने के क्या प्रतिमान इस फिल्म ने कायम किए होंगे।दर्द स्त्रैण है या पुरुष यह
 
सुजाता
Feb 25 2010 02:51 PM
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तू निर्बंध सारी धरती पर घूम सके

मनीषा की डायरी से यह एक पन्ना आज चुरा लाई हूँ ...एक भावुक ,रूमानी अन्दाज़ मे लिखी गई यह पोस्ट जाने क्यों आकर्षित कर गई।.जब "पा"देखी थी तो मन मे यही कामना की थी कि दुनिया की सब माएँ ऐसी ही हो जाएँ।और सब पिता .....उसने अपनी बेटी के लिए एक कविता लिखी थी।
 
सुजाता
Feb 20 2010 05:22 PM
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नादीन को चार शौहर चाहिए

(दुबई, साउदी अरब के अल हुर्राटीवी नेटवर्क में पत्रकार नादीन अल-बेदैर ने मुसलमान पुरुषों में बहुविवाह को चुनौती दी,जिसके लिए उन पर इस्लाम विरोधी होने का आरोप लगा।)- राजकिशोर घटना यह है। सऊदी अरब की पत्रकार नादीन अल-बेदैर का एक लेख मिस्र के दैनिक 'अल मसरी
 
आर. अनुराधा
Feb 16 2010 11:22 PM
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प्रेम : एक अनसुलझा रहस्य

प्यार क्या है। यह एक बड़ा अजीब सा प्रश्न है। पिछले दिनों इमरोज जी का एक इण्टरव्यू पढ़ रही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब वे अमृता प्रीतम के लिए कुछ करते थे तो किसी चीज की आशा नहीं रखते थे। जाहिर है प्यार का यही रूप भी है, जिसमें व्यक्ति चीजें आत्मिक खुशी
 
Akanksha~आकांक्षा
Feb 14 2010 06:26 AM
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गुरु का स्वाभाविक स्वरूप्

अभय तिवारी निर्मल आनन्द शिक्षक सब जगह होते हैं पर भारत के शिक्षक मात्र शिक्षक नहीं गुरु होते हैं। गुरु एक ऐसा भारी शब्द है कि अंग्रेज़ इसका अर्थ अपनी भाषा के किसी शब्द के आवरण में उठा के नहीं ले जा सके - गुरु का एक अन्य अर्थ भारी होता ही है – समूचे शब्द
 
सुजाता