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अग्निवीणा

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16 May 2010
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न्याय और कुछ नहीं !

ये विरोध है, उस अन्याय के ख़िलाफ जो अब बर्दाश्त नहीं।विरोध उन सामंतों के खिलाफ जो अभी भी हमारी सोच में सांसे ले रहा है।हमारे ज़ुबान बंद हैं, पर सीनों में चित्कार है। न्याय मिले जल्दी, क्योंकि देर पहले ही बहुत हो गई है।ठेकेदार ठेका ले और दे चुके अपना
May 16 2010 10:10 AM
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अनोखे भगत !

आज जब भगत सिंह की शहादत पर अपने चैनल के लिए एक स्टोरी लिखते वक्त किसी ने मुझसे पूछा, कि भगत सिंह के साथ तो दो और क्रांतिकारी सुखदेव और राजगुरु भी फांसी चढ़े थे। तो फिर भगत सिंह को ही ज्यादा तवज्जो क्यों। भगत सिंह को ज्यादा तवज्जो क्यों ? सवाल न तो नया है
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घाटे में कल्याण कैसे?

बजट आ गया है, कहीं हाय तौबा मची है तो कहीं सेंसेक्स छलांगे मार रहा है। घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि हाथ जो आम आदमी के साथ है। लेकिन, मेरी छोटी सी बुद्धि में ये नही समा पा रहा कि आख़िर घाटा (राजकोषिय) तो सरकार को कम करना ही है, कब तक घाटा की व्यवस्था
Mar 03 2010 10:55 AM
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बुरा न मानो होली है...

अभी अभी ख़बर मिली है कि अगला नोबेल शांति पुरस्कार अमिताभ बच्चन को देने का फैसला किया गया है, इसके तुरंत बाद मिस्टर बच्चन ने घोषणा की है कि वो पाकिस्तान की एक फिल्म में लीड रोल करेगें। इस फिल्म का मुहूर्त शाट में ओबामा, मनमोहन सिंह, जरदारी होंगे। शांति और
टैग: होली
Feb 28 2010 09:53 AM
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हमारे नेता जी !

अरे नेता जी तो नेता हैं, वो नव रसों के जानते वाले हैं। नेताजी डराते भी हैं और मस्ती में झुमने पर मजबूर भी कर देते हैं। इ‍टावा से विधायक एक इंजीनियर को रौद्र रुप दिखाते हैं धमकाते हैं कि दूसरा औरेया कांड कर देगें। वही औरेया कांड जिसमें एक विधायक ने इस
टैग: नेता
Feb 22 2010 09:34 AM
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नया साल नई शुरुआत !

कल से तारिखों के कुछ हिस्से हमेशा के लिए बदल जाएगें। 1 जनवरी से नई शुरुआत करेगें। क्या हम तुम फिर नए सिरे से बात करेगें। इस बार ई मेल नहीं दिल से मिलेगें। इस बार मोबाइल से नहीं, गले मिलेगें। नौ-कड़ी (यानी नौकरी) की आपाधापी छोड़, जम कर पार्टी करेगें।
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"नाखून क्यों बढ़ते हैं"

कल दिल्ली में भारी बारिश हुई, इतनी कि.... कितने विशाल पेड़ और खम्भे भूमिशायी हो गए। सड़क पर जाम में फंसे फंसे बड़ी कोफ्त हो रही थी, समझ नहीं आ रहा था कि थोड़ी बूंदाबांदी हो या मूसलाधार बारिश सड़कें फट से जाम हो जाती हैं। चौराहों, गलियों, तिराहा सब जग
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अब किसकी बारी !

शंकर सिंह वाधेला, गोविंदाचार्य, उमा भारती, मदनलाल खुराना, कल्याण सिंह, बाबुलाल मरांडी.....जसवंत सिंह। इन सब नामों में क्या काॅमन है। यहीं कि इन्हें या तो पार्टी विद डिफरेंस ने या तो पार्टी के निकाल बाहर किया या फिर ये ख़ुद भाजपा को छोड़ चले। इस सूची
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विश्व बैंक की पसंद बिदेसिया !

मिलनियर लगता है सचमुच फिरंगियों को पसंद आ गई है। अब तो विश्व बैंक भी इसे पसंद करने लगा है। ख़ैर, ये बात विस्तार से थोड़ी देर में। आपको शायद भोजपूरी साहित्यकार भिखारी ठाकुर के बिदेसिया की याद हो। कितने दर्द दिए बिदेसिया ने। कितने घर उजाड़े। बिहारियों
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निशान-ए-जुत्ता

निशाना लगे न लगे लेकिन ज़ख्म तो हो ही जाता है, चोट तो लग ही जाती है। क्या करें जूता तो चीज ही ऐसी है। मुंतज़ीर अल ज़ैदी का जूता भी कुछ अलग नहीं था। अफवाह तो ये भी है कि श्रीमान ज़ैदी पिछले कई दिनों से जूता निशाने पर मारने की प्रैक्टिस कर रहे थे। लेकि
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ख़ुशी है या ग़म

अभी गुरुवार की ही बात है। लोकसभा में आर्थिक हालत पर हो रही चर्चा का जवाब देते हुए पी.चिदंबरम ने साफ किया कि मौजूदा विकास दर 7 फीसदी रहेगी। जो अभी हाल तक साढ़े सात फीसदी तक बताई जा रही थी। ऐसे में अचानक ही उम्मीद की कई किरणें दिखने लगी हैं। पिछले 6 सफ
Dec 29 2009 11:51 AM
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कब तक सियासी आतंकवाद ?

देश ने कई आतंकी घटनाओं को अब तक अपना सबकुछ लुटाकर अपनी छाती पर झेला है। लेकिन मुबंई में कुछ और ही देखने को मिला। देश का सबसे बड़ा शहर बंधक बना। ये हमला पहले हुए आतंकी घटनाओं से मीलों आगे का था। ज्यादा घातक और ज्यादा डराता हुआ। कहने की ज़रुरत नहीं कि
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अग्निवीणा

पिछले दिनों वित्त मंत्री ने उद्योगपतियों को कहा कि कुछ समय के लिए अपनी कीमतें कम करें। कारण था कि मांग बढ़ सके। चिदंबरम ने ख़ासकर होटल, एयरलाइन और रियल एस्टेट के कारोबारियों और कार और दुपहिया निर्मातोओं से ये बातें कहीं। क्योंकि उद्योगपतियों और मीडीय
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इसलिए मनाएं दिवाली...

क्या आपको लगता है कि चारो तरफ मंदी की बेचैनी , इस्लामी और हिंदु आतंकवाद, संसद का ना चलना, शेयरों का गोता लगाना.... ब्ला ब्ला.... चीज़ें आपको परेशान कर रही है। हर जगह दिवाली में दिवाला का भोंपू बज रहा है। कोई कैसे मनाए दिवाली ? मैं बताता हुं क्यूं और
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सॉरी अंकल सैम !

अमेरिकी कांग्रेस ने भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते को पास कर दिया। मनमोहन जी को बधाई हो बधाई। लेकिन, ख़ुशियां मनाने के पहले कुछ सवालों पर एक नज़र दौड़ा लें। ऐसा क्या हुआ कि इस समझौते पर बहस के दौरान अमेरिकी संसद के सदस्य एडवर्ड मार्केय और उनकी टीम
Dec 29 2009 11:51 AM
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11.05फीसदी का सच-झूठ

ये कोई भी समझ सकता है कि थोक भाव हमेशा ख़ुदरा से कम ही होता है। 11.05 फीसदी पर पहुंची महंगाई का आंकड़ा हमें और सरकार दोनों को डरा रहा है। लेकिन 11.05 फीसदी का सच क्या है ? एक आर्थिक अख़बार ने एक विशलेषण छापा कि महंगाई 11 फीसदी नहीं 25 फीसदी है। क्यों
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ग़ुलामी, गिरवी और फिसलन !

बस एक सवाल? क्या हमारी पूरी सरकार और अर्थव्यवस्था तेल की कीमतों के हाथों गिरवी हो चुकी है ? वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि हमारी अर्थव्यवस्था एक कठिन दौर से गुज़र रही है। मुद्रास्फीति का आंकड़ा 11 फीसदी के पार जा पहुंची। इस तेज़ी के पीछे 94 फीसदी भा
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तब तो ओबामा हार जाएगें।

जैसे ही हिलेरी क्लिंटन की दावेदारी ख़त्म हुई वैसे ही कहा ये जाने लगा कि हिलेरी ओबामा का समर्थन करेगी। इसके बाद से ही हिलेरी के समर्थक असमंजस में हैं। अमेरिका में कई सर्वेक्षण इस तरफ इशारा कर रहे हैं कि हिलेरी को समर्थन देने वाले कई वर्ग ओबामा का समर्
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जब तलक रिश्वत न ले हम दाल गल सकती नहीं, नाव तनख़्वाह की पानी में तो चल सकती नहीं।

आज से लगभग 60 साल पहले जोश मलीहाबादी का लिखा ये शेर उनके पहले भी लागू होता था और आज भी हर्फ-ब-हर्फ लागू होता है। ये सच्ची कहानी है कि एक बाप उस दिन बहुत खु़श हुआ। जब उसके दो बेटों में से छोटा बेटा सिविल इंजीनियर बना और टेबल के नीचे के कारोबार से कुछ
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तेल की फिसलन !

सब सांस रोके इंतज़ार कर रहे हैं कि पेट्रोल-डीज़ल के दाम आज बढ़े कि कल । बढ़ेगें तो ज़रुर। एक कमाल की बात है। एक तरफ सरकार और सरकारी तेल कंपनियां इस बात पर माथा खपा रही हैं कि बढ़ते पेट्रोलियम सब्सिडी से कैसे छुटकारा मिले। क्योंकि, चालू वित्तिय साल मे
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अब क्या करेगी सरकार ?

मुहावरा मुंह चिढ़ाने का सही उदाहरण शायद इससे बेहतर कोई नहीं हो सकता। महंगाई का आंकड़ा जैसे-जैसे ऊपर जा रहा है वैसे-वैसे हमारे महान अर्थशास्त्री चिदंबरम साहब और प्रधानमंत्री महोदय की फ़जीहत भी नए रिकॉर्ड बना रही है। आज मुद्रास्फीति 7.83 फीसदी तक जा पह
Dec 29 2009 11:51 AM
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मासूम बुश और मुटाते हम

हम फिल्मों में काफी पहले से देखते आ रहे हैं कि जुड़वा भाईयों के बीच इतना प्यार होता है कि एक को मारे तो दूसरे को लगे। ऐसा ही कुछ रिश्ता हमारा अमेरिका के साथ हो गया है। खाएं हम पेट दरद हो उनका। अरे, अब ये दरद नहीं है तो और क्या है। बुश साहब कहते हैं क
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अशोक उपाध्याय को मरना नहीं चाहिए था...

नाइट शिफ्ट में अशोक सर की मौत हो गई। ईटीवी में मेरे रहते शायद ही कभी उन्हें नाइट शिफ्ट में देखा हो। वो भी ईटीवी राजस्थान से जुड़े थे और मैं भी, लेकिन उनसे काफी जूनियर। उस शानदार व्यक्तित्व को आख़िर कौन भूल सकता है। वीओआई में वो नाइट शिफ्ट के इंचार्ज
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जिन्ना ने कहा था...

[1940]मुस्लिम लीग के एक सम्मेलन में जिन्ना ने कहा......ज्यादातर ये पाया गया है कि उनके (हिंदुओं के) जो नायक हैं वे मुसलमानों के दुश्मन हैं...ऐसी दो कौमों को, जिनमें से एक अल्पसंख्यक है और दूसरा बहुसंख्यक, एक देश में बांध देने से असंतोष बढ़ेगा और उस देश
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बलुचिस्तान का सच!

--भाग एक-- दो साल पहले की बात है जब भारत के नौसेना प्रमुख ने बलुचिस्तान के ग्वादर में बन रहे बंदरगाह को लेकर एक बयान दिया। ये बयान था कि जिस तरह चीन इस बंदरगाह के निर्माण में मदद दे रहा है वो भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है। इसका सीधा अर्थ
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ज्यादा खुश मत हों...

दलित महिला लोकसभा अध्यक्ष, महिला राष्ट्रपति और अल्पसंख्यक वर्ग से प्रधानमंत्री। क्या ये उपलब्धियां हमारे मज़बूत लोकतांत्रिक ढ़ांचे का परिणाम है? कई बार कोई भी इन तथ्यों के सामने खुश हो जाएगा, मैं भी खुश हूं। लेकिन, इन सबके पीछे छिपे बड़े सवाल परेशान
 
ओमप्रकाश
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मीडिया का फैशन !

पिछले दिनों एक हिंदी न्यूज़ चैनल पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का प्रवक्ता एंकर के सवालों को झेल रहा था। मुद्दा था अभिनेत्री रेखा को मिलने वाले एक पुरस्कार को लेकर मनसे का विरोध। मनसे का युवा प्रवक्ता किसी तरह अपने को सही साबित करने की कोशिश कर
 
ओमप्रकाश
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कांग्रेस को वोट क्यों !

चुनावों के सिलसिले में पिछले दिनों महाराष्‍ट्र के दौरे पर था। चुनाव परिणाम के दिन यानी 16 मई की शाम में शिवसेना के उद्धव ठाकरे से मुलाकात हुई। मतदाताओं ने मुंबई की सभी 6 सीटों से शिवसेना का सफाया कर दिया था। हर जगह कांग्रेस ही कांग्रेस छाई थी। उद्धव
 
ओमप्रकाश
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...अगला प्रधानमंत्री ?

क्या आपको लगता है कि आज देश के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा। अगर आपको ऐसा लगता है तो मीडिया को धन्यवाद दीजिए। जोड़-तोड़ जारी है, प्रधानमंत्री के इतने दावेदार कभी भी नहीं होगें जितने की इस बार हैं। चलिए, ये तो पुरानी बात है
 
ओमप्रकाश
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Slumdog पर जागरुकता चाहिए...

पंचशील की लालबत्ती पर जैसे ही मैंने अपनी बाइक को ब्रेक लगाई कई स्लमिए बड़ी गाड़ियों जैसे इनोवा, टोयोटा पर लूझ पड़े। साफ कर दूं कि गंदे संदे छोटे बच्चों को एक एक रुपए मांगते देख अब सीधे स्लमडॉग मिलिनेयर की ही याद आती है। इसलिए इनको स्लमिए कह दिया। इन
 
ओमप्रकाश