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जनचेतना

http://janchetnaa.blogspot.com/
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20 Mar 2010
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जनचेतना की नयी पुस्‍तक सूची

पाठकों ने अनुरोध किया है कि हम अपनी पुस्‍तक सूची, इस ब्‍लॉग पर भी उपलब्‍ध कराएं। इसलिए हम पुस्‍तक सूची इस ब्‍लॉग पर दे रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह सूची पीडीएफ प्रारूप में है। जल्‍द इसको यूनिकोड फांट में भी उपलब्‍ध कराया जाएगा। आप पुस्‍तकें मंगाने के लिए,
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विश्‍व पुस्‍तक मेला में 'जनचेतना' : टाइम्‍‍स ऑफ इंडिया और हिन्‍दुस्‍तान में कवरेज

टाइम्‍स ऑफ इंडिया के 2 फरवरी 2010 के अंक में प्रगति मैदान, नई दिल्‍ली में चल रहे 19वें विश्‍व पुस्‍तक मेला में 'जनचेतना' के स्‍टाल की अच्‍छी कवरेज की गई है। अखबर लिखता है कि मार्क्‍स, लेनिन और अन्‍य लेखकों की किताबें युवाओं को विश्‍व पुस्‍तक मेला में
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‘जनचेतना’ पुस्तक प्रदर्शनी वाहन पर ए.बी.वी.पी. के गुण्डों का हमला

वाहन पर मौजूद कार्यकर्ताओं से मारपीट, वाहन के शीशे तोडे़भगतसिंह, प्रेमचंद, राहुल आदि की किताबें फेंकी, आग लगाने की कोशिश 20 जनवरी, नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब 25 गुण्डों ने आज दोपहर दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय के भीतर
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मुक्तिकामी नौजवानों की शौर्यगाथा - तरुणाई का तराना

साहित्‍यकार, कलाकार, बुद्धिजीवी कई तरह के होते हैं, कुछ कला के लिए कला की, कविता के लिए कविता आदि की रचना करते हैं और कुछ मानवता को आगे ले जाने, उसे सही रास्‍ता दिखाने, और संवेदनाओं को जगाने-विसंगतियों पर प्रहार करने वाली रचनाओं का निर्माण करते हैं..
Dec 29 2009 11:57 AM
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'तीन टके का उपन्‍यास'

तीन टके का उपन्‍यास' में ब्रेष्‍ट पतनशील पूंजीवादी समाज में व्‍यापरिक पूंजीपति वर्ग की घोर अनैतिकता, लालच और उसके ''राष्‍ट्रवाद'' की असलियत को एकदम उजागर कर देते हैं। ब्रेष्‍ट बहुत ही दिलचस्‍प और यथार्थवादी तरीके से पूंजीवादी राष्‍ट्रवाद, पूंजीवादी न
Dec 29 2009 11:57 AM
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साहित्य का उद्देश्य

जब तक साहित्य का काम केवल मनबहलाव का सामान जुटाना, केवल लोरियां गा-गाकर सुलाना, केवल आंसू बहाकर जी हल्का करना था, तब तक इसके लिए कर्म की आवश्यकता न थी। वह एक दीवाना था, जिसका ग़म दूसरे खाते थे, मगर हम साहित्य को केवल मनोरंजन और विलासिता की वस्तु नहीं
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धारा के विरुद्ध तैरना ही होगा...

पूंजीवादी अखबारों, पत्रिकाओं, रेडियो-दूरदर्शन और दर्जनों केबल टीवी चैनलों आदि ने आज पूरे देश के आम लोगों के दिलो-दिमाग पर चौतरफा हमला बोल दिया है। अखबार, छापेखाने, प्रकाशन उद्योग, इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया - इन सब पर हमारे देश के बड़े और मझोले पूंजीपतियों
Dec 29 2009 11:57 AM
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कुछ यूं हुई थी जनचेतना की शुरुआत...

उन्नीस वर्ष पहले कुछ लोगों ने जनस्वप्नों को लंबी उम्र और कल्पनाओं को पंख प्रदान करने वाली किताबों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत महसूस की। झोलों में किताबें लेकर घरों-दफ्तरों-कालेजों में जाने से शुरुआत हुई और फिर कारवॉं आगे बढ़ता गया। जनता से सहयोग ले
Dec 29 2009 11:57 AM
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क्रान्तिकारी छात्र-युवा आन्दोलन

एक नयी शुरुआत से जुड़े कुछ बुनियादी सवाल और कुछ बुनियादी समस्याएँएक सच्ची क्रान्तिकारी छात्र राजनीति का मतलब केवल फीस-बढ़ोत्तरी के विरुद्ध लड़ना, कक्षाओं में सीटें घटाने के विरुद्ध लड़ना, मेस में ख़राब खाने को लेकर लड़ना, छात्रावासों की संख्या बढ़ाने
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बहरों को सुनाने के लिए

भगतसिंह और उनके साथियों की विचारधारा और कार्यक्रमएस. इरफान हबीब भगतसिंह और उनके साथियों के राजनीतिक जीवन और उनके दौर के बारे में और उनके संगठनों -हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एच.एस.आर.ए.) और नौजवान भारत सभा के बारे में यह एक पथ-प्रदर्शक कृति
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कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र

डेविड रियाज़ानोव(मार्क्‍स-एंगेल्स इंस्टीट्यूट, मास्को के निदेशक) की प्रस्तावना और व्याख्यात्मक टिप्पणियों सहित‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ वैज्ञानिक कम्युनिज़्म का पहला कार्यक्रम-मूलक दस्तावेज़ है जिसमें मार्क्‍सवाद के मूल सिद्धान्तों की विवेचना की
Aug 26 2009 07:09 PM
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चिरस्‍मरणीय - कय्यूर के शहीदों की वीरगाथा

निरंजनयह कय्यूर की कहानी है जो उत्तरी केरल में मालाबार इलाके में स्थित कसरगोद तालुक का एक गाँव है। यह उस गाँव के किसानों के न्यायोचित संघर्ष की कहानी है। यह कय्यूर के उन चार शहीदों की गाथा है जिन्होंने 1943 में अत्याचारी ज़मींदारों और ब्रिटिश गुलामी के
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चुनी हुई कहानियाँ, खण्ड 3 - मक्सिम गोर्की

मक्सिम गोर्की के विराट रचना-संसार के एक बहुत बड़े हिस्से से पूरी दुनिया के पाठक अभी भी अपरिचित हैं। उनके कई महान उपन्यास, उत्कृष्ट कहानियाँ और विचारोत्तेजक निबन्ध अंग्रेज़ी और अन्य यूरोपीय भाषाओं में भी उपलब्ध नहीं हैं। इस मायने में भारतीय भाषाओं और
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प्रेम, परम्परा और विद्रोह

कात्यायनीदो स्त्री-पुरुष नागरिकों के प्रेम करने की आज़ादी का प्रश्न एक बुनियादी अधिकार का प्रश्न है। व्यक्तिगत विद्रोह इस प्रश्न को महत्ता के साथ एजेण्डा पर लाते हैं लेकिन मध्ययुगीन सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों-संस्थाओं के विरुद्ध दीर्घकालिक, व्यापक,
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जनचेतना का सम्‍पूर्ण सूचीपत्र

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