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भोजपुर नगरिया

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17 Jun 2010
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आ गइल अवतारी पुरुस

छोट रहनी हँS तS कई बेर केहू-केहू कहि देत रहल हS की ए बाबू अवतारी हउअS का? एकदिन रहाइल ना अउरी हम पूरा गाँव-गिराँव, हित-नात सबके बोलवनि अउरी कहनी की रउआँ सभे जानल चाहत बानी न की हम अवतारी हईं की का हईं. तS रउआँ सभे धेयान लगा के सुनि ली सभें की हम अवतारिए
 
प्रभाकर पाण्डेय
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भारतीय फिल्मन के जनक : दादासाहब फालके

का रउआँ जानतानी की भारत में फिल्मन के निरमान कब अउर केकरी द्वारा सुरु भइल। के हS उ महारथी, महापुरुस जेकरी अथक परयास से भारत में फिल्मन के निरमान सुरु भइल अउर फिलिम-निरमान में लोगन के रुचि पैदा भइल? सही समझनी रउआँ, दादा साहब फालके (फाळके), जी हाँ इहे नाव
 
प्रभाकर पाण्डेय
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भोजपुरिया कहावतन में नाऊ

अगर रउरा भोजपुरिया समाज, रहन-सहन, खान-पान आदि से पूरा तरे परिचित भइल चाहतानी त बहुते मोटे-मोटे किताब आदि पढ़ले के जरूरत नइखे, जरूरत बा त भोजपुरिया कहावतन के समझे के। इ भोजपुरिया कहावत भोजपुरिया समाज के दरपन हईंसन जवने में रउआँ साफ-साफ भोजपुरिया समाज ओ
 
प्रभाकर पाण्डेय
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आजु पहिली तारीख हS

रातिभर दुनु परानी सुति ना पउवींजा। करवट बदलत अउर एन्ने-ओन्ने के बाति करत कब बिहान हो गउए पते ना चलुवे। सबेरे उठते मलिकाइन चाय बना के ले उअवी अउर कहुवी की जल्दी से तइयार होके आफिस चलि जाईं। हम कहुँवी की अरे आफिस त 9 बजे खुली, अबे साते बजे आफिस जाके का
 
प्रभाकर पाण्डेय
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चइत नौरात्रि के महत्ता

हिंदु धरम-ग्रंथन में सालि में दु गु नवराति के बरनन मिलेला, एगो चइत के नवराति अउरी दूसरा सारदीय नवराति। ए दुनु नवराति के महिमा अपरम्पार बा। जे केहु भी सरधालु परेम, भक्ति की संघे माई दुरुगा की नवो रूपन के पूजा-पाठ करेला ओकर सब दुख दूर हो जाला। ओकर जीवन
 
प्रभाकर पाण्डेय
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होली के मजा बा गँउवें में..........

पिछिला होलिआ में घर से बार-बार फोन आवे की ए बाबू तूँ लोग-लइकन के ले के घरे चली आव अउरी ए बेरी के होली तूँ गउँए मनावS। मलिकाइनियो कहली की घरे फगुआ मनवले ढेर दिन हो गइल बा। हम सोंचनी की हमहुँ दु-तीन बरीस से फगुआ में घरे नइखीं रहल, तS काहें ना ए बेरी के
 
प्रभाकर पाण्डेय
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Feb 27 2010 10:37 PM
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सबसे नीमन हमार गाँव हS

सबसे नीमन हमार गाँव हSमाई की अँचरा के छाँव हS, सबसे नीमन हमार गाँव हS, जहाँ गाइ, बछड़ू के दूध पियावे, प्रेम से ओके चूमे-चाटे, पुरनियन की सनेह के छाँव हS, सबसे नीमन हमार गाँव ह. जहाँ कोयल आपन गीत सुनावे, कोयलिया के खूब रिझावे, टिकोरवा से लटकल अमवा के
 
प्रभाकर पाण्डेय
Feb 25 2010 08:43 AM
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मदनोत्सव

मदनोत्सव यानि मदन उत्सव। हम तS इ कहल चाहतानि की भारतो में बसंत ऋतु में मदनोत्सव मनावल जात रहल हS जवन अब धीरे-धीरे अपनी नश्वर शरीर के तेयाग कS दे ले बा अउर एकर कारन इ बा कि पाश्चात्य सभ्यता की चकाचौंध में अँधरियाइल भारतीय समाज के बेलेंटाइन डे से पेयार हो
 
प्रभाकर पाण्डेय
Feb 14 2010 09:26 AM
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अमर परेम पर भारी, भाई-भतीजावाद परेम

इ त सुनलहीं होखबि सभें की परेम हमेसा अमर होला। ए में कवनो दु-राई नइखे की परेम अमर बा पर अगर राजनीति के बाति होखे त इ तनि डाउटफुल हो जाला की का अमर बा आ का परेम बा? परेम अमर बा की अमर परेम बा।आजुकल जवनेगाँ राजनीती एगो अच्छा बेयपार की रूप में चटकल
 
प्रभाकर पाण्डेय
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इ राशिफल हमके जिए ना दी

सबेरे-सबेरे हम अखबार खोलते आपन राशिफल देखेनी अउर ओही आधार पर दिन के सुरुवात करेनी। खाली हमहीं नाहीं, हमार मलिकाइनियो टीबी खोलते पहिले उहे चैनल देखेली जहँवा से राशिफल आवत होखो। अरे भाई, उनकरा तS इ मालूम बा की कब कवने-कवने चैनल से राशिफल देखावेला। एइसन
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ए नवका साल में...

हे भगवान ए नवका साल में,तूँ कुछ नया क के देखावS,भस्टाचार के करS तूँ खात्मा, अउर बेरोजगारी के भगावS।तूँ मंदिर अउर मसजिद से,एक्को घंटा खातिर बाहर आवS,अउर धरम की नाव पर लड़ेवालन के,झगड़ा तS फरिआवS।आजु मानवता रो रहल बा,चारु ओर अँधियार बा,लूट-खसोट,
 
प्रभाकर पाण्डेय
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हे भगवान भोजपुरी के कब्बो भासा के दरजा मति मिलो

भोजपुरी-भोजपुरी अउरी खाली भोजपुरी। जहें देखS तहें भोजपुरी। हाँ भाई खदेरुआ के देखS न चारू ओर घूमि-घूमि के खाली इहे कहता की हम भोजपुरी के विकास में तन-मन से लागल बानी। हम चाहतानी की भोजपुरी के खूब विकास होखो, ए के भाषा के दरजा मिलो। खदेरुआ सालि में
 
प्रभाकर पाण्डेय
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भोजपुरी में 'है-IS, हैं-ARE, हो-ARE' खातिर परयोग होखेवाला सबद

भोजपुरी हिंदी अंग्रेजी बा राम कहाँ बा ? है राम कहाँ है ? Is Where is Ram? बाने ( आदरार्थी ) तोहार बाबूजी काहाँ बाने ? हैं तुम्हारे पिताजी कहाँ हैं ? Is Where is your father? बानी (अति-आदरार्थी) राउर बाबूजी काहाँ बानी ? हैं आपके पिताजी कहाँ हैं ? Is W
 
प्रभाकर पाण्डेय
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विराम-चिह्न के आत्म कहानी, सुनीं उनहीं की जुबानी

हम विराम-चिह्न हईं। कुछ ग्यानी लोग हमके विराम चिन्ह चाहें विराम भी बोलेला पर हमरा कवनो दुख नइखे उलटे खुसी बा। हाँ , एगो बाति हम बता दीं ; हमार कोसिस रहेला की लिखित वाक्यन आदि में हम कवनो न कवनो तरह से हाजिर रहीं। हम अपनी मुँहें मियाँ मिट्ठू नइखीं बनत
 
प्रभाकर पाण्डेय
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आदमी मरे भूक्खन अउरी बिलारि पीए दूध

एकबेर विजयनगर में मूसन के आतंक फैलि गइल। घर-घर अउरी गली-गली में खाली मूसे लउकें कुलि। लोग मुसमरवा दवाई अउरी मूसदानी से मूसन से पीछा छोड़ावे के कोसिस कइल पर कवनो फायदा ना भइल। अंत में विजय नगर के राजा कृष्णदेव राय मूसन से निजात पावे खातिर घर-घर में एक
 
प्रभाकर पाण्डेय
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बहुरंगी चिरई अउरी तेनालीराम

राजा कृष्णदेव राय पसु-पछियन के बहुते परेमी रहने। उनकरा नया-नया जीव-जानवरन के पलले के सौख रहे। एकबेर के बाति हS की एगो चिरई बेंचेवाला एगो बहुरंगी अउरी बहुते सुन्नर चिरई ले के उनकरी राज-दरबार में पहुँचल अउरी ओ चिरई के उनके देखवलसि। जब राजा कृष्णदेव राय
 
प्रभाकर पाण्डेय
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बिहार में लोग की सिर चढ़ि के बोल रहा बा नीतीश के नीति अउरी बिकास के काम

आजु रमेसर काका बहुते खुस नजर आवताने। उनकर पाँव आजु न थकता न जमीनी पर पड़ता। आजु उ बिहाने से लगभग सात-आठ बेर पूरा गाँव के चक्कर लगा आइल बाने। सुने में तS इहो आइल हS की आजु दु बेर उ पान खाए अउरी पेपर पढ़ले की बहन्ने चउरहो पर गइल रहने हँ अउरी उहवाँ बिहस
 
प्रभाकर पाण्डेय
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बिहार चुनाव में बाहुबलियन के रही बोलबाला काँहे की सब पारटी जपि रहल बिया एहिलोगन के माला

आजु मँगरू काका गरमइले घर में से निकलुअन अउरी कान्धे पर गमछा धइले अउरी काँखे में धोती दबवले बोरिंग की ओर नहाए चलि गउअन। उनकर छोटका लइकवा रमेसरा पंपुसेट चालू कS के मटर पटावत रहुए। हमहुँ हाले के खेते में से ऊँखि छीलि के आइल रहुवीं अउरी छाँति काटत रहुवीं
 
प्रभाकर पाण्डेय
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माई की ममता के इ मोल?

तिजहरियवाँ छाँटी काटत रहनी तवलेकहीं माई घर में से हाँक लगावत निकललि, "ए मझिलू! ए मझिलू! काहाँ बाड़S हो? अरे तनि लवना-ओवना के इंतिजाम क देतS। दिन डूबे जाता।" हम माई के बोलावल सुनि के छँटिकट्टा में से बाहर निकलनी अउरी कहनी, "माई ते काँहे चिंता कइले बाड
 
प्रभाकर पाण्डेय
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काका लोग कहिन...बंदे मातरम्

आजु सबेरवें-सबेरवें पंपुसेट ले के चउरी की खेत्ते में जाए के रहल ह. बरसा महरानी लागता रिसिआ गइल बारी अउरी नहरियो में पानी बहुत कम्मे बा. अउरी हाँ एक बाति अउर, नहरी के पानी चउरी में चढ़ावत में केतने जाने से कपरफोड़उलियो करे के परीत. मंसूरिया रेड़तिया अ
 
प्रभाकर पाण्डेय
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महुआ जीता गइल सब भोजपुरयन के (सुर-संग्राम की फाइनल के कहानी)

आजु सबेरवें-सबेरवें का देखतानी की  रमेसर काका नहा-धो के हाथे में पूजा के डोलची ले के सिवथाने जा रहल बाने। उनकरी मुँहे में से बार-बार नमः शिवाय, नमः शिवाय निकल रहल बा। काक के ई रूप देखि के त हमार नीचे के परान नीचे अउर ऊपर के ऊपरे रहि गइल। हम थूक
 
प्रभाकर पाण्डेय
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अब इयादि आवता लरिकाई

बाबूजी के डाँटल अब बरदास्त से बाहर हो गइल रहे। हम माई से कहि देहनी की बाबूजी के समझा दे, बाति-बाति पर घघोटें मति। अब हम लइका नइखीं। कहीं एइसन मति होखे कि हमरियो मुँहे में से उलटा-सुलटा न निकलि जाव। ए पर माई हमके समझावे अउर कहे की बाबू, तोहरे बाप न हउ
 
प्रभाकर पाण्डेय
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टास जीतला की बादो मैच हारि गइल इंडिया

अबहिन बहुत भिनसार रहुए तब्बे का देखतानी की बहोरन काका डोल-डाल कS के लवटल बाने। ओ समय हम गोबर-गोहथारि करत रहुवीं। बहोरन काका जब नलका पर लोटा माँजत रहुअन तब्बे हमहुँ हाथ धोवे पहुँचि गउवीं। हमके देखते बहोरन काका कहताने की बाबू तनि एगो नीबी के दतुअन टूड़
 
प्रभाकर पाण्डेय
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भोजपुरी वर्णमाला (देवनागरी लिपि)

किरपया धेयान देईं सभें- भोजपुरी वर्णमाला विसेसकर हिंदीए की समान बा। स्वर अउरी ओकर मात्रा– अ, आ (ा), इ (ि), ई (ी), उ (ु), ऊ (ू), ए (े), ऐ (ै), ओ (ो), औ (ौ), अं (ं) नोट :- 1. हिंदी की आधार पर देखीं त भोजपुरी में अधिकांस सब्दन में ै, ो ए स्वर चिन्हन के
 
प्रभाकर पाण्डेय
Sep 27 2009 11:03 PM
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'अँजोरिया' १८ जुलाई, ०९ के ६ सालि पूरा क ली....

राम-राम.....दुआ....सलाम.... हमरा इ बतावत में बहुते खुसी होता की भोजपुरी के सबसे पुराना बेभ पत्रिका अँजोरिया १८ जुलाई, ०९ के ६ सालि के हो जाई। ए छह सालन में अँजोरिया की अँजोर में भोजपुरी बहुत निखरल बिया, चमकल बिया। अँजोरिया भोजपुरी में समाचार की साथे
 
प्रभाकर पाण्डेय
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जबाना बदले लागे, तS पश्चिमी सभ्यता के दोस बा...?

साड़ी के जगह जींस लेलहलसि, धोती के जगह बरमुडा छोट बाल आ फ़िल्मी चाल, फैशन चलल बाल मांगमुडा कुँवारी के कवनो सीमा ना, ना सुहागिन के माथे सिन्दूर बा जब जबाना बदले लगे, त पश्चिमी सभ्यता के दोस बा...? इन्टरनेट कनेक्शन मिल गईल, दुनिया के हर दुआर खुल गईल चैट
 
प्रभाकर पाण्डेय
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माइयो के दिन??? - मडर्स डे पर बिसेस

माई-माई कइले बाड़S, अबहिन ले कहाँ रहलS हS। अब न माई के दिन आइल बा। पूरा संसार माई के दिन मना रहल हS। माई के दिन रोजो थोड़े मनावल जाई। माई के दिन मतलब उ दिन जवने दिने माई के विसेस रूप से याद कइल जाला। अब तूँ सोंचत होखबS कि माई के ईयादि करे खातिर एगो अ
 
प्रभाकर पाण्डेय
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खिस्सा-कहानी: जइसन के तइसन

नदी की किनारे की जंगल में एगो ऊँट रहत रहे। उ बहुत सीधा-साधा रहे। एक दिन ओकर भेंट एगो धूर्त सियार से हो गइल। सियरा ओ ऊँटवा से दोस्ती क S के संघवे रहे लागल। एक दिन सियरा ऊँटवा से कहलसी , " ऊँट भाई! चल मकई खाए नदी की ओ पार चलल जाव।" ऊँटवा कहलसी , " चोरी
 
प्रभाकर पाण्डेय
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अस्सी बरिस के बाँका : बाबू वीर कुँअर सिंह

लह-लह धरती खूब अघइली, भइल सोर जोरे मयदान, उ तेइस अपरिल महीना, बिजय पताका उड़े असमान।" ए पंक्तियन में लोककवि हीरा प्रसादजी जवने बिजय पताका के बात क रहल बानीं ओके लहरावेवाला बाबू कुँअर सिंहजी रहनीं। 80 बरिसहा बाँका, बीर, गबड़ू जवान बाबू कुँअर सिंहजी 18
 
प्रभाकर पाण्डेय
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सत्य, अहिंसा, दया, तेयाग अउरी तपस्या के प्रतीक : भगवान महावीर

महावीर जयंती पर विशेष भगवान महावीर के जनम 599 ई. पूर्व में चइत सुदी तेरस के वैशाली (अब बिहार में इ क्षेत्र) में एगो राजपरिवार में भइल रहे। इनकरी बचपन के नाव वर्धमान रहे। इनकर माई श्रीमती त्रिशला एको धरमपरायन अउरी सुसील महिला रहली। महावीर के बाबूजी रा
 
प्रभाकर पाण्डेय
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पुन्य अउरी मंगलदायक परब : रामनम्मी (रामनवमी)

चइत की अँजोरिया की नम्मी (चइत शुक्ल नवमी) के सीरी रामनवमी की रूप में बिधि-बिधान की साथे-साथे धूम-धाम से मनावल जाला। हिंदू ब्रत-तिउहारन में सीरी रामनम्मी के एगो विसेस अउरी महत्पूरन अस्थान बा। ए ब्रत के महत्ता अपरम्पार बा। बहुत सारा ग्रंथन में ए तिउहार
 
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प्रख्यात सिछाविद, समाजसेवक आ राजनीतिग्य : भोजपुरी रतन डा. प्रभुनाथ सिंहजी

भोजपुरी भासा अउरी साहित्य के एगो मानल-जानल हस्ताछर अउरी समाज से जुड़ि के समाज की विकास खातिर सदा परयासरत भोजपुरियन के चहेता, भोजपुरिया रतन डा. प्रभुनाथ सिंहजी 30 मार्च, 09 के ए नस्वर संसार के तेयागि के सरग के बासी हो गइनीं। इहाँ के सगर सिधरले की संघे
 
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चइत नौरात्रि के महत्ता

हिंदु धरम-ग्रंथन में सालि में दु गु नवराति के बरनन मिलेला, एगो चइत के नवराति अउरी दूसरा सारदीय नवराति। ए दुनु नवराति के महिमा अपरम्पार बा। जे केहु भी सरधालु परेम, भक्ति की संघे माई दुरुगा की नवो रूपन के पूजा-पाठ करेला ओकर सब दुख दूर हो जाला। ओकर जीवन
 
प्रभाकर पाण्डेय
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जय थावेंवाली माई- एगो परिचय

माई दुर्गा तिनु लोक में सर्वशक्तिमान हई, ब्रहमांड में मौजूद हर तरह के शक्ति माई के कृ पा से ही मिलेला आवुर अंत में सारा शक्ति इनके में विलीन हो जाला एही से माई दुर्गा के आदिशक्ती भी कहल जाला | देव ता लोग भी जब राक्षसन से लडाई करत में अपना के कमजोर मह
 
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कछुआ हारल, खरहा जीतल (बचवन खातिर पर रउओं सुनि सकेनी)

लल्ला-लल्ली, गुड्डू-गुड्डी! आजु हम तोहलोगन के कछुआ अउरी खरहा के एगो नया कहानी सुनावे जा तानी। ए कहानी में दउड़ (रेसि) में कछुआ नाहीं बलकी खरहा मरलसि बाजी, कवनेगाँ? तS सुनS जा :- नदी के किनारे की जंगल में एगो कछुआ अउरी एगो खरहा साथे-साथे रहत रहने कुलि
 
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A से अ, AA से आ (बचवन खातिर)

से अ, AA से आ, चुप मति रहS, पढ़त जा। I से इ, EE से ई, सुनS भाई, पप्पू जी। U से उ, OO से ऊ, बोले कोयल कू, कू, कू। E से ए, AI से ऐ, परेम से बोलS, माँ की जय। O से ओ, AU से औ, कुतवा बोले, भौं, भौं, भौं। AN से अं, AH से अः , चुप मति रहS, दुबारा कहS।। -प्र
 
प्रभाकर पाण्डेय
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होली के मजा बा गँउवें में, कहीं चौताल हS तS कहीं जोगीर्रा

पिछिला होलिआ में घर से बार-बार फोन आवे की ए बाबू तूँ लोग-लइकन के ले के घरे चली आव अउरी ए बेरी के होली तूँ गउँए मनावS। मलिकाइनियो कहली की घरे फगुआ मनवले ढेर दिन हो गइल बा। हम सोंचनी की हमहुँ दु-तीन बरीस से फगुआ में घरे नइखीं रहल, तS काहें ना ए बेरी के
 
प्रभाकर पाण्डेय
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कस्मीर के मुद्दा सुलझा ले ले रहतीं हम : नवाज शरीफ

आजु तीजहरियवाँ रमेसर काका गोंसारी चूल्हा झोंकत रहुअन तवलेकहीं हमहुँ भुजा भुजावे पहुँचि गउवीं। गोंसारी पहुँचि के हमहुँ रमेसर काका की बगलिए में बइठि गउबीं पर हमेसा हँसमुख रहेवाला अउरी बोलतू रमेसर काका आजु बड़ी सांत रहुअन। उनकरी चेहरा पर कुछु उदासी के भ
 
प्रभाकर पाण्डेय
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आखिरकार आस्कर मिलिए गइल

रमेसर काका आज बहुते खुस बाने। घूमि-घूमि के बस एके बाति दोहरावताने, "आखिरकार आस्कर मिलिए गइल।" हम कहनी ए काका, "इ खुसखबरी तूँ घूमि-घूमि के काहें कहतारS, आजु सिवराति हS, सिउथाने चलि चलS अउरी उहवें गाँवभरि के एके बेर बता दS।" हमरी एतना कहते रमेसर काका ब
 
प्रभाकर पाण्डेय