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ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
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18 Mar 2010
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कुछ ब्लोग्गर्स और ब्लोगस को आपस में बतियाते देखा गया

कल इस ब्लोगजगत में प्रेत की तरह विचरते हुए (जी हां अब तो ये हाल हो गया है कि ब्लोग्गिंग के आसपास न भी हों तो आत्मा ..प्रेतात्मा बनके यहीं मंडराती रहती हैं ) और ऐसे में ही घूमते घूमते बहुत से ब्लोग्गर्स मित्रों को देखा कि वे अपने ही ब्लोग से बतिया रहे थे
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गिंग से जुडी ट्यूशन क्लास ....पीरियड टू है जी

पिछली पोस्ट को हमने जाने कौन से मूड में लिख दिया था , सोचा तो ये था कि नए मित्र ब्लोग्गर्स को ऐसी जानकारियों की समय समय पर उपलब्ध करानी चाहिए ...मगर आप सबने उसे झाजी की ब्लोग क्लास ही बना दिया ....तो फ़ुल टाईम स्कूल चलाने के लिए तो न हमको परमीशन मिलेगा और
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गिंग के लिए कही चंद पुरानी बातों को फ़िर दुहराया जाए ......

यूं तो इनमें से कोई भी बात ऐसी नहीं है जिसे पहले नहीं कहा गया हो और सभी ने कभी न कभी इसे अपने अपने अंदाज़ में कहा भी है मगर जाने क्यों जब देखता हूं कि इस ब्लोग शहर में हर रोज़ कई घरौंदे बस रहे हैं नए नए , नए नए कस्बे , नए नए मुहल्ले बस रहे हैं तो फ़िर उन
 
अजय कुमार झा
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बधाई दीजीए ....ये इस ब्लोग की पांच सौंवी पोस्ट है ....मगर वाह नहीं कहिएगा

ये इस ब्लोग की पांच सौवीं पोस्ट है , या शायद उससे एक ज्यादा ...है न बधाई देने की बात ....मगर नहीं वाह मत कहिएगा ......आज मन वाह नहीं आह कहने को कर रहा है .............आह ....!!!!!!!!!!!मैं भीष्म नहीं ,मैं अजर नहीं ,मारो , मर जाऊंगा ,मैं कभी भी अमर नहीं
 
अजय कुमार झा
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तो फ़िर हो जाने दो ब्लोग्गिंग को उन्मुक्त और निरंकुश ...

पिछ्ले कुछ दिनों बहुत से मुद्दों और तथाकथित विमर्शों पर जिस तरह की खींचतान , परोक्ष प्रत्यक्ष आरोप प्रत्यारोप , आक्रोश, खिन्नता , और भी जितने विशेषण होते होंगे सभी एक साथ देखने पढने को मिले । और जैसा कि अपेक्षित ही था कि एक बार फ़िर से धुरियां बनी या शायद
 
अजय कुमार झा
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ब्लॉग दुर्बुद्धि जमात का कूड़ा-कचरा है...

जी हां ये उदगार होली से ठीक पहले नई दुनिया दिल्ली के संपादक श्री आलोक मेहता जी ने अपने एक आलेख में लिखे थे । हालांकि इसे उन्होंने बुरा न मानो होली है के बुलेट प्रूफ़ आवरण ओढा कर लिखा था । और बेशक किसी को लगा हो न हो मगर मुझे यदि बुरा न कहूं तो अच्छा भी
 
अजय कुमार झा
टैग: hindi blogging
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चलिए महिला दिवस मनाने की तैयारी करें .......कहीं देर हो गई तो ?....

अब तो जिस तरह से इन दिवसों पर उन संबंधित मुद्दों को मनाने /दिखाने और जताने की जितनी मजबूरी है उतनी ही मजबूरी साल भर उन मुद्दों को भुलाए रहने की रहती है । अब जबकि महिला दिवस आ ही गया है और उस दिन यानि आठ मार्च को सभी इस मुद्दे पर गंभीर /अगंभीर आलेख लिख कर
 
अजय कुमार झा
Mar 05 2010 08:10 PM
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अमां आलोक मेहता जी ...बाशिंदे नई दुनिया के ...मगर सोच वही दकियानूसी . यार इत्ता अपने ब्लोग पर लिखा होता तो ..........

हाल ही में होली में रंग गुलाल की गोली बम बारूद सभी बरसाने में लगे हुए थे । ऐसा लग रहा था कि जैसे हर किसीको ..हर किसी को बधाई देनी है ..सभी दे भी रहे थे ..मुझे तो लग रहा था कि पोस्टें हुलस हुलस के एक दूसरे से गलेमिल रही हैं और कह रही हैं ....अजी हमें पता
 
अजय कुमार झा
टैग: आलेख
Mar 02 2010 10:42 PM
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भांग, मालपुआ, और होलियाते हम .....अमा कभी तो बुरा मानो

जब से इस बेकार से शहर में आकर बस जाने टाईप की मजबूरी हो गई तभी से सारे त्यौहारों के मायने ही बदल गए हैं ,न मुई ये होली रंगीन लगती है न ही दिवाली की चमक बरकरार है । कहने को तो सब कुछ हो ही रहा होगा मगर हम का करें कि ई ससुर दिल जो बिहारी रह गया है । ऊपर से
 
अजय कुमार झा
Feb 28 2010 07:30 PM
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गुटबाजी, संगठन , घेटो ... सही समय पर एक गलत पोस्ट !

ओह कहते हैं न कि कुछ भी सोचा हुआ नहीं होता है तब तो बिल्कुल भी नहीं जब आप चाहें कि वैसा ही हो , अब देखिए न सोचा था फ़गुनाहट में कुछ ऐसी धूम मचाएंगे कि ब्लोगजगत में इंद्रधनुषी छटा बिखर जाएगी , जिनको वो भी न नज़र आई उन्हें भांग का लोटा गटका देंगे ..बांकी सब
 
अजय कुमार झा
Feb 26 2010 05:48 PM
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तो आप ही बताईये कि आखिर ब्लोग्गिंग है क्या ???

लगभग ढाई साल होने को आए इस मुंए ब्लोग्गिंग के अंतरजाल में फ़ंसे हुए । जब शुरू शुरू में आए थे तो सच कहें तो कुछ भी नहीं सोचा था ...अजी सोचते क्या खाक ..जब पता ही नहीं था कि ये ब्लोग्गिंग आखिर है क्या बला ? बस ब्लोग बना जैसे तैसे घुस लिए , कुछ दिनों बाद
 
अजय कुमार झा
टैग: hindi blogging
Feb 22 2010 09:13 PM
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1411 : न 14 न 11 .....(बाघों को समर्पित एक हर्बल पोस्ट )

जब से सुना कि बाघों को बचाने की मुहिम तेज़ हो रही है ....बस उसी पल मैं समझ गया कि अब हो न हो ....वो दिन दूर नहीं रहा जब हम बाघों को बचा ही लेंगे ....न सिर्फ़ बचा लेंगे बल्कि ...उनकी संख्या चौदह सौ ग्यारह से बढा कर ..चौदह हज़ार , चौदह लाख ......अरे रे बस
 
अजय कुमार झा
टैग: १४११
Feb 20 2010 04:27 PM
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कृपया ...किसी के अंदर के जानवर को न जगाएं ....

कुछ सालों पहले एक पिक्चर देखी थी ....शायद नाम था विरासत । इस सिनेमा में नायक खलनायक की बहुत सी बातों को , उसकी गलत चालों को , उसकी बुरी मानसिकता को और जितने भी बुरे कृत्य होते हैं उन्हें झेलते हुए , बर्दाश्त करते हुए ....बार बार उससे ये आग्रह करता है कि
 
अजय कुमार झा
Feb 18 2010 11:11 PM
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ब्लोग्गर्स पुरस्कार पर कुछ बातें

आज पहले बात उन मुद्दों की जो पिछले दिनों छाए रहे , जिनमें सबसे पहला रहा ब्लोग्गर्स को पुरस्कार दिए जाने को लेकर उठा विवाद । विवाद इस बात के लिए नहीं था कि ब्लोग्गर्स को पुरस्कार दिया जा रहा है बल्कि किन्हें और किस आधार पर दिया जा रहा है । हालांकि यही बात
 
अजय कुमार झा
Feb 15 2010 07:56 PM
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दिल्ली ब्लोग बैठक (सिलसिलेवार रपट -आखिरी ,कुछ रोचक बातें )

जी अब दिल्ली ब्लोग बैठक में हुई कोई ऐसी उल्लेखनीय बात नहीं बची है जो मैं अपनी पिछली रिपोर्टों में नहीं कह पाया हूं इसलिए इस सोचा कि इस आखिरी भाग में आपको इस ब्लोग बैठक से जुडी को बहुत ही रोचक मनोरंजक बातें बताता चलूं । हा हा हा ......मैं समझ गया ...आप
 
अजय कुमार झा
Feb 14 2010 08:19 PM
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ब्लोग बैठक (सिलसिलेवार रपट -६)

बैठक में जब टिप्पणियों की बात चली तो सबसे पहले आया जिक्र , सुमन जी की सदाबहार और आजकल खूब चर्चा में आई टिप्पणी nice का । उनकी टिप्पणी nice का जिक्र छिडने की देर थी कि पहले सबके होठों पर मुस्कुराहट आई जो जल्दी ठहाके में बदल गई । इसी बीच जिक्र चला कि आखिर
 
अजय कुमार झा
Feb 13 2010 01:56 PM
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दिल्ली ब्लोग बैठक (सिलसिलेवार रपट -५)

जैसा कि कल की पोस्ट में मैं बता रहा था कि श्री सरवत जमाल जी ने अपनी बात शुरू करते हुए नए ब्लोग्गर्स की कठिनाईयों के बारे में बात की और अपनी कुछ शुरूआती कठिनाईयों के बारे में भी बात की । उनकी इसी बात में पूरी सहमति जताते हुए पद्म सिंह जी ने भी बताया कि
 
अजय कुमार झा
Feb 11 2010 10:21 PM
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दिल्ली ब्लोग बैठक ( सिलसिलेवार रपट -४)

डा. टी.एस.दराल जी ने अपनी ब्लोग्गिंग की शुरूआत का किस्सा जो बताया वो उन्होंने आज अपनी पोस्ट में भी बता ही दिया है कि किस तरह प्रसिद्ध हास्य कवि अशोक चक्रधर जी के एक समारोह में अविनाश भाई और कुछ अन्य ब्लोग्गर्स के ब्लोग पाठ होने पर उन्होंने वहां सबसे
 
अजय कुमार झा
Feb 10 2010 09:21 PM
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दिल्ली ब्लोग बैठक ( सिलसिलेवार रपट नं ३)

ब्लोग बैठक में इसके बाद धीरे धीरे सभी एक एक करके आने लगे । मगर सबसे ज्यादा चौंकाने वाली उपस्थिति रही मसीजीवी की, उनसे मुझे थोडी देर अकेले बात करने का अवसर मिला । जब राज भाटिया जी अपने ब्लोग्गिंग की शुरूआती अनुभवों को बांटना शुरू किया तो वो भी खासा
 
अजय कुमार झा
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दिल्ली ब्लोग बैठक (सिलसिलेवार रपट नं २)

जब राज भाटिया जी ने अपने स्वदेश प्रवास का मन बनाया तो मुझसे संपर्क करके कहा कि अजय भाई क्या ये संभव है कि मेरे भारत प्रवास और दिल्ली में रुकने के दौरान सभी ब्लोग्गर्स मित्रों से मिल बैठ हो जाए । पिछले ब्लोग्गर सम्मेलन के बाद से सभी स्थानीय मित्र
 
अजय कुमार झा
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दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक संपन्न ,राज भाटिया जी से यादगार मुलाकात (ब्लोग बैठक रपट नं 1)

लीजीए हमने वादा क्या था न कि दिल्ली ब्लोगर्स बैठक की सारी रपट और फ़ोटो आपके लिए लेकर आज हाजिर हो जाएंगे । तो लीजीए अभी सिर्फ़ पोस्टर देखिए और आने वाली फ़िल्म का इंतजार कीजीए । यकीन मानिए , कई मायनों आपको हमारी ही तरह ब्लोग्गर बैठकी की ये पूरी पिक्चर यादगार
 
अजय कुमार झा
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ये जगह कर रही है ब्लोगगर मिलन का इंतजार ( दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठकी, राज भाटिया जी से मुलाकात )

लीजीए जी अब तो सिर्फ़ कुछ घंटे ही बचे हैं जब इसी नीचे दिखाए स्थान को हम सभी ब्लोग्गर्स एक बार फ़िर गुलज़ार करने जा रहे हैं । जो पिछली ब्लोग्गर बैठक को देख पढ चुके हैं वे सोच रहे होंगे कि यार ये झाजी हर बार इसी जगह को क्यों चुन लेते हैं , कुछ सेटिंग तो
 
अजय कुमार झा
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बस खत्म हुआ इंतज़ार ,बस आ गया रविवार ( दिल्ली ब्लोग्गर्स मिलेंगे राज भाटिया जी से , और आपस में भी )

जी हां बहुत समय से टलते टलते आखिरकार वो दिन आ ही गया है जिसका मुझे और भाटिया जी को इंतज़ार था ,जी हां इस रविवार यानि सात फ़रवरी को सुबह ग्यारह बजे से शाम चार बजे तक हम सब आपस में मिल बैठेंगे । फ़िर से उन्हें याद दिला रहा हूं ताकि फ़िर से मुझे ये न सुनना
 
अजय कुमार झा
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हां , भविष्यवाणी सच साबित हुई .....और तो और कई ब्लोग्स का तापमान भी माईनस में चला गया

अभी कुछ समय पहले भविष्यवाणी की गई थी कि ३ और ४ फ़रवरी को मौसम खराब हो सकत है , हालांकि आमतौर पर भविष्यवाणियों में रुचि न होने के कारण मैं इसपर ध्यान नहीं दे पाता इसलिए इस बार भी ऐसा ही हुआ । मगर अबकी बार तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ कि इस बात पर अविश्वास
 
अजय कुमार झा
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अब तैयार हो जाईये विश्व स्तरीय ब्लोग्गिंग के लिए ....एक्शन और लीगल एक्शन के साथ ...

आजकल जो कुछ और जितनी तेजी से घट रहा है , उस स्थिति का अंदाज़ा तो मुझे पहले ही हो चुका था क्योंकि कभी मौज के नाम पर तो कभी चर्चा के नाम पर , कभी पोस्ट लिख कर कभी टिप्पणी और कभी प्रति टिप्पणी के सहारे अपनी प्रतिक्रियाओं , अपने गुस्से, और अपनी उस सोच को खुले
 
अजय कुमार झा
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अब दिल्ली ब्लोग्गर बैठक नहीं होगी मगर ब्लोग्गर्स तो बैठेंगे ही ,वो भी इसी रविवार , यानि सात फ़रवरी को ही

जी हां बिल्कुल ठीक पढ रहे हैं आप लोग , मेरे कहने का मतलब बिल्कुल स्पष्ट है कि, इस रविवार यानि सात फ़रवरी को प्रस्तावित दिल्ली ब्लोग्गर बैठक अब नहीं होगी । ब्लोग्गर बैठक नहीं होगी इसके कई कारण हैं जो मैं आगे बताऊंगा , मगर इससे पहले ये बताता चलूं कि राज
 
अजय कुमार झा
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नैतिकता, आनंद, दोयम दर्ज़ा , इन शब्दों पर फ़्लैशबैक के साथ ,कुछ ट्रेलर

ये तो मैं बहुत पहले ही समझ चुका था कि हिंदी ब्लोग्गिंग मे भी अन्य सभी समाजों की तरह मुद्दों की कंगाली का दौर तो आता जाता ही रहता है और उसी का ये परिणाम होता है कि फ़िर मुख्य धारा के विषयों, और आलेखों के ऊपर अक्सर वो कहते हैं अलाने फ़लाने..........या फ़लाने
 
अजय कुमार झा
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रोज़ नए दर्द, संभालता हूँ मैं

हर पल,इक नया ,वक़्त ,तलाशता हूँ मैं॥जो मुझ संग,हँसे रोये,वो बुत,तराश्ता हूँ मैं॥मेरी फितरत ,ही ऐसी है कि,रोज़ नए दर्द,संभालता हूँ मैं॥परवरिश हुई है,कुछ इस तरह से कि,कभी जख्म मुझे, कभी,जख्मों को पालता हूँ मैं॥सुना है कि, हर ख़ुशी के बाद,एक गम आता है,
 
अजय कुमार झा
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वर्चुअल स्पेस बनाम फ़िजिकल एपियरेंस, चर्चा डोमेन मामला, ब्लोग्गर मीट

छत्तीसगढ की ब्लोग्गर्स मीट से बहुत कुछ अपेक्षित निकला , और कुछ ऐसा भी जो अपेक्षित नहीं था । इस मीट की रिपोर्टिंग की पोस्टों में कई सारी बातें निकल के आ रही हैं , और मुझे कोई आशचर्य नहीं कि हिंदी ब्लोग्गिंग की स्वाभाविकता के अनुरूप उस सम्मेलन की सकारात्मक
 
अजय कुमार झा
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सिर्फ़ ब्लोग्गिंग ही सब कुछ नहीं है , अगली ब्लोगर्स बैठक की घोषणा

आज जब ये पोस्ट लिखने बैठा तो समझ ही नहीं पा रहा था कि लिखूं कैसे और क्या आखिर दो विरोधाभासी बातें एक पोस्ट में ही कहना करना ठीक होगा या नहीं , मगर फ़िर सोचा कि जब है तो है यही बात । और यदि इतना सोच नोच के लिखना होल तो ब्लोग्गिंग की स्वाभाविकता ही कम नहीं
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गिंग में आए नए मित्रों के लिए कुछ जरूरी /गैर जरूरी बातें

"झाजी मैं ब्लोग्गिंग छोड रहा हूं , बस यार अब नहीं करना " मित्र सत्येन्द्र जी ने मुझे चौंका दिया । मैं सोचने लगा आयं ये क्या , इसे क्या हो गया , अभी तो कुछ समय पहले ही ब्लोग्गिंग में इन्हें हमने घुसेडा था मगर इत्ती जल्दी टंकी आरोहण ......हमें तो पूरा यकीन
 
अजय कुमार झा
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खुशियों की होम डिलीवरी

जी हां मैं समझ रहा हूं कि आप लोग सोच रहे होंगे कि आज तो पिज्जा की होम डिलिवरी का जमाना है और वो भी बाकायदा पेमेंट करके मिलती है ।और यदि मुफ़्त में किसी चीज़ की होम डिलिवरी होती है तो वो है तनाव /दुख / गम और इनके ही भाई बंधु .........॥ तो ऐसे में यदि
 
अजय कुमार झा
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अंत में फ़ुनसुक बांगडू बनना जरूरी है !!!!

आमिर खान की पिक्चरें , पहले की भी और अब की तो निश्चित रूप से मुझे प्रभावित करती रही हैं । बेशक उनसे जुडे विवादों और उन पर आमिर के घोर व्यावसायिक रुख के बावजूद , सिनेमा के साथ उनके द्वारा, उनकी टीम द्वारा किए जा रहे प्रयोग बहुत कुछ देखने वाले को दे जाते
 
अजय कुमार झा
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मैं ........एक चिट्ठाचर्चाकार के रूप में ! (झा जी अब नहीं कहिन )

कल अपनी दो लाईनों की पटरियां बिछाने के थोडी देर बाद ही कल्पतरू वाले विवेक भाई की पोस्ट आई , जिसमेंउन्होंने चिट्ठाचर्चाकारों द्वारा अपनी पोस्ट का जिक्र न किए जाने पर अफ़सोस जताया था , और अपना दुख जतायाथा । हालांकि मैं अकेला ही एक ऐसा ब्लोग्गर नहीं हूं जो
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग चोरों के हक में एक आंदोलन

आखिर नए साल में शास्त्री जी ने एक ब्लोग चोर को पकड के, उदघाटन कर ही दिया , वैसे भी जाने कितने दिन बीत गए थे कोई भी चोर पकडे हुए । चलिए अच्छा हुआ जो साल के पहले ही पखवाडे में हमने सफ़लता हासिल कर ली । और जब से उन्हें पकडा गया है तब से अब तक जाने कितनी
 
अजय कुमार झा
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फ़ूंफ़ां ब्लोग्गिंग बनाम गंभीर लेखकिंग

पिछले साल का अंत हिंदी ब्लोग्गिंग में जितना उठापटक वाला रहा था ,उससे ये तो अंदाजा था कि नये साल मेंबहुत कुछ और बहुत सारा होने वाला है, मगर ये गुमान कतई नहीं था कि समुद्र मंथन की तरह ब्लोग्गिंग मंथन भीशुरू हो ही जाएगा । और आजकल तो खूब मजा आ रहा है, जब
 
अजय कुमार झा
टैग: hindi blogging
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एक मुलाकात बाबा रणछोडदास श्यामलदास चांचड से

अब ये मत पूछ बैठना आप कि बाबा रणछोडदास श्यामलदास चांचड , कौन से बाबा हैं । हद है यार इतनी मेहनत से तो तीन बुद्धूओं ने मिलकर ऐसी पिक्चर बनाई है ,जिसके लिए कहा जा रहा है कि उसने सारे रिकार्ड दिए हैं ,(वैसे रिकार्ड के बारे में मुझे ये नहीं समझ आता कि ये
 
अजय कुमार झा
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मेरे शब्द ही मेरी पहचान हैं ............

जब पिछले साल का अंत हो रहा था तो ब्लोग जगत के लिए फ़िर से उसी उथल पुथल का दौर शुरू हो चुका था जो एक बार शुरू होता है फ़िर थमने का नाम नहीं लेता । मगर दिल कह रहा था कि चलो शायद रात गई बात गई की तरह नए साल आने सिर्फ़ तारीख नहीं बदलेगी, बल्कि धीरे धीरे ही सही
 
अजय कुमार झा
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हिंदी की सेवा, विदाऊट ऐनी मेवा.....नो वे जी , नो वे

इस दुनिया में निंदक नियरे राखिए टाईप मेरे दो ही दोस्त हैं, नहीं नहीं ऐसा नहीं है कि दोस्त नहीं हैं, या कि निंदा नहीं करते, बस ये है कि वे सब नियरे नहीं हैं ,,,,,फ़ायरे हैं , अरे यार मतलब फ़ार अवे हैं....बहुत दूर ॥हां तो वो दोनों दोस्त हैं चिट्ठा सिंह और
 
अजय कुमार झा
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ग्राम प्रवास में मिली दो युवतियां और अगले ब्लोगर बैठक की सूचना (ग्राम प्रवास -अंतिम )

ग्राम प्रवास के पूरी रपट के आखिरी और इस भाग में यदि इस दौरान मिली दो नवयुवतियों , जिन्होंने मुझे बहुत प्रभावित किया , का जिक्र नहीं करूं तो ये ये यात्रा रपट अधूरी नहीं तो कम से कम इसका मह्त्व कम जरूर होजाएगा । बिहार जैसे सामाजिक, मानसिक और आर्थिक रूप से
 
अजय कुमार झा