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ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
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05 Jun 2010
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अति सर्वत्र वर्जयेत ...............अजय कुमार झा

जितने समय से भी ब्लोग्गिंग कर रहा हूं , ब्लोग्गिंग की इस अनोखी दुनिया के बहुत सारे रंग रूप और कई तरह के दौर भी देखे और जाने अभी कितने ही देखने बांकी हैं । पिछले दिनों से जो कुछ भी देख पढ रहा हूं , वो कहीं से भी आश्चर्यजनक नहीं है हां दुखद और अफ़सोसजनक
 
अजय कुमार झा
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सच कहा जा रहा है कि ब्लोगजगत को इसकी जरूरत नहीं है ......अजय कुमार झा

भविष्य की एक ब्लोग बैठक का दृश्य सोचा था कि इस पोस्ट में दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक की तीसरी कडीं में उस बैठक की बची हुई बातें , भविष्य में आयोजित की जाने वाली बैठकों की रूपरेखा और इसके लिए एक निश्चित स्थान का चयन जैसी बातों का जिक्र करूंगा ..........मगर जो
 
अजय कुमार झा
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दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक : संगठन और गुटबंदी का फ़र्क समझिए जनाब !

जैसा कि कल की पोस्ट में बता चुका हूं कि बहुत से साथी ब्लोग्गर्स ने ब्लोग्गर्स के किसी भी संगठन को लेकर उपस्थित बहुत से साथी ब्लोग्गर्स ने अपनी बातों को बेबाकी से रखा और ये बात सामने आई कि बिना उद्देश्य के किसी भी संघ का गठन दिशाहीन हो सकता है । ऐसे किसी
 
अजय कुमार झा
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दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक , एक कच्ची पक्की रिपोर्ट और कुछ बातें ब्लोग्गर्स संगठन पर -अजय कुमार झा

दिल्ली ब्लोग्गर्स की एक खासियत तो अब खुल कर सामने आने लगी है कि आपस में मिल बैठ कर बतियाने , और ब्लोगियाने के लिए उन्हें बस किसी बहाने भर की तलाश रहती है , और बाहर से आने वाला किसी ब्लोग्गर से मिलने के बहाने से खूबसूरत और कौन सा बहाना हो सकता है । अब तक
 
अजय कुमार झा
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दिल्ली ब्लोग्गर्स मीट में जिन जिन से पैसे लिए गए थे वे हिसाब ले लें ......

जी हां बिल्कुल ठीक कह रहा हूं जी , अभी अभी इस पोस्ट पर एक कमेंट में किन्हीं मित्र ने बताया कि "झा ने, दिल्ली ब्लोग्गर्स की जो बैठक की थी , उसमें सभी शामिल होने वालों से पैसे भी लिए थे ।सो मेरा तत्काल फ़र्ज़ बनता है कि आप सबको उसका हिसाब दिया जाए । वैसे
 
अजय कुमार झा
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जाईये आप सबसे कुट्टा ..खुद तो 21 कमाए नहीं , हमारे 11 भी गए ...

मैं आज आप सब महिला ब्लोग्गर्स से बहुत ही नाराज़ हूं ..एकदम से कुट्टा करने का मूड बन गया है । एक तो कायदे से आप लोग कभी कोई जलजला आने नहीं देते , खासकर तब तो बिल्कुल भी नहीं जब कोई अपने बंदूक की नल्ली आप महिला ब्रिगेड की तरफ़ घुमा दे । आप लोग सब कुछ छोड के
 
अजय कुमार झा
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एक चिट्ठी मां के नाम ....जिसे अब वो कभी भी न पढ पाएगी

मां पता नहीं आज क्यों मन इतना व्याकुल है , मुझे नहीं पता । आज न तो कोई त्यौहार है न ही कोई दुख या संकट की घडी मुझ पर अचानक आई है , क्योंकि अक्सर इन्हीं दोनों समय पर तुम मुझे बहुत ही याद आती थी , मगर फ़िर भी मैं नहीं जानता कि आज तेरी इतनी याद क्यों आ रही
 
अजय कुमार झा
टैग: मां
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गुर्राते हए आया चिचियाते हुए गया .......... हिंदी ब्लोग्गिंग वर्सेस अंग्रेजी ब्लोग्गिंग

बहुत से प्राणी जीव जंतु आजकल इसी ताक में रहते हैं कि कब हिंदी ब्लोग जगत में कोई उठापटक हो और वे अपनी सारी नोक्सी लगा कर पिल पडें । और जैसे बारिश की बूंदों के पडते ही कई टाईप के बायोलोजिकल और हर्बल से कीटाणु सक्रिय हो जाते हैं वैसे ही यहां भी कुछ कुछ ऐसे
 
अजय कुमार झा
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निश्चित रूप से समीर लाल : और कौन ?

अभी हाल ही में पूछा गया कि बताईये कौन चुनेंगे , लाल कि शुक्ल ? लो अव्वल तो यही पता नहीं कि पूछा किससे गया था , लेकिन अब चूंकि ब्लोगजगत पर पूछे गए हर सवाल को हम जरा निजि रूप से ले लेते हैं , अब यार इस तर्ज़ पर ये मत कह बैठना कि फ़िर ऐसा क्या ब्लोगजगत पर
 
अजय कुमार झा
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निरूपमा ..तुम्हें अपने आप को यूं मरने नहीं देना चाहिए था ...अजय कुमार झा

सोचा था कि इस पोस्ट के बाद अब इस विषय पर नहीं लिखूंगा , मगर कल जब चैट स्थिति पर इस बारे में कुछ तल्खी से लिखा तो कुछ मित्रों को ये बात नागवार गुजरी और उन्होंने मुझे उसे बदलने को कहा मैंने बदला मगर इस बार पहले से भी अधिक तल्ख हो गया , कल से आज तक इसी बहस
 
अजय कुमार झा
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कसाब का फ़ैसला .....फ़ांसी की सजा .....इसमें नया क्या था ??

जैसा कि अपेक्षित ही था कि कसाब के मुकदमें में जो फ़ैसला आना था वही आया यानि फ़ांसी । सच कहा जाए तो ये सबको पता ही था कि कसाब को सिर्फ़ फ़ांसी ही दी जा सकती है जितना संगीन उसका अपराध है , और कानूनन भी उसके लिए यही सजा (यानि देशद्रोह और देश पर आक्रमण जैसे
 
अजय कुमार झा
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निरूपमा , प्रियभांशु ....औनर किलिंग ....लिव इन रिलेशनशिप ...और कुछ बातें यूं ही

चित्र प्रभात झा जी के ब्लोग गप शप का कोना से साभार ऐसा लगता है कि नियति को अब यही मंजूर है कि एक के बाद एक ऐसी कोई न कोई घटना होती रहे जो आम जन को उद्वेलित और आंदोलित करती रहे ।कहां तो कसाब के फ़ैसले पर पूरे देश की निगाहें टंगी हुई थीं और कहां निरूपमा की
 
अजय कुमार झा
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१ मई , शादी की सालगिरह, मजदूर दिवस ....फ़्लैश बैक में कुछ पल

आप शायद ये यकीन करें न करें मगर ये सच है कि जन्मदिन , सालगिरह पर बधाई देने की जब बारी आती है तो अक्सर ही मैं भुलक्कड हो बैठता हूं । और इस बात की गवाही वो बखूबी जानते हैं जो मुझे थोडा बहुत जानते हैं , और ऐसे हादसों (अजी कभी अपनी श्रीमती जा का जन्मदिन भूल
 
अजय कुमार झा
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उत्तर भारत और दक्षिण भारत ........कुछ भी कभी भी .....

आज अचानक एक दोस्त जो बहुत वर्षों पहले सुदूर दक्षिण प्रांत में जाकर बस गया । बस गया से मतलब वहां पहले नौकरी करने पहुंचा फ़िर धीरे धीरे सारी घर गृहस्थी भी जमा ली । मजे से कट रही है , हम दो हमारे दो की तर्ज पर । पिता माता जी रिटायरमेंट के बाद भी पटना में ही
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गिंग के स्वरूप को लेकर मेरी दुविधा

पिछली पोस्ट के समय मन की स्थिति कैसी थी , शायद बताने की जरूरत नहीं है, इसलिए तब जो भी पहली बात मन में आई वो जस की तस सामने रख दी । बिना किसी बात की परवाह किए । पिछली पोस्ट में आई प्रवीण शाह जी की टिप्पणी ,"ब्लॉगिंग एक ऐसा माध्यम है जिसमें हर वो बात
 
अजय कुमार झा
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ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत, से आग्रह कि वे मेरे ब्लोग्स को हटाने पर विचार करें

पिछली पोस्ट में मैंने लिखा था कि एक निश्चित समय के बाद मैं ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत , संकंलकों के संचालकों से आग्रह करूंगा कि , वे सही निर्णय लेते हुए ये फ़ैसला करें कि , हिंदी ब्लोग्गिंग में जो भी गंदगी धर्म , जाति आदि के नाम पर फ़ैलाने की कोशिश की जा रही
 
अजय कुमार झा
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द जजमेंट डे, ...... एक फ़ैसला , ....एक आग्रह , .संकंलकों से ..और चंद बातें .....

पिछले कुछ दिनों से हिंदी ब्लोगजगत में कुछ अजीब तरह का माहौल बनाया जा रहा था । अब ये किस उद्देश्य को लेकर किया जा रहा था क्यों या किनके द्वारा किया जा रहा था और अब भी बदस्तूर जारी है अब उन बातों का जिक्र करने का कोई औचित्य नहीं है , क्योंकि सब कुछ खुली
 
अजय कुमार झा
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अब सिर्फ़ चिट्ठा नहीं , अब चिट्ठी भी...................

आज जाने इस गर्मी में क्या सूझा कि खोल कर बैठ गए अपने एक पुराने संदूक को , बहाना तो था साफ़ सफ़ाई का । उस संदूक पर पडी हुई धूल की पर्त मुझे कई दिनों से चुभ रही थी ,मगर उससे ज्यादा लालच इस बात का था कि रोज के दर्जन भर अखबारों और बहुत सारी पत्र पत्रिकाओं को
 
अजय कुमार झा
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समाज सिर्फ़ महानगरों में ही नहीं है , जरा गांव में भी झांकिए न ......

आखिर किस शहर में है ये खूबसूरती और सकूनजब भी अपने आसपास की खबरों पर नज़र डालता हूं तो देखता और पाता हूं कि हमेशा ही जिस समाज की , उसमें हो रहे बदलावों की , वो अपनाए जा रहे चलनों की बात होती है तो वो सिर्फ़ और सिर्फ़ शहरी समाज तक ही सीमित होकर रह जाती है ।
 
अजय कुमार झा
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एलेक्सा ने मुझे मना कर दिया रैंकिग देने से .......

हम तो जोरदार नंबर लेने के लिए पहुंचे थे समाचार तंत्र बार बार दिखा सुना रहे हैं कि इस साल गर्मी बहुत ज्यादा पडने वाली है पडने क्या वाली है , पड ही रही है । और इसका प्रभाव सिर्फ़ बाहरी जीवन में ही नहीं पड रहा है ..इस बढते हुए तापमान का असर तो इन दिनों हिंदी
 
अजय कुमार झा
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हिंदी ब्लोग्गिंग का संक्रमण काल शुरू हो चुका है ..घटियापन और गलीजपने की पराकाष्ठा देखनी है अभी तो ??

हिंदी ब्लोग्गिंग में आज जो भी हो रहा है , और उसे देख कर जो भी ब्लोग्गर्स अपने दांतों तले उंगली दबा रहे हैं , या दुख और शायद खुशी भी जाहिर कर रहे हैं , उनकी जानकारी के लिए नहीं भी तो नए ब्लोग्गर्स के लिए यहां ये बताना जरूरी हो जाता है कि अभी जिस स्थिति
 
अजय कुमार झा
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बस इतना सा ख्वाब है .....पूरे हो जाएं तो कयामत होगी ..झा जी कहिन ..

कल तो आपने देखा ही था कि कौन मूड में था , एकदम से कंप्यूटर को पजिया के सो गया , बीच झपकी में ही उठ उठ कर टीपते रहे , पढते रहे ..ओह नहीं नहीं ..पढते रहे ..फ़िर टीपते रहे .............मगर फ़िर ।ज्यादा की इच्छा नहीं है , कभी रही भी नहीं । और होती भी तो कौन
 
अजय कुमार झा
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ओह आज तो यही मूड है जी ......

छुट्टी के बाद अक्सर जो पहला दिन होता है कार्यालय में वो बहुत ही थकान देने वाला रहता है खासकर सोमवार तो अवश्य ही । ऐसा लगता है कि शुरूआत में छक्का मारने की नीयत जैसे सप्ताह के पहले दिन ही सप्ताह भर के काम निपटाने की जुगत में लगे हों । और ऐसी स्थिति में
 
अजय कुमार झा
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सरकारी योजनाओं से कह दो अपने बारे में गरीबों को खुद बताया करें ...

अभी पिछले वर्ष ही गांव गया था तो बहुत कुछ नया और सुखद देखने को मिला जिसमें से एक थी सोलर लाईट से युक्त खंबे । शाम होते ही उनकी दूधिया रौशनी गांव की स्वाभाविक शीतलता में घुल कर गजब की ठंडक दे रहे थे आंखों को । गांव में बिजली के खंबे तो शायद मेरे पैदा होने
 
अजय कुमार झा
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कोई संस्थान बताईये जहां बूट पौलिश करने , बाल काटने, स्कूटर ठीक करने, और कपडे सीने का डिप्लोमा दिया जाता हो !!!!!!

आज अदालत में एक मुकदमे के दौरान दुर्घटना पीडित एक व्यक्ति की गवाही के दौरान उससे पूछा गया कि वो काम क्या करता है । सबसे पहले ये बता दूं कि जब दुर्घटना के लिए कोई पीडित व्यक्ति मुआवजा दावा डालता है तो उसे ये भी बताना होता है कि वो क्या काम करता था , ताकि
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गिंग हो न हो मगर शायद ब्लोग्गर्स के फ़ेमस होने का समय आ रहा है

बस एक बार ये हुआ तो हो गए फ़ेमस कल कार्यालय में एक मित्र जो एसीपी हैं अचानक आ पहुंचे । बातचीत के दौरान मुझे पता चला कि आजकल उनकी पोस्टिंग सायबर सेल में हो गई है । जब बात आगे बढी तो बताने  लगे कि चूंकि भारत में अभी सायबर कानून की शुरूआत है इसलिए सभी
 
अजय कुमार झा
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लिव इन रिलेशनशिप :एक अलग दृष्टिकोण (भाग दो )

इस मुद्दे पर बहुत सी बातें मैं अपनी पिछली पोस्ट में रख चुका हूं , मगर चूंकि इस विषय का दायरा इतना वृहत है कि शायद अभी इस पर और भी बहुत कुछ कहने लायक बच गया है । ये मत व्यक्त किया जा रहा है लिव इन रिलेशनशिप विवाह के विकल्प के रूप में या शायद कि विवाह जैसी
 
अजय कुमार झा
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लिव इन रिलेशनशिप : फ़ैसले पर एक दृष्टिकोण

यूं तो अभी इस मुद्दे पर लंबित मुकदमें में न्यायालय का अंतिम फ़ैसला नहीं आया है , और जाने किन किन आधारों पर मीडिया में इस मुद्दे को लेकर तमाम तरह की खबरें , रिपोर्टिंग और सर्वेक्षण तक दिखाए समझाए जा रहे हैं । इस फ़ैसले को लेकर बहस, और फ़ैसले के बाद की
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गर्स ने घोषित की अपनी वसीयत (भाग एक )

हम तो चुपचाप सभी ब्लोग्गर्स का एक ठो सीज़नल वसीयत तैयार कर रहे थे ऊ भी एक दम फ़्री में , मगर सब ठो पोल भाई महेन्द्र मिश्रा जी हमारा बज स्टेटस देख के खोल दिए , लेकिन हम भी ढीठ हैं जब बना दिए तो बिना पोस्टियाए थोडी छोडेंगे ।आज अचानक ही ख्याल आया कि कुछ समय
 
अजय कुमार झा
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कुछ ब्लोग्गर्स और ब्लोगस को आपस में बतियाते देखा गया

कल इस ब्लोगजगत में प्रेत की तरह विचरते हुए (जी हां अब तो ये हाल हो गया है कि ब्लोग्गिंग के आसपास न भी हों तो आत्मा ..प्रेतात्मा बनके यहीं मंडराती रहती हैं ) और ऐसे में ही घूमते घूमते बहुत से ब्लोग्गर्स मित्रों को देखा कि वे अपने ही ब्लोग से बतिया रहे थे
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गिंग से जुडी ट्यूशन क्लास ....पीरियड टू है जी

पिछली पोस्ट को हमने जाने कौन से मूड में लिख दिया था , सोचा तो ये था कि नए मित्र ब्लोग्गर्स को ऐसी जानकारियों की समय समय पर उपलब्ध करानी चाहिए ...मगर आप सबने उसे झाजी की ब्लोग क्लास ही बना दिया ....तो फ़ुल टाईम स्कूल चलाने के लिए तो न हमको परमीशन मिलेगा और
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग्गिंग के लिए कही चंद पुरानी बातों को फ़िर दुहराया जाए ......

यूं तो इनमें से कोई भी बात ऐसी नहीं है जिसे पहले नहीं कहा गया हो और सभी ने कभी न कभी इसे अपने अपने अंदाज़ में कहा भी है मगर जाने क्यों जब देखता हूं कि इस ब्लोग शहर में हर रोज़ कई घरौंदे बस रहे हैं नए नए , नए नए कस्बे , नए नए मुहल्ले बस रहे हैं तो फ़िर उन
 
अजय कुमार झा
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बधाई दीजीए ....ये इस ब्लोग की पांच सौंवी पोस्ट है ....मगर वाह नहीं कहिएगा

ये इस ब्लोग की पांच सौवीं पोस्ट है , या शायद उससे एक ज्यादा ...है न बधाई देने की बात ....मगर नहीं वाह मत कहिएगा ......आज मन वाह नहीं आह कहने को कर रहा है .............आह ....!!!!!!!!!!!मैं भीष्म नहीं ,मैं अजर नहीं ,मारो , मर जाऊंगा ,मैं कभी भी अमर नहीं
 
अजय कुमार झा
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तो फ़िर हो जाने दो ब्लोग्गिंग को उन्मुक्त और निरंकुश ...

पिछ्ले कुछ दिनों बहुत से मुद्दों और तथाकथित विमर्शों पर जिस तरह की खींचतान , परोक्ष प्रत्यक्ष आरोप प्रत्यारोप , आक्रोश, खिन्नता , और भी जितने विशेषण होते होंगे सभी एक साथ देखने पढने को मिले । और जैसा कि अपेक्षित ही था कि एक बार फ़िर से धुरियां बनी या शायद
 
अजय कुमार झा
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ब्लॉग दुर्बुद्धि जमात का कूड़ा-कचरा है...

जी हां ये उदगार होली से ठीक पहले नई दुनिया दिल्ली के संपादक श्री आलोक मेहता जी ने अपने एक आलेख में लिखे थे । हालांकि इसे उन्होंने बुरा न मानो होली है के बुलेट प्रूफ़ आवरण ओढा कर लिखा था । और बेशक किसी को लगा हो न हो मगर मुझे यदि बुरा न कहूं तो अच्छा भी
 
अजय कुमार झा
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चलिए महिला दिवस मनाने की तैयारी करें .......कहीं देर हो गई तो ?....

अब तो जिस तरह से इन दिवसों पर उन संबंधित मुद्दों को मनाने /दिखाने और जताने की जितनी मजबूरी है उतनी ही मजबूरी साल भर उन मुद्दों को भुलाए रहने की रहती है । अब जबकि महिला दिवस आ ही गया है और उस दिन यानि आठ मार्च को सभी इस मुद्दे पर गंभीर /अगंभीर आलेख लिख कर
 
अजय कुमार झा
Mar 05 2010 08:10 PM
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अमां आलोक मेहता जी ...बाशिंदे नई दुनिया के ...मगर सोच वही दकियानूसी . यार इत्ता अपने ब्लोग पर लिखा होता तो ..........

हाल ही में होली में रंग गुलाल की गोली बम बारूद सभी बरसाने में लगे हुए थे । ऐसा लग रहा था कि जैसे हर किसीको ..हर किसी को बधाई देनी है ..सभी दे भी रहे थे ..मुझे तो लग रहा था कि पोस्टें हुलस हुलस के एक दूसरे से गलेमिल रही हैं और कह रही हैं ....अजी हमें पता
 
अजय कुमार झा
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भांग, मालपुआ, और होलियाते हम .....अमा कभी तो बुरा मानो

जब से इस बेकार से शहर में आकर बस जाने टाईप की मजबूरी हो गई तभी से सारे त्यौहारों के मायने ही बदल गए हैं ,न मुई ये होली रंगीन लगती है न ही दिवाली की चमक बरकरार है । कहने को तो सब कुछ हो ही रहा होगा मगर हम का करें कि ई ससुर दिल जो बिहारी रह गया है । ऊपर से
 
अजय कुमार झा
Feb 28 2010 07:30 PM
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गुटबाजी, संगठन , घेटो ... सही समय पर एक गलत पोस्ट !

ओह कहते हैं न कि कुछ भी सोचा हुआ नहीं होता है तब तो बिल्कुल भी नहीं जब आप चाहें कि वैसा ही हो , अब देखिए न सोचा था फ़गुनाहट में कुछ ऐसी धूम मचाएंगे कि ब्लोगजगत में इंद्रधनुषी छटा बिखर जाएगी , जिनको वो भी न नज़र आई उन्हें भांग का लोटा गटका देंगे ..बांकी सब
 
अजय कुमार झा
Feb 26 2010 05:48 PM
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तो आप ही बताईये कि आखिर ब्लोग्गिंग है क्या ???

लगभग ढाई साल होने को आए इस मुंए ब्लोग्गिंग के अंतरजाल में फ़ंसे हुए । जब शुरू शुरू में आए थे तो सच कहें तो कुछ भी नहीं सोचा था ...अजी सोचते क्या खाक ..जब पता ही नहीं था कि ये ब्लोग्गिंग आखिर है क्या बला ? बस ब्लोग बना जैसे तैसे घुस लिए , कुछ दिनों बाद
 
अजय कुमार झा
टैग: hindi blogging
Feb 22 2010 09:13 PM