आज फ़ुट्बाल के बाद्शाह यानि ब्राजील का मेच है नोर्थ कोरिया के संग, देखना चाहे तो यहां देख सकते है, आज सही मै अभी तक लिंक मिल नही रहा, अगर यह ना चला तो मै दोबारा सही लिंक जरुर डाल दुंगा.... तो देखिये आज का मेच दोनो टीमे एक से बढ कर एक....
नमस्कार आप सब को अगर आप जर्मन ओर अस्ट्रेलिया का मेच लाईव देखना चाहे तो यहां देख सकते है. ओर जर्मनी के लिये अपनी शुभकामनाये दे, मेरी टिप्प २-० से हम जीतेगे... भारतीया समय १२,०० शुरु होगा यह मेच.केमेंट्री जर्मनी मै ही होगी
गलती ओर गलती मै फ़र्क..... अगर नाई करे गलती ..........तो जी यह है नया स्टाईल .अगर ड्राईवर करे गलती ........तो जी यह है नया रास्ता .अगर इंजिनियर करे गलती ........तो जी यह है नया माडलअगर मां बाप करे गलती.......तो जी यह है नयी पीढी.अगर नेता गण करे गलती
जी ऎसे विग्यापन करीब करीब हर देश मै,हर नगर मै देखने को मिलते है, या कई बार सेल मै लिखा होता है पुराना दो नया लो, या एक खरीदो दुसरा मुफ़त मै.. आप का टी वी खराब हो रहा है, या पुराना हो गया है, या आप का फ़्रिज,वाश मशीन या कुछ भी ऎसा समान जो आप बदलना चाहते है,
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...इत्शे डंके! धन्यवाद!अनुराग जी Danke, दांके कहते है धन्यवाद को, जर्मन मै D को दा बोलते है.******** *******************दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...सुंदर गांव है। अभी घूम रहे हैं। आप ने हमारी बहुत दिनों की
रेखा श्रीवास्तव said...राज जी, गाँव का नाम तो बता दीजिये, लगता नईं है की ये हमारे ही देश का गाँव है. आपने तो बस गाँव के बाहर चक्कर लगवा दिया अन्दर वालों से भी मिलवानाथा. 25 May 2010 11:24 AMरेखा जी हमारे गांव का नाम इसन(Isen) है, जिस की आबादी करीब ५ हजार
कल हम ने यही पर यह कडी छोडी थी, अभी हम यहां के कब्रिस्थान मै ही है, यह गांग के दुसरी ओर के कुछ घर है यह मुर्तियां एक पुरी दिवार जितनी है, शायद जब किसी को दफ़नाने आते हो तो यहां सब मिल कर कोई पुजा वगेरा करते होंगे, वेसे जब यह लोग किसी को दफ़नाने आते है तो
घर से निकल कर सब से पहले यह चित्र लिया, सामने एक बीयर वार है, थोडा आगे एक पिजरिया, एक सडक दाये मुड गई ओर एक बिल्कुल सामने.... आज सच मे बाते कम ओर चित्र ज्यादा, वेसे आज चित्र बहुत ही ज्यादा है इस लिये आधे चित्र आज ओर आधे चित्र कल की पोस्ट मै आप अगर मेरे
यह साथ वाला चित्र किसान के घर का है जो दुर से लिया है, लिजिये आज बाते कम होंगी ओर आप को अब ले चलते है एक किसान के यहां, जहां से हम ताजा दुध भी खरीदते है, जब हम दुध लेने जाते है अगर किसान वहां हो तो तो हमे दुध नाप कर दे देता है, ओर हम उसे उतने पेसे दे
हमारे गांव का नाम है ईसन (Markt Isen ) जो बबेरिया का एक छोटा सा गांव है, यहां बहुत से किसान भी है, ओर एक एक किसान के पास सॊ दो सॊ गाये होती है, ओर उस के पास जमीन हजारो एकड होती है, ओर खेती के सारे काम मशीनो से ही होते है, खेतो मै रासायनिक खादे कम ओर गोबर
आज हमारे यहां करीब छ महिनो बाद इतना सुंदर मोसम हुआ, ओर आज गर्मी भी करीब +२६c के करीब थी, सोचा चलो एक लम्बा सा चक्कर मार कर आये,पहले हम ने एक तरबुज खाया, ओर फ़िर इस लम्बे चक्कर के लिये घर से निकले, पेदल ही, चलिये आप भी चले हमारे संग हम आप को अपना गांव भी
पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न की शिकायत लेकर भारत आने वाले हिंदुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.लेकिन सुक़ून की तलाश में अपना घर छोड़कर आए इन लोगों की मुश्किलें यहां भी कम नहीं हो पा रही हैं.ताज़ा मिसाल राजस्थान के सरहदी ज़िले गंगानगर की है जहां
भाई सच कह रहा हुं कि हम अपने देश मै फ़ेले भ्रष्टाचार को जड से खत्म कर सकते है, ओर फ़िर यही देश हमे स्वर्ग से भी अच्छा लगेगा, लेकिन उस से पहले जो कीटांणू भ्रष्टाचार के, जो खुदगर्जी के,अपने मतलब के, हमारा काम बन जाये जेसे तेसे के हमारे अंदर मोजूद है सब से
यह बात है दो तीन साल पहले की, मेरा घर अलग सा है यानि पडोसी के जाना हो तो सडक पार करनी पडती है, ओर नीचे एक ओफ़िस है, जहां समान बेचा जाता है, ओर गल्ले मै खुब पेसे होते थे, मेरा ओफ़िस पहले वही होता था, फ़िर मैने बदला तो अब मेरा ओफ़िस मेरे घर से ५० मीटर दुर है,
आज बहुत समय बाद चिंतन ले कर आया हुं, आशा करता हुं आप सब को पसंद आयेगा...हम सब इसी समाज से जुडे है, हम सब मै बहुत सी अच्छाईयां भी है ओर बुराईयां भी, लेकिन अगर हम इन दोनो के फ़र्क को समझ जाये तो कितना अच्छा हो... हम जब बुराई करते है बुरी बाते करते है तो हमे
आप सब रोजाना सोते है, तो भाई हम भी आप की तरह से रोजाना ही सोते है, लेकिन जब कल सोये तो भगवान ने दर्शन दिये, बोले बच्चा मांग क्या मागंता है, मेने कहां भगवान अपून की कोई इच्छा नही, बस सब कुछ आप की मेहरबानी से चल रहा है, इस से ज्यादा इच्छा नही, वर्ना सुना
नमस्कार आप सभी को, युरोप मै पिछले शुक्र बार से हबाई सेवा बंद करनी पडी, जिस के कारण करोडो लोगो को बहुत सी कठिनाईयो का सामना करना पड रहा है, मै जर्मनी के मुनिख शहर के पास रहता हुं, अगर आप के जान पहचान मै , कोई रिश्ते दार, परिवार का आदमी, कोई परिवार, मित्र,
अरे पता नही यह मेरे साथ ही होता है क्या? मै जब भी कोई सीडी, डी वी डी अपने लेपटाप मे डालता हुं, चलती नही, दस बार डालने के बाद चलती है, बच्चो ने भी ट्राई किया नही चली, तो मेने कम्पनी को फ़ोन किया, उन्होने मुझे सारे कागज पत्र मेल से भेज दिये, ओर दुसरे
अरे अभी मेरी छूट्टियां खत्म नही हुयी.... बस समय मिला तो एक अच्छा सा चुटकला लिख दिया..... किसी को ठेस नही पहुचाना चाहता.... इसे एक चुटकले ही समझे ओर किसी प्रकार की धार्मिक टिपण्णी ने देवे, जिस से किसी को दुख पहुचे.........एक बार एक पठान ने एक
अभी लेपटाप कोई लेने नही आया, शायद कल परसॊ आ जाये, या घर पर ही ठीक कर जाये, पता नही, तब तक मै यहां आप सब के साथ ही हुं...एक दुखद सुचना..... आज हमारी १० साल की एक चिडियां चल बसी, जो शायद मेरा इंतजार ही कर रही थी, सुबह सब ठीक थी, दोपहर बाद चीं चीं
भईया हम कुछ दिनो के लिये आप से दुर नही जा रहे, बाल्कि हमारा लेपटाप जा रहा है, मेने जब से नया लेपटाप लिया है इस से मै संतुषत नही हो पा रहा, जबकि बच्चे कहते है पापा विडियो सेवन बहुत अच्छा है, ओर इस मै कई बार सीडी डाली लेकिन चली नही, तो बच्चो ने कहा कि यह
बात आज से ६,७ साल पुरानी है, हम घर से कही दुर घुमने गये थे, ओर हमारे संग एक मित्र ओर उन का परिवार भी था, यानि उन की पत्नी ओर दो बच्चे, मित्र का नाम इस लिये नही लिख रहा, क्योकि यहां जर्मनी मै रहने वाले मेरे मित्र लोग इस लेख को पढ कर फ़िर उस से मजाक ना
(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते और
(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर(Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झुट्ठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें)अच्छा!!! वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है? मगर सुन - दोस्ती में - इतना तो सहना ही पड़ता है तय है
यह लेख मुझे मुंबई से श्री मान आनंद जी. शर्मा जी ने इ मेल से भेजा है, पढने मै अच्छा लगा तो उन की इज्जत से आप सब के लिये भी यहां प्रकाशित कर रहा हूं , इस के साथ कुछ कविताये है जो क्र्मश प्रकाशित करुंगा, अगर सभी समाग्री एक साथ पेश कर दी तो
मुझे एक मेल मिला था, जो अग्रेजी मै था, था तो बहुत अच्छा लेकिन मेरी अपनी भाषा मै नही था, सो मेने उसे मिटा दिया, हटा दिया, लेकिन उस मै कुछ बहुत सुंदर सुंदर चित्र जो मन को मोह रहे थे, मेने कापी कर लिये, ओर उन चित्रो को आप के संग बांट रहा हुं, आप मे से किसी
बर्फ़ ही बर्फ़..... जेसा की एक बार दिनेशराय द्विवेदी, पं.डी.के.शर्मा"वत्स" अन्य कई ब्लांगर मित्रो ने कई टिपण्णियो मै कहा कि हम ने आज तक बर्फ़ गिरती हुयी नही देखी, तो मेने वादा किया था कि जब भी अगली बार बर्फ़ पडी तो मै विडियो फ़िल्म बना कर आप को गिरती
इस चुटकले को सिर्फ़ हंसी ओर मजाक के तॊर पर ले, अगर किसी को पढने के बाद कॊई ऎतराज हो तो अपने लेपटाप पर, या अपने पीसी पर सारा गुस्सा उतारे, कृप्या मेरी टांग ना खींचे, ओर इसे पढ तो कोई भी सकता है, लेकिन इसे अशील करार मत दे, क्योकि यह अशील जो
कल मेने एक पोस्ट डाली थी,मदद के लिये, जिस मै हमे बहुत उपयोगी सलाह मिली, उस परिवार को भी बहुत हिम्मत मिली, मेने यह सारी की सारी पोस्ट ओर कामेंट उन्हे पढवाये, क्योकि यहां तो सब को पता नही इस लिये उलटा सीधा ही बोल रहे थे, लेकिन आप सब की सलाह से उन के सभी
जेसा कि मेने पिछली पोस्ट मै लिखा था कि हमारे एक मित्र विनोद कुमार जी का स्वर्ग बास २/७/१० को रात को ११,३० पर हुआ, कल ८/३ को यहां सोम बार को उन्हे अग्नि दे दी गई, ओर चोथे के दिन सब ने मिल कर यहां एक स्थान पर प्राथना भी की,मुश्किल अब हम सब पर यह आ
कल रात एक भारतिया मित्र चल बसे, काफ़ी दिनो से बहुत सख्त बिमार चल रहे थे, ओर हस्पताल मे भरती थे, दो बच्चे है एक लडका १८ साल का ओर बच्ची अपने भाई से छोटी है, यह काफ़ी समय से शुगर के मरीज थे, फ़िर ज्यादा तबीयत खराब होने पर हस्पताल गये,सात आठ दिनो बाद होश मै
होली की आप को ओर आप के परिवार को बहुत बहुत बधाई, सब खुब खेले होली ओर सही ओर पबित्रता बनी रहे होली की इस तरह से खेले, ओर होली के रंगो मै नफ़रत ओर दुशमी के रंग भी फ़ीके पड जाये, होली कुछ ऎसी हो इस
नमस्कार आप सभी को, आज ७ फ़रवरी का दिन है मुझे आज पुरे सात दिन हो गये भारत आये, बस एक दिन को छोड कर बाकी सभी दिन मेने सपनो की दुनिया मै बिताये , बहुत ही अच्छे अच्छॆ दोस्त मिले, कोई हम उम्र तो कोई मेरे बच्चो की उम्र का तो कॊई मेरे से बडा लेकिन सब से बहुत
आज ६ फ़रवरी की सुबह है, ओर मै हमेशा की तरह बहुत जल्द ऊठ गया, देखा तो भाभी बाहर कपडे सुखने के लिये डाल रही थी, ओर दोस्त सुबह अपनी दिन चर्या पर घुमने चला गया था, बच्चे अभी सो रहे थे, ओर नाना जी भगति मै लगे थे, मेने भाभी को नम्स्ते कही ओर सीधा बाथ रुम मै
आज जब दिल्ली पहुचां तो मै सीधा दोस्त के घर पर चला गया, वहां दोपहर का खाना खाया, ओर खुब डट कर खाया, होटलो का खाना खा खा कर दिल भर गया था, लेकिन फ़िर भी थोडी भुख रख ली, तभी मुझे रंजन जी का फ़ोन आया ( पलटू यानि हमारे आदि के घर से) उन्होने मुझे डिनर पर
नमस्कार आप सभी को, तीसरे दिन जब मै अकेला पढ गया तो मन बहुत उदास हो गया, सुबह नाश्ता भी नही किया, ओर दोपहर को भी खाना नही खाया कारण एक तो दिनेश जी मेरे पास नही थे, दुसरा अकेले को खाना वेसे भी अच्छा नही लगता , ओर तीसरा अब तक होटल का खाना खा खा कर दिल भर
नमस्कार, चलिये आप सभी को भारत ले चले, आज शाम को यानि ३१/१ को मेरे बेटे मुझे चार बजे के करीब मुनिख ऎयर पोर्ट पर छोडने आये, फ़िर सब ने उदास मन से विदाई ली, ओर कुछ समय बाद मै ब्रिटिश एयर वेज से लंदन की तरफ़ उड चला. करीब दो घंटो मे हम वहां पहुच
नमस्कार . सलाम आप सब को,मै ८/२ यानि सोमवार को शाम को अपने घर वापिस पहुच गया, फ़िर घर पर सब से पहले पिटारा खोला, कोन कोन सा समान लाया हुं, बेर, अमरुद, पान ओर फ़िर चटपटी चीजे,लेकिन मिठाई के डिब्बे लंडन मै मेरे हेंड बेग से निकाल् कर फ़ेंक दिये गये, क्यो कि दुध