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Grey Rainbow / स्याह इंद्रधनुष

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30 May 2010
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हाट – The Sunday Market

सुबह से ले के शाम तक, जूतों से ले के गेहूं- दाल तक, सब खरीदते-बेचते हैं ठाठ में भीड़ भरी इतवार की हाट में । वहां चने भी हैं और खिलौने लकड़ी के, मई मे जहां लगते हैं ठेले ककडी़ के, सिक रहीं हैं मूंगफलीयां चटर-चटर बिक रहे किलो के भाव से मटर। लाल पीली बंधी
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
Dec 29 2009 11:49 AM
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ज़िन्दगी पर दो

पहली—— (जोगिन्दर साहब, आप से आज हुई बातों से प्रेरित । आपके आगरे के घर की दीवारों पर उभर आई पपड़ीयों को समर्पित) दबे पैर निकली जा रही हो, तुम तेज़ रफ़्तार से चलकर मेरे कदमों के नीचे से चुपचाप – ज़िन्दगी । ज़रा रुको तो, दम तो लो, अभी बचपन
 
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टैग: poetry
Dec 29 2009 11:49 AM
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एक अच्छी लघु कथा

एसे ही इन्टर्नेट पर घूमते घूमते एक अच्छी सी लघु कथा पढ़ने को मिलि, आप का ध्यान भी आकर्षित करना चाहूंगा : (This is meant for you even if you have been redirected here from my tweet) पश्चाताप Posted in Uncategorized Tagged: अनुशंसा, समीक्षा, Recommenda
 
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Burning Ganga

गंगा तुम क्यों जलती हो, क्या उन पापों से जो धोए तुमने ? या देख कर उन पापों को जो होने को तैयार दिलों में ? Posted in कविता, Photographs, voice Tagged: गंगा, PodCast, voice
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
टैग: Podcast
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निशा प्रिया – २

तुमसे दूर यहाँ भी साँझ ढलती है, रात के किनारे पर अब टहलती है । उसके आँचल में बँधा तुमसे दूरी का अहसास, बढ़ता जाता है, छोड़ती वह गहरे प्रश्वास । रात्रि में मिल जाने को तत्पर शाम, खुद पर ओढ़ती हुई धीरे से रंग श्याम, मेरे चारों ओर रात्रि का करती आलिंगन, उ
 
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Dec 29 2009 11:49 AM
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कल तस्वीर में मैं रहूँ, न रहूँ ।

मेरी पीठ पीछे, शाम तुम ढली जाती हो, मैं जानता हूँ कि तुम चली जाती हो, फ़िसलते-लुढ़कते इस सूरज के साथ, सामने से घिरी आ रही है रात । मगर रात भी तो मेहमान है बस रात भर की ही, चली जाएगी, जैसे जीवन में आते-जाते हैं सुख-दु:ख, जन्म मृत्यु, यौवन-बुढ़ापा,
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
टैग: kavita
Sep 01 2009 01:10 AM
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कमीने (फ़िल्म नहीं, मेरी कविता)

मैं भी भूल गया वो बात, तुम भी भूले ही होगे अपने आप से किए हुए ऐसे वादे, अपना जीवन समर्पित कर देने के । समर्पण, विपन्न बीलकों का जीवन संवार देने में स्वयं का, या आश्रय देने का निराश्रित कई बडे़-बूढों को कहीं पर । वादे, जो किये थे हमने अपने आप से हर
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
टैग: podcast
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ओ नंगे !!!

ओ नंगे ! हां तुम…… तुम नंगे, अरे! फिर भी पढ़े जा रहे हो तुम अभद्र नहीं मानोगे क्या तुम ? तो सुनो तुम मनुष्य निर्वस्त्र ! तुम नग्न हो क्योंकि निर्लज्ज, कह तो दिया, निर्लज्ज हो तुम, मनुष्यों का अनादर करने में दम्भी, आनन्द पाते हो तुम । रखो हृदय
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
टैग: podcast
Aug 23 2009 01:05 PM
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-माँ-पा

कल अपने ब्लॉग पर लिखि कविता का लिंक भेजा था आपको, आपने जवाब में ये भेजा : प्यारे बेटे, हमने देखा, हमने सुना, हमने पढा ……. समझें कैसे अपने बेटे को ! !
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
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Every night when I touch you my child

Every night when I feel you with my hand, In your mother’s womb when you flick and bend, I touch her belly where I can feel you move, I can feel you; can you feel me too ? My little one I await you to come, to take you in arms – my good-luck
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
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Aug 18 2009 11:05 AM