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साहित्‍य - संस्‍कृति ईटीसी

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19 Mar 2010
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अब कहां आएगा वो....

दिल्ली से प्रकाशित एक प्रमुख हिंदी दैनिक के नियमित स्तंभ---रंग ए जिंदगानी---में गुरुवार को प्रकाशित वजीर आगा की यह रचना मुझे अच्छी लगी, शायद आपको भी भाए। धूप के साथ गया, साथ निभाने वालाअब कहां आएगा वो, लौट के आने वाला।रेत पर छोड़ गया, नक्श हजारों
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ख्वाब खुशबू के घर में रहते हैं

दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक के गुरुवार के अंक में ---रंग-ए-जिंदगानी---कॉलम के तहत प्रसिद्ध शायर शीन काफ निजाम साहब की कुछ पंक्तियां प्रकाशित की गई हैं। आशा है आपको भी भाएंगी। लीजिए....गौर फरमाइए-----वो कहां चश्मे-तर में रहते हैं,ख्वाब खुशबू के घर में
Mar 06 2010 01:05 AM
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एक तिनका है बहुत तेरे लिए

दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक हिंदुस्तान के सेंट्रल पेज पर प्रतिदिन किसी खास कवि की किसी अथॅपूणॅ रचना से कुछ पंक्तियां छपती हैं। अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने इन पंक्तियों में बहुत ही साधारण लहजे में काफी महत्वपूणॅ बातें कह दी हैं। आप भी आनंद लीजिए -
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जागो श्रोता जागो-दो

विश्व उपभोक्ता दिवस की पूर्व संध्या पर जयपुर के बिड़ला सभागार में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन को डॉ. कुंअर बेचैन ने नई ऊंचाइयां बख्शीं : हालांकि ये पंक्तियां पहले भी सुनी होंगी आपने, फिर भी प्रस्तुत हैं- ये सोच के मैं उम्र की ऊंचाइयां चढ़ा, शायद यहा
Dec 29 2009 11:54 AM
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जागो श्रोता जागो-एक

विश्व उपभोक्ता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राजस्थान के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग ने बिड़ला सभागार में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें कई कवियों ने सार्थक संदेश देने का सफल प्रयास किया। तो बिना किसी भूमिका के
Dec 29 2009 11:54 AM
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मिले बस इतना ही...

जन्म दिवस पर संजीव मिश्र को श्रद्धांजलि बहुमुखी प्रतिभा के धनी संजीव मिश्र पिछले वर्ष 28 जनवरी को हम सबको असमय अलविदा कह गए। पेशे से पत्रकार संजीव मिश्र ने कहानियां, व्यंग्य, समीक्षा, अनुवाद, गीत-गजल, कविता, फीचर लेखन सभी विधाओं में अपनी उपस्थिति जता
Dec 29 2009 11:54 AM
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बी पॉजिटिव, बी एवरयंग

आनंद ही है देव आनंद के चिरयौवन का रहस्य जैसा कि मैंने पहले बताया था कि इन दिनों गुलाबी नगरी में साहित्य का महाकुंभ-विरासत साहित्य उत्सव-आयोजित किया जा रहा है। देशभर से विभिन्न भाषाओं के लेखक इसमें शिरकत कर रहे हैं। इनके साथ विदेशी विद्वान और नामी-गिर
Dec 29 2009 11:54 AM
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साहित्यकारों का मेला गुलाबी नगर में

दो संस्थाओं की ओऱ से जयपुर में इन दिनों साहित्य का महाकुंभ आयोजित किया जा रहा है। 20 जनवरी की शाम उज्जैन (मध्यप्रदेश) के लोकगायक प्रहलाद सिंह तिपनिया और उनके साथियों ने कबीर के दोहों और साखियों के गायन से इस कायॅक्रम का शुभारंभ किया, जबकि 21 जनवरी की
Dec 29 2009 11:54 AM
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रांगेय राघव को सादर श्रद्धांजलि

गुरुवार को प्रसिद्ध साहित्यकार रांगेय राघव की जयंती थी। विरले ही ऐसे सपूत हुए हैं जिन्होंने विधाता की ओर से कम उम्र मिलने के बावजूद इस विश्व को इतना कुछ अवदान दे दिया कि आज भी अच्छे-अच्छे लिक्खार दांतों तले अंगुलियां दबाने को विवश हो जाते हैं। जी हां
Dec 29 2009 11:54 AM
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प्रज्ञाचक्षुओं ने बहाई काव्य सरिता

हर शहर की अपनी फितरत होती है, गुलाबी नगर की भी है। मकर संक्रांति यूं तो पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन जयपुर में इन दिनों पतंगबाजी का सुरूर सा छाया रहता है। पूरा आसमान पतंगों से अट जाता है। मकर संक्रांति के दिन घरों में रहता है सन्नाटा और छतें हो ज
Dec 29 2009 11:54 AM
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नये वषॅ के स्वागत में गीत गुनगुनाइए

नवागत नववषॅ 2008 का एक सप्ताह बीत चुका है, नववषॅ की बधाई के एसएमएस और फोन आने का सिलसिला तो थम गया है, पर गाहे-बेगाहे ग्रीटिंग काडॅ और इक्के-दुक्के पत्रों का आना अभी भी जारी है। इस माह आ रही पत्रिकाएं भी नववषॅ के स्वागत में कविता पाठ कर रही हैं, गीत
Dec 29 2009 11:54 AM
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इसलिए-खेत-ने मार लिया मैदान

इसलिए-खेत-ने मार लिया मैदान किन कारणों से किसान को धरतीपुत्र कहा जाता है। माटी से मोह किसे कहते हैं। धरती छिनने पर नंदीग्राम में संग्राम के बीज कहां छिपे होते हैं, सब कुछ छूट जाने के बाद भी आदमी अपना ठीया-ठौर क्यों नहीं छोड़ना चाहता है, सवॅसंपन्न बेट
Dec 29 2009 11:54 AM
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ताराप्रकाश जोशी और रत्न कुमार सांभरिया को राजस्थान पत्रिका सृजनात्मक अवाडॅ

राजस्थान के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका की ओर से प्रतिवषॅ साहित्य के क्षेत्र में सृजनात्मक लेखन के लिए दिए जाने पुरस्कारों के तहत वषॅ २००७ का सवॅश्रेष्ठ कविता का पुरस्कार जयपुर के वरिष्ठ अथ च प्रख्यात कवि व गीतकार ताराप्रकाश जोशी और
Dec 29 2009 11:54 AM
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साहित्य-संस्कृति-कला की त्रिवेणी में स्वागत है आपका

इस अपार संसार सागर में साहित्य की महिमा निराली है। इस सागर में कुछ ऐसे मोती हैं, जिनकी आभा से साहित्य जगत आलोकित होता है और हम-आप सरीखे साहित्यप्रेमी आनंदित। इन मोतियों को किसी प्रचार-प्रसार की तमन्ना नहीं होती है मगर फूल की खुशबू को हवा बिना किसी एप
Dec 29 2009 11:54 AM
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सियासत नफरतों का जख्म भरने ही नहीं देती

मशहूर शायर मुनव्वर राना ने अपनी रचनाओं में बहुत ही सरल शब्दों में जीवन के सत्य को उद्घाटित करने का स्तुत्य प्रयास किया है। दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक में बुधवार १६ दिसंबर को प्रकाशित उनकी इस रचना का आनंद लीजिए - बहुत पानी बरसता है तो मि
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...इक तेरे कहने से क्या मैं बेवफा हो जाऊंगा

मशहूर शायर वसीम बरेलवी को कई कवि सम्मेलनों और मुशायरों में सुनने का सुअवसर मिला है। तरन्नुम में उन्हें सुनना दिलो-दिमाग में ताजगी भर देता है। दिल्ली से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक के स्थायी स्तंभ -रंग ए जिंदगानी- में मंगलवार को प्रकाशित उनकी ये पंक्तियां
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...कोई आएगा दिल को आस रहे

मशहूर शायर बशीर बद्र ने अपनी गजलों में जिंदगी के अनेक रंग दिखाए हैं। दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक के कॉलम -रंग ए जिंदगानी- में गुरुवार को प्रकाशित यह गजल पेश है। आप भी इसका लुत्फ उठाइए खुश रहे या बहुत उदास रहे, जिंदगी तेरे आसपास र
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...चांद ने कितनी देर लगा दी आने में

प्रख्यात गीतकार गुलजार ने हिंदी फिल्मी दुनिया के साथ साहित्य जगत को भी गुलजार किया है। नई दिल्ली से प्रकाशित एक प्रमुख हिंदी दैनिक के स्तंभ-रंग-ए-जिंदगानी- में सोमवार को प्रकाशित गुलजार की रचना का आप भी लुत्फ उठाएं..... खुशबू जैसे लोग मिले अफसाने में
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...हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएंगे

दुष्यंत कुमार की गजलें बहुत कुछ सोचने को विवश करती हैं। नई दिल्ली से प्रकाशित एक राष्ट्रीय दैनिक में शुक्रवार को प्रकाशित उनकी गजल मुझे तो काफी अच्छी लगी, शायद आपको भी भाए। डालिए एक नजर...... मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएंगे, इस बूढ़े पीपल की
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34वां काका हाथरसी पुरस्कार सुरेन्द्र दुबे को

हास्य और व्यंग्य के क्षेत्र में विशिष्ट रचनात्मक योगदान के लिए सन् 2008 का काका हाथरसी पुरस्कार राजस्थान के अन्तर्राष्ट्रीय याति प्राप्त हास्य कवि व्यंग्यकार सुरेन्द्र दुबे को गिरिराज धाम, गोवर्धन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया। काका
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फलसफा जिंदगी का

लंबे समय बाद एक बार फिर अपने इस ब्लॉग में प्राणवायु डालने का प्रयास कर रहा हूं। शनिवार को दिल्ली से प्रकाशित एक दैनिक अखबार में प्रकाशित निदा फाजली की ये पंक्तियां दिल को छू गईं। आप भी पढ़कर देखिए, शायद अच्छी लगें - घर की तामीर चाहे जैसी हो इसमें रोन