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लोक मित्र

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25 Apr 2010
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मायावती

15-16 मार्च 2010 को उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती ने अपने विरोधियों तथा मनुवादी समाज को दिल भर के चिढ़ाया। 15 मार्च को माया को (बकौल कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के प्रभारी द्विगविचय सिंह के) दस मीटर लंबी हजार रुपये के नोटों की माला पहनाई गई थी। एक
 
वेद प्रकाश
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डॉ. धर्मवीर की 'प्रेमचंद- सामंत का मुंशी'

डॉ. धर्मवीर की पुस्तक ‘प्रेमचंद: सामंत का मुंशी’ उनकी ‘मातृसत्ता, पितृसत्ता और जारसत्ता’ पर पुस्तक शृंखला की तीसरी पुस्तक है. पुस्तक का नाम देखकर ऐसा लगता है कि इसमें शायद प्रेमचंद के कथा साहित्य की एक नई दृष्टि से व्याख्या होगी. परंतु ऐसा है नहीं. इस
 
वेद प्रकाश
Feb 16 2010 11:02 PM
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अंबेडकरवादी कहानी की भूमिका

‘संभवतः वर्तमान हिंदू मार्क्सवाद के घोर विरोधी हैं. इसके पीछे कारण यह है कि मार्क्स के वर्ग-संघर्ष के सिद्धांत से वे बहुत ही भयभीत हो जाते हैं. लेकिन वही लोग यह भूल जाते हैं कि भारत न केवल वर्ग-संघर्ष, बल्कि वर्ग युद्ध की भूमि भी बन चुका है.’ —डॉ.
 
वेद प्रकाश
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संस्कृत का गुणगान -- राष्ट्रवाद या ब्राह्मणवाद

इस देश के अधिकतर पढ़े-लिखे लोग भारत की महानता की कुँजी संस्कृत को मानते हैं. औरों की तो बात ही क्या एस.जी. सरदेसाई जैसे बड़े मार्क्सवादी भी इस बात की सिफारिश करते हैं कि यदि इस देश में क्रांति करनी है तो संस्कृत को सीखना होगा. प्रखर मार्क्सवादी आलोचक
 
वेद प्रकाश
Dec 29 2009 12:00 PM
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कुमारेंद्र पारसनाथ सिंह के काव्य संग्रह ‘बोलो मोहन गाँजू’ का लोकार्पण

अच्युतानंद मिश्र गत 5 अगस्त को साहित्य अकादमी के सभागार में वरिष्ठ क्रांतिकारी कवि स्वर्गीय कुमारेंद्र पारसनाथ सिंह के चौथे संग्रह ‘बोलो मोहन गाँजू’ का विमोचन कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि-कथाकार-आलोचक विष्णुचंद्र शर्मा ने की. उन्ह
 
वेद प्रकाश
Dec 29 2009 12:00 PM
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विमोचन

एक दलित लेखक की पुस्तक का विमोचन था. महान आलोचक विमोचन के लिए मौजूद थे. प्रकाशक महोदय ने उनका परिचय कराते हुए कहा-- 'आज हमारे बीच सदी के सबसे बड़े आलोचक विद्यमान हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी है. स्त्रियों और दलितों के योगदान का विशेष उल
 
वेद प्रकाश
Dec 29 2009 12:00 PM
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दलित पुनर्जागरण के सवाल

आज देश संक्रमण के दौर से गुज़र रहा है जिसमें जहाँ अर्ध-सामंती/अर्ध-बुर्जुआ/अर्ध-उपनिवेशवादी अर्थव्यवस्था पूरी तरह उपनिवेशवादी अर्थ-व्यवस्था में बदलती जा रही है, जिससे पूँजीवादी और समाजवादी ताकतों के अंतर्विरोध और तीखे हुए हैं तो वहीं सामंती समाज-व्यव
 
वेद प्रकाश
Dec 29 2009 12:00 PM
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सूचना प्रौद्योगिकी और हिंदी समाज

हमारी सदी सूचना क्रांति की सदी है. आज पूरी दुनिया में सूचना प्रौद्योगिकी का डंका बज रहा है. ‘वसुधैव कुटुम्बकं’ का आदर्श और कहीं चरितार्थ होता हो या नहीं, कम से कम सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया में तो चरितार्थ होता ही है. मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरने
 
वेद प्रकाश
Dec 29 2009 12:00 PM
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ठेठ हिंदी का ठाठ

आज एक नकली हिंदी सब तरफ छायी हुई है. कारण कि जिसे देखो वह अंग्रेजी की बैसाखी के बिना सोचना ही नहीं चाहता. नतीजा यह कि वाक्य विन्यास हो या कहने का सलीका, सब पर अंग्रेज़ी की छाया है. जिससे हिंदी की पठनीयता बुरी तरह प्रभावित होती है. मसिजीवी
 
वेद प्रकाश
Dec 29 2009 12:00 PM