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04 Apr 2010
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बचपन की एक खोई कविता का दोबारा मिलना और इससे उठे कुछ सवाल

बचपन की किसी कविता का खो जाना कितना मानीख़ेज़ हो सकता है ये तब समझ आया था। आज ठीक से याद तो नहीं आ रहा है...पर शायद 'नागपंचमी' आई थी पिछले साल यानी साल 2009 की। और ज़ेहन में कौंध गई थी मध्‍यप्रदेश के स्‍कूलों में 'बालभारती' में पढ़ाई जाने वाली कविता
 
yunus
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मातृ दिवस पर मुनव्‍वर राणा के चंद शेर ।।

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक मां है जो कभी ख़फ़ा नहीं होती ।।   इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है मां बहुत गुस्‍से में होती है तो रो देती है ।।   मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू मां ने मुद्दतों नहीं धोया दुपट्टा अपना ।।
 
yunus
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बाल पत्रिका चंदामामा से जुडी हैं बचपन की यादें: साठ बरस पूरे कर चुकी है चंदामामा

कई दिनों से इस मुद्दे पर लिखना चाह रहा था । मेरी प्रिय पत्रिका 'चंदामामा' ने इस वर्ष साठ साल पूरे कर लिये । पता नहीं देश भर के अख़बारों ने इस समाचार को कितना सुर्खियों में छापा । पर मेरे लिए ये बहुत खुशी की बात है । इस एक ख़बर ने मुझे बचपन में बहुत द
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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मल्‍टीप्‍लेक्‍स: कुछ दिलचस्‍प शब्‍‍द चित्र ।

शनिवार को मुंबई के एक मल्‍टीप्‍लेक्‍स में एक ताज़ा फिल्‍म देखी । बातें तो फिल्‍म की करनी थीं । लेकिन सिनेमाहॉल में कुछ दिलचस्‍प घटनाओं पर नज़र पड़ी । प्रस्‍तुत हैं सिनेमाहॉल के कुछ दृश्‍यों के शब्‍
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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इस बार नहीं मनाएंगे हम जश्‍न नये साल के आगमन का । इस बार खोजेंगे हम मुट्ठी भर जीवित संवेदनाएं

इस बार नहीं मनाएंगे हम जश्‍न नए साल के आगमन का इस बार चुनेंगे हम अपने जल चुके घरों की राख से अंगारे और घोल लेंगे इन्‍हें अपनी शिराओं में....रक्‍त में ।   इस बार सहेज कर रखेंगे हम अपने-अपने हिस्‍से का उजाला और बांट लेंगे इसे दूसरों के हिस्‍सों के
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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एक कल्‍चरल मिक्‍स है लोकल-स्‍टेशन का बुकस्टॉल । कुछ तस्‍वीरें-कुछ बातें ।

मुंबई एक साथ कई स्‍तरों पर जीने वाला शहर है । ये ना केवल एक cuultural mix है, एक melting pot है बल्कि आपाधापी और कोलाहल से भरी एक भयावह भगदड़ भी है । ऐसे ही किसी दिन पिछले सप्‍ताह हम 'कहीं' से 'कहीं' पहुंचने के लिए लोकल-ट्रेन के प्‍लेटफॉर्म पर ट्रेन
 
yunus
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अजमेर यात्रा की तस्‍वीरें-दूसरा भाग । सूफी परंपरा का इतिहास और ख्‍वाजा ग़रीब नवाज़ की कहानी ।

जैसा कि पिछली पोस्‍ट में अर्ज़ किया था कि अचानक अप्रत्‍याशित रूप से हम अजमेर हो आए । चूंकि आग्रह है इसलिए इस बार तफ़सील से सूफ़ी मत और ख्‍वाजा मोईनुद्दीन चिश्‍ती के बारे में बताने की 'कोशिश' की जा रही है । दक्षिण-एशिया में सूफ़ी परंपरा की चार शाखाएं
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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अजमेर यात्रा की तस्‍वीरें: पहला भाग ।।

इस हफ्ते हम अचानक बेहद अप्रत्‍याशित ढंग से अजमेर चले गए । हुआ यूं कि सब चीज़ें सही होती चली गईं और आने-जाने की सारी 'जुगाड़' इतनी आसानी से हो गई कि हमें लगा--ऐसा था तो पहले ही चले जाते । ख़ैर । अप्रत्‍याशित यात्रा की हड़बड़ी के तहत हम पहले से तैयार '
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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रज़्ज़ाक मियां 'रिकॉर्ड वाले' 'किताब-महल' डॉ. डी.एन.रोड फोर्ट मुंबई 400 001

किसी वजह से दो तीन दिन पहले जब चर्चगेट के इलाक़े में जाना पड़ा तो मन नहीं माना कि यूं ही लौट जाएं । दरअसल बरसों-बरस विविध-भारती के स्‍टूडियोज़ इसी इलाक़े में रहे हैं और बरसों-बरस हमने चर्चगेट और फोर्ट के इलाक़ों में मटरगश्‍ती की है । इस इलाक़े में पै
 
yunus
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ये किस शहर में हम आ निकले

दिन तो बीत जाता है दफ्तरों में । पर कटती नहीं रातें । जी नहीं ये प्‍यार-व्‍यार का चक्‍कर नहीं है । रूमानियत की कच्‍ची सड़क पर मत जाईये । थोड़ा गंभीर हो जाईये और सुनिए । मुंबई की ये रातें जश्‍न की रातें हैं । समंदर किनारे का ये शहर सितंबर से लेकर दिसं
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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बच्‍चों की आउटडोर गतिविधियों के लिए करनी पड़ी एक कार्टून चैनल को पहल ।

क्‍या आपने ध्‍यान दिया है कि हमारे घरों के बच्‍चों को टेलीविजन का नशा होता जा रहा है । ख़ासकर कार्टून चैनलों का । उस पर सिफत ये है कि बच्‍चों की शैत‍ानियों से छुटकारा पाने के लिए जनम-घुट्टी की तरह मां-बाप बच्‍चों को कार्टून-चैनलों के हवाले कर देते है
 
yunus
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अभिनव बिंद्रा ने जीता भारत के लिए पहला स्‍वर्ण पदक

ये हैं अभिनव बिंद्रा । ओलंपिक में व्‍यक्तिगत प्रतियोगिताओं में भारत के पहले स्‍वर्ण पदक विजेता । अभिनव के बारे में बताना ज़रूरी है । पर पहले मैं ये कहना चाहता हूं कि अभिनव की उपलब्धि को देश अपनी उपलब्धि बताकर इतरा ज़रूर ले । खेल मंत्रालय इसे अपनी काम
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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उर्दू के नामचीन मज़ाहिया शायर साग़र ख़ैयामी नहीं रहे । आईये उनकी आवाज़ सुनें ।

मुझे लगता है कि या तो मैं बेख़बर रहा या फिर मीडिया ने ख़बर तरीक़े से नहीं पहुंचाई । अभी कुछ सप्‍ताह पहले उर्दू के नामचीन शायर साग़र ख़ैयामी के बारे में तफ्तीश कर रहा था इंटरनेट पर । तो इस साईट पर पहुंचा और मिली वो अफ़सोसनाक ख़बर । साग़र खैयामी का उन्
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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'कीप-अलाइव' ने जिंदा रखा है पुराने गानों के शौक़ को

दो-तीन दिन पहले मुझे सुरेश भाई के आमंत्रण पर पुराने गानों के एक कार्यक्रम में जाने का मौक़ा मिला । एक तो मुंबई महानगर । ऊपर से गुरूवार का व्‍यस्‍ततम दिन । दफ्तर के बाद ठीक आठ बजे आयोजन-स्‍थल पर पहुंचना था । ट्रैफिक से जूझते हुए जब भाईदास हॉल पहुंचा त
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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टी बैग के सौ साल और मुंबई की चाय के अलग अलग स्‍वाद

जी हां टी-बैग का इस्‍तेमाल होते हुए सौ बरस पूरे हो गये । दिलचस्‍प बात ये हे कि ग़लती से हुआ था इसका आविष्‍कार । न्‍यूयॉर्क में थॉमस सुलिवान कॉफी बेचते थे, बढ़ती हुई क़ीमतों से परेशान थॉमस ने कॉफी की बजाय चाय बेचनी शुरू कर दी । जब उनके ग्राहकों को अचा
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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मुस्लिमों को नहीं मिलता किराए का घर ।।

इन दिनों मेरा छोटा भाई मुंबई आया हुआ है । उसे मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया है । तमाम शहरों में भटकने के बाद आखिरकार जब मुंबई शहर मिल ही गया तो घर बसाने की तैयारियां हैं । और घर 'बसाना' है तो 'घर ढूंढना' होगा । आपने वो गाना तो सुना ही होगा जो भीमसेन की
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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किसी कार्टूनिस्‍ट से दोस्‍ती का नतीजा 'ये' होता है ।

निर्मिष ठाकर अचानक मेरे मित्र बन गये हैं । जी हां । एक हफ्ते पहले तक परिचय तक नहीं था । लेकिन घटनाओं का क्रम देखेंगे तो पायेंगे कि सब कुछ अचानक हो गया । हुआ यूं कि पिछले दिनों विविध भारती पर प्रख्‍यात कवि एकांत श्रीवास्‍तव से बातचीत प्रसारित हुई । नि
 
yunus
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वो पलाश के, कॉमिक्‍स के, तिलस्‍म के....गर्मियों के दिन ।

पता नहीं क्‍यों मुझे गर्मियों का ये मौसम बहुत पुराने दिनों की याद दिला देता है । पिछले कई दिनों से मन बचपन की उस दुनिया में घूम रहा है जहां गर्मियां बड़ी तिलस्‍मी हुआ करती थीं । अपना बचपन यूं तो कोई बहुत क्रांतिकारी नहीं रहा, जिसमें आवारा
 
yunus
Dec 29 2009 11:51 AM
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'गणपति-विसर्जन' : तस्‍वीरें और बातें ।

मैं मुंबई के जिस हिस्‍से में रहता हूं उसे गोराई रोड कहते हैं । इस इलाक़े का अंत गोराई खाड़ी पर होता है । चूंकि ये खाड़ी है इसलिए ज़ाहिर है कि 'गणपति-विसर्जन' का ये एक अच्‍छा ठिकाना है । और कई वर्षों से यहां 'गणपति-विसर्जन' होता आ रहा है । अभी दो दिन पहले
 
yunus
Aug 31 2009 02:01 PM
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उफ़ परसाई हाय परसाई ।

जबलपुर से हिमांशु दादा ( हिमांशु रॉय ) का मेल आया है । उन्‍होंने सूचित किया है कि बाईस अगस्‍त को यानी आज के दिन जबलपुर इप्‍टा 'विवेचना' द्वारा परसाई जी का जन्‍मदिन मनाया जा रहा है । ये ऐसे मौक़े होते हैं जब जबलपुर विकलता से याद आता है । जब मैं जबलपुर में
 
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बंबई पहुंचे अफलातून बनारसी: ब्‍लॉगर-मिलन

तारीख तो याद नहीं है पर मई के आखिरी सप्‍ताह में किसी दिन मोबाइल-फोन की घंटी बजी तो नंबर वसई की ओर का नज़र आया । उधर से आवाज़ आई--'जी मैं अफलातून बोल रहा हूं ।' ज़ाहिर है कि अफ़लातून जी मुंबई आए चुके थे और इससे पहले उन्‍होंने बाक़ायदा 'मेल' पर सभी को
 
yunus
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कुछ तस्‍वीरें: कुछ बातें--बंबई में गांव के अचार जैसा टिंग-टैंग दिन ।।

गले में कुनैन की तरह ठुंसा हुआ एक दिन । धीरे-धीरे अपना कड़वापन घोलता हुआ । इलाहाबाद के रास्‍ते पर लेट हो चुकी ट्रेन जैसा भटका-अटका-सा दिन । एक धीमी सज़ा बन चुका दिन । जुलाई के बंबईया मौसम-सा गरम-नरम और नम दिन । वर्षों के बक्‍सों में अंटे, घुटे-घुटे,
 
yunus
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आभा की तहरी ।

बोधिसत्‍व और आभा हमारे लगभग-पड़ोसी ही हैं । लगभग पड़ोसी का मतलब ये है कि ये लोग इसी इमारत या इसी कॉलोनी में नहीं रहते । लेकिन हमारे घरों की दूरी लगभग पांच मिनिट है । लेकिन मुंबई शहर का कुछ मिज़ाज ऐसा है कि मुलाक़ातें यदा-कदा ही होती हैं । पर जब भी हो
 
yunus
Jan 16 2009 07:24 AM
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slumdog और white tiger के बहाने कुछ सवाल

की फिल्‍म ‘Slumdog Millionaire’ को चार Gloden Globe अवॉर्ड क्‍या मिले, देश में एक झूठे-गौरव की लहर दौड़ गई है । ऐसा माना जा रहा है कि ये पुरस्‍कार भारतीय फिल्‍म जगत में कोई नई लहर पैदा कर देंगे । कयास लगाए जा रहे हैं कि अब ऑस्‍कर भी दूर नहीं है । पर
 
yunus
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क्‍यों फीके पड़ गए दीपावली विशेषांक

दीपावली आते ही मुझे याद आते हैं अख़बारों के दीपावली विशेषांक, जो हमारे बचपन और कैशौर्य का अनिवार्य हिस्‍सा हुआ करते थे । मुंबई आने के बाद इन विशेषांकों से नाता टूट ही गया । फिर ये भी देखा कि अब इन विशेषांकों की चमक एकदम फीकी पड़ गई है ।   मध्‍यप
 
yunus
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राजू भाई, छुट्टन और घर के बेदखल बूढ़े ।

मुंबई का उपनगर बोरीवली ( पश्चिम) । और यहां का एक व्‍यस्‍त-सा चौराहा । डॉन बॉस्‍को स्‍कूल और चर्च यहां के प्रमुख लैन्‍डमार्क हैं, ये वो रास्‍ता है जो पश्चिमी उपनगरों की बहुत मुख्‍य-सड़क न्‍यू लिंक रोड पर है । कल अचानक वहां से गुज़रते हुए एक अनदेखे-से
 
yunus