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मीडिया डाक्टर

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16 Jun 2010
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आखिर हम लोग नमक क्यों कम नहीं कर पाते ?

यह तो शत-प्रतिशत सच ही है कि नमक का ज़्यादा इस्तेमाल करने से ब्लड-प्रेशर होता ही है---वही चोली दामन वाला साथ, कितनी बार हम लोग इस के बारे में बतिया चुके हैं। लेकिन फिर भी जब मैं अपने आस पास देखता हूं तो पाता हूं कि लोग इस के बारे में बिल्कुल भी सीरियस
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इंटरनेट लेखन के दांव-पेच...पाठ संख्या 5.

मेरे विचार में एक दिन के चार पाठ ठीक हैं ---इतनी थ्यूरी ठीक है-- अब ज़रा प्रैक्टीकल के लिये लैब का रूख करते हैं। हां, तो अब मैं आप से अपनी सब से मनपसंद साइट के बारे में दो बातें करना चाहूंगा। मुझे BBC news की साइट बेहद पसंद है--- यह रहा इस का होम-पेज।
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इंटरनेट लेखन के दांव-पेच..... पाठ संख्या 4

क्यों दूं मैं लिंक अपने लेख में? मेहनत करूं मैं और इस का फल चखें बाकी सब? मुझ से यह ना होगा कि मैं सब को बताता फिरू कि अपने लेख के आइडिया मुझे आते कहां से हैं? क्या ज़रूरत है सारे जग को बताने की इतनी बढ़िया जानकारी आखिर नेट पर पड़ी कहां है ? --- अजीब सी
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इंटरनेट लेखन के दांव-पेच--पाठ संख्या 3.

हां तो अपनी चर्चा चल रही थी कि इंटरनेट पर लिखे लेख का शीर्षक कैसा होना चाहिए ? बिल्कुल दुरूस्त टिप्पणीयां आईं कि शीर्षक ऐसा तो हो कि पाठक को आकर्षक लगे। तो आइये इसी बात को थोड़ा सा विस्तार से देखते हैं .. वैसे यहां पर मैं जिन बिंदुओं को रेखांकित करूंगा
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इंटरनेट लेखन के दांव-पेच...पाठ संख्या 2.

आज मैं सोच कर हंस रहा हूं कि जब मैंने शूरू शूरू में नेट पर लिखना शुरू किया तो मेरे हैल्थ-टिप्स वाले ब्लॉंग पर कुछ इस तरह के शीर्षक मैंने अपनी पोस्टों को दिये ---- क्या आप जूस पीने जा रहे हैं ? गन्ने का रस तो आप भी पीते ही होंगे? राजू अजीब सी मुसीबत में
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इंटरनेट लेखन के दांव-पेच

मुझे पता था कि आप शीर्षक देख कर यही कहने वाले हैं कि क्या यार, जुम्मा जुम्मा दो रोज़ हुये नहीं नेट पर लिखते हुये और तू हम धुरंधरों को बतायेगा ये दांव-पेच की नेट पर कैसे लिखना होगा। लेकिन बात तो सुनिये ---हमें हर एक की बात सुन तो लेनी ही चाहिये --मानना ना
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डा महेश सिन्हा की पोस्ट---ब्रेन हैमरेज के रोगी की पहचान...

अभी अभी ब्लागवाणी देख रहा था तो डा महेश सिन्हा की एक बहुत उपयोगी पोस्ट दिख गई ---मस्तिष्क आघात के मरीज़ को कैसे पहचानें? मस्तिष्क आघात --जी वही, जिसे कईं बार ब्रेन-स्ट्रोक भी कह दिया जाता है अथवा आम भाषा में दिमाग की नस फटना या ब्रेन-हैमरेज भी कह देते
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अमेरिकी टीनएजर्स का सैक्सुअल बिहेवियर- एक रिपोर्ट

अमेरिका की एक सरकारी संस्था है --सैंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल-- इस ने कल ही वहां के टीनएजर्स के सैक्सुअल बिहेवियर के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है ---CDC Report Looks at Trends in Teen Sexual Behaviour; Attitudes toward Pregnancy. इस रिपोर्ट के मुताबिक कुछ
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तो क्या अब मधुमेह से बचने के लिये भी दवाईयां लेनी होंगी?

एक बार तो यह रिपोर्ट देख कर मेरा भी दिमाग घूम गया कि अब नौबत यहां तक आ पहुंची है कि मधुमेह जैसे रोग से बचने के लिये भी दवाईयों का सहारा लेना होगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्री-डॉयबीटिज़ को मधुमेह तक न पहुंचने में दवाईयां सहायता कर सकती हैं।
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मूंगफली मुक्त अमेरिकी उड़ाने ?

courtesy: cnn.comअमेरिका में कुछ लोगों को मूंगफली से एलर्जी है इसलिये वहां पर एयरलाइन कंपनियां अपनी उड़ानों को मूंगफली मुक्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। आप स्वयं भी cnn यह रिपोर्ट पढ़ सकते हैं --US considers banning peanuts on planes.यह मानना
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दुर्बलता(?) का शिकार पुरूषों की सेहत से खिलवाड़

आज मैं एक रिपोर्ट देख रहा था जिस में इस बात का खुलासा किया गया था कि इंपोटैंस (दुर्बलता, नपुंसकता) के लिये लोग डाक्टर से बात करने की बजाए अपने आप ही नैट से इस तकलीफ़ को दुरूस्त करने के लिये दवाईयां खरीदने लगते हैं। और नेट पर इस तरह से खरीदी दवाईयों की
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अवसाद (डिप्रेशन) के लिये ली जाने वाली टैबलेट क्या संजीवनी है ?

अकसर मैं सोचता हूं कि यह कैसे संभव है कि डिप्रेशन के लिये ली जाने वाली गोली संजीवनी बूटी जैसा काम कर देगी और मूड को लिफ्ट करा देगी। वैसे तो मैं कहने को एलोपैथी से ही संबंधित हूं लेकिन पता नहीं क्यों कुछ तकलीफ़ों के लिये मुझे सीधा दवाईयों का रूख करना कभी
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बड़ी आंत की सफाई वाला बिजनैस ?

एक वेबसाइट है जिस पर प्रिंटमीडिया एवं इलैक्ट्रोनिक मीडिया पर चल रही सेहत संबंधी समाचारों की खिंचाई भी होती और जो बिल्कुल सुथरा और बिना किसी लाग-लपेट के सेहत के बारे में बढ़िया संदेश देते हैं उन की प्रशंसा भी की जाती है --इस साइट का नाम है
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दाल-रोटी खाओ......प्रभु के गुण गाओ

आज कल लोग देशी टॉनिकों की बात नहीं करते--वे उन टॉनिकों की बात करते हैं जिन की मार्केटिंग में ये कंपनियां हाथ धो कर पीछे पड़ी हुई हैं। और पता नहीं लोग इन कंपनियों की बात सुनते भी हैं, हम सारा दिन दाल-रोटी-सब्जी खाने की बात करते हैं और हमारे बच्चे भी हमारी
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तंबाकू दिवस पर तंबाकू को पैरों तले रोंदा नहीं?

आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस है और मैं कुछ बातें दिल से करना चाहता हूं। मुझे व्यस्कों को बीड़ी-सिगरेट-तंबाकू का इस्तेमाल करते हुये देख कर कुछ दुःख होता है लेकिन ऐसे छोटे छोटे बच्चों को देख कर तो बहुत ही दुःख होता है जिन के मां-बाप तंबाकू का किसी भी रूप में
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छाती की जलन के लिये ली जाने वाली दवाई बढ़ा देती है फ्रैक्चर रिस्क

आज की आधुनिकता की अंधी दौड़ की एक देन तो है कि हर दूसरा आदमी छाती की जलन से परेशान है और इस के लिये बहुत बार बिना किसी डाक्टरी नुस्खे के ही अपने आप ही पेट में एसि़ड कम करने वाली दवाईयां लेना शुरू कर देते हैं। और इस तरह की दवाईयों की हाई डोज़ अथवा सामान्य
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हार्ट-अटैक के बाद संभोग से इतना खौफ़ज़दा क्यों ?

हार्ट-अटैक के इलाज के बाद जब मरीज़ को हस्पताल से छुट्टी मिलती है तो डाक्टर लोग उससे उस की सैक्स लाइफ के बारे में कुछ भी चर्चा नहीं करते। ना तो मरीज़ ही खुल कर इस तरह की बात पूछने की "हिम्मत" ही जुटा पाते हैं... और इसी चक्कर में होता यह है कि हार्ट-अटैक
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चलिये ज़रा देखते हैं हमारे गुर्दे कैसे काम करते हैं ?

इस वीडियों में आप देख सकते हैं कि हमारे गुर्दे काम कैसे करते हैं --- मैंने हिंदी भाषा का सहारा लेकर इसे थोड़ा आसान सा करना चाहा है। यूरिनरी ट्रैक्ट में हमारे गुर्दे, यूरेटर्ज़, ब्लैडर एवं यूरैथरा शामिल हैं। हरेक गुर्दे में मूत्र बाहरी कोरटैक्स से अंदरूनी
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विवाह-शादियों में शिरकत तो करें लेकिन आखिर खाएं क्या?

कल ऐसे ही हम कुछ दोस्त लोग बैठे हुये थे तो चर्चा चली कि आखिर क्यों किसी विवाह-शादी या पार्टी-वार्टी में खाकर तबीयत क्यों बिगड़ सी जाती है, हम लोग ऐसे ही मज़ाक कर रहे थे कि पहले तो हम डाक्टर लोग ही कह दिया करते थे कि इन पार्टियों आदि में तो बस थोड़ा
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एशियाई समलैंगिकों एवं द्विलिंगियों(bisexual) में एचआईव्ही इंफैक्शन के चौका देने वाले आंकड़े

एशियाई समलैंगिकों एवं द्विलिंगियों में बैंकाक में एचआईव्ही का प्रिवेलैंस 30.8 प्रतिशत है जब कि थाईलैंड में यह दर 1.4 प्रतिशत है। यैंगॉन के यह दर 29.3 फीसदी है जब कि सारे मयंमार में यह दर 0.7 प्रतिशत है। मुंबई के समलैंगिकों एवं द्विलिंगियों में यह इस
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हार्ट चैक-अप के लिये पीटा जा रहा है ढिंढोरा

आज जब मैं सुबह कहीं जा रहा था तो मैंने सुना कि एक रिक्शे पर एक सज्जन यह घोषणा कर रहा था कि फलां फलां दिन उस बड़े हस्पताल (कारपोरेट हस्पताल) से एक बहुत बड़ा हार्ट का स्पैशलिस्ट आ रहा है जो मरीज़ों के हार्ट की फ्री जांच करेगा। इस तरह के इश्तिहार/ पैम्फलेट
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मैडीकल न्यूज़ - आप के लिये

कुछ मीठा हो जाए ---टीका लगवाने से पहले टीका लगवाने से पहले मीठा खा लेने से दर्द कम होता है और एक महीने से एक वर्ष तक की उम्र के बच्चों के लिये डाक्टरों एवं नर्सों को सिफारिश की गई है कि इन्हें टीका लगाने से पहले ग्लूकोज़ अथवा शुकरोज़ के पानी के घोल की
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तंबाकू प्रोडक्ट्स पर कैसी हो चेतावनी ? ---ज़रा देखिये

बिल्कुल सीधी सी बात है कि वह चेतावनी कैसी जिसे देख कर, पढ़ कर भी आदमी पनवाड़ी से सिगरेट-बीड़ी-गुटखे का पैकेट मांगे--- चेतावनी तो वही सही चेतावनी है कि बंदे का हिला के रख दे--- एक बार तो किसी को भी हिला के रख दे कि यार, कहीं तंबाकू के सेवन से मेरे साथ भी
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बैनाड्रिल क्रीम खा लेने से हो गई आफ़त

समझ में नहीं आता कि बैनाड्रिल क्रीम को कैसे कोई खा सकता है --- लेकिन कुछ लोगों ने इस तरह की हरकत की होगी या गलती से उन से हो गई होगी जैसा कि इस रिपोर्ट में कहा गया है तभी तो अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने जनता को आगाह किया है कि खारिश-खुजली के
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तो क्या सच में भूसी इतने काम की चीज़ है ?

शायद अगर आप भी मेरे साथ इस वक्त अपने बचपन के दिन याद करेंगे तो याद आ ही जायेगा कि सुबह सुबह गायें गली-मौहल्लों में घूमते आ जाया करती थी और घरों की महिलायें रोज़ाना उन के आगे एक बर्तन कर दिया करती थीं जिन में दो-एक बासी रोटी और बहुत सी भूसी(चोकर, Bran)
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सच में यह इंसान बहुत बड़े गुर्दे वाला है ..

पिछले कुछ दिनों में ऐसे तीन केस मेरी नज़र में आये जिन में बस पहली बार ही पेट में दर्द हुआ --दर्द ज़्यादा था, अल्ट्रासाउंड करवाया गया तो पता चला कि दो केसों में गुर्दे में पत्थरी है और एक केस में किसी दूसरी तरह की रूकावट (stricture) है। एक केस तो लगभग बीस
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इतने ज़्यादा लोग दस्त रोग से परेशान क्यों हैं?

ज़्यादातर चिकित्सालयों के वार्ड आज कल उल्टी-दस्तरोग-मलेरिया आदि से परेशान रोगियों से भरे पड़े हैं। दस्त रोग की गलत इलाज से जितनी चांदी ये झोलाछाप डाक्टर कूट रहे हैं शायद ही किसी ने इतनी लूट मचाई हो, इन का धंधा ही लोगों की गरीबी, अज्ञानता एवं मजबूरी पर
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ख़त के पत्ते (khat leaves) चबाना भी पड़ सकता है महंगा

1981 का जून का महीना मुझे अच्छी तरह से याद है, उस समय मुझे पीलिया हुआ था----तब हमें कोई पता नहीं था कि यह अकसर हैपेटाइटिस (लिवर की सूजन) की वजह से होता है और इस के कईं कारण हो सकते हैं --जैसे कि हैपेटाइटिस ए, बी, सी, अथवा ई। टैस्ट करवाना तो दूर, किसी
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अब डेटिंग से पहले ब्लड-ग्रुप करवाने का क्या नया लफड़ा है ?

ब्लड-ग्रुप की बात हो तो ध्यान आता है कि लोग इसे तब करवाते हैं जब कभी उन की कोई सर्जरी होनी हो अथवा उन्हें रक्त चढ़ाने की ज़रूरत पड़ती है (blood transfusion) ...और हां, कईं बार बच्चों का स्कूल हैल्थ-कार्ड भरने से पहले भी कुछ लोग ब्लड-ग्रुप की जांच करवा
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बेमौसमी महंगे फल और सब्जियां ----आखिर क्यों?

आज कल बाज़ार में बे-मौसमी महंगी सब्जियों एवं फलों की भरमार है। लेकिन पता नहीं क्यों इन का स्वाद ठीक सा नहीं लगता। अकसर देखता हूं, सुनता भी हूं कि लोगों में यह एक धारणा सी है कि सब्जियां-फल चाहे बेमौसमी हैं, लेकिन अगर मंहगे भाव में मिल भी रही हैं तो वे
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मलेरिया की पुष्टि के बिना मलेरिया का उपचार ?

बिना टैस्ट करवाए ही मलेरिया की दवाईयां ले लेना आज अजीब सा लगता है। और टैस्ट करवाने के बाद अगर मलेरिया की रिपोर्ट नैगेटिव है तो भी अकसर ये दवाईयां दे दी जाती हैं, ले ली जाती हैं। पिछले दशकों में भी ऐसा होता रहा है कि जब भी कंपकंपी से बुखार होता तो उसे
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बीमारी एक ----बीसियों इलाज, बीसियों सुझाव

वैसे जब किसी को कोई शारीरिक तकलीफ़ हो जाती है तो बीमारी से हालत पतली होने के साथ साथ उस की एवं उस के परिवार की यह सोच कर हालत और भी दयानीय हो जाती है कि अब इस का इलाज किस पद्धति से करवाएं, या थोड़ा इंतज़ार ही कर लें। चलिये, एक उदाहरण लेते हैं कि किसी
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यौन-रोग हरपीज़ के बारे में जानिए -- भाग 1.

मैं आज सुबह एक न्यूज़-रिपोर्ट पढ़ रहा था कि 14 से 49 वर्ष के आयुवर्ग अमेरिकी लोगों का लगभग 16 प्रतिशत भाग जैनिटल हरपीज़ (genital herpes) से ग्रस्त हैं। यौन संबंध के द्वारा फैलने वाला एक ऐसा रोग है जो हरपीज़ सिम्पलैक्स वॉयरस (herpes simplex virus) टाइप1
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कैंसर के केसों के ओव्हर-डॉयग्नोसिस का हुआ खुलासा

अकसर हम लोग यही जानते हैं कि कैंसर को जितनी शुरूआती अवस्था में पकड़ लिया जाए उतना ही बेहतर है। लेकिन मंजे हुये चिकित्सा वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि कैंसर का ओव्हर-डॉयग्नोसिस हो रहा है---इस का मतलब यह है कि ऐसे केसों की भी कैंसर से लेबलिंग कर
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फिलिंग पुरानी होने पर क्यों लगता है ठंडा-गर्म ?

अकसर हमारे पास ऐसे मरीज़ आते रहते हैं जो किसी ऐसे दांत में ठंडा-गर्म लगने की शिकायत करते हैं जिस में पहले ही से फिलिंग की जा चुकी होती है और यह फिलिंग अकसर बहुत वर्ष पहले करवाई गई होती है। वैसे तो किसी दांत में फिलिंग होने के बाद उस में ठंडा-गर्म लगने के
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यह कैसा कचरा प्रबंधन है ?

आज जब मैं प्रातःकाल भ्रमण के लिये निकला तो रास्ते में मेरा मूड बहुत ज़्यादा खराब हुआ....अकसर सड़कों पर बिल्कुल छोटे छोटे पिल्ले मस्ती करते दिख जाते हैं--आज भी तीन-चार ऐसे ही मदमस्त पिल्लों की टोली की तरफ मेरा ध्यान गया जो अपनी मस्ती में मस्त थे और मुझे
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युवतियों के यौन-अंगों को विकृत करने का घोर निंदनीय रिवाज

मैं जब जिह्वा की, होठों की एवं नेवल-पियरसिंग के बारे में पढ़ता सुनता था तो अजीब सा लगता था क्योंकि इस तरह की बॉडी-पार्ट्स की पियरसिंग के अकसर कंप्लीकेशन्स होते ही हैं। मैंने बहुत अरसा पहले कुछ पढ़ा तो यह भी था कि कुछ आदिवासी क्षेत्रों में किस तरह से
Apr 22 2010 06:45 PM
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ज्यादा पका हुआ मीट बढ़ा देता है ब्लैडर कैंसर का रिस्क

यह तो हम सब जानते ही हैं कि कम पका हुआ (undercooked meat) मीट खाने से फूड-प्वाईज़निंग के साथ ही साथ अन्य कईं तरह की बीमारियां होने का भी रिस्क रहता है। लेकिन ज़्यादा पका हुआ मीट भी क्या सेफ़ है! -- इस से मूत्राशय का कैंसर होने का खतरा दोगुना हो जाता है।
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रोज़ाना आ रही है यौन रोगों की सुनामी

यौन रोग ( सैक्सुयली ट्रांसमिटेड इंफैक्शन्ज़) के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि बैक्टीरियल एस.टी.डी के लगभग 10 लाख नये केस रोज़ाना हो जाते हैं। इन के बारे में छोटी छोटी बातें हैं जो कि अकसर आम आदमी ठीक से समझ नहीं पाता या शायद उसे कभी इस
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आ गया है ......पाकेट साईज़ अल्ट्रासाउंड

दो महीने पहले ही GE कंपनी ने एक पाकेट साइज़ अल्ट्रासाउंड को लांच किया है। इस का वज़न केवल एक पांड है। और इसे डाक्टर स्टैथोस्कोप की तरह अपने साथ ही ऱख सकेंगे ताकि ज़रूरत पड़ने पर तुरंत मरीज़ का अल्ट्रासाउंड कर के उस का निदान किया जा सके। इस से मरीज़ों को