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31 Dec 2009
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नाम,काम, शौक

नाम : इंसान काम : स्वार्थ शौक : कपट अनुभव : इंसानियत को मारना इच्छा ? महत्वाकांक्षा : पता नही समस्त वातावरण शोकातुर. एक घटना घट गयी है,यहा. एक इंसान ने इंसान का खून किया है. बाकी सब इंसान स्तब्ध है. इंसान मर गया. मगर ऊसे मारनेवाला इंसान कौन? ग़मगीन न
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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संसार के महा प्रश्न

संभवतया हम मे से कुछ ही मनुष्य होंगें जिन्होनें गंभीरता से कभी इन प्रश्नों को ना सोचा हो, लेकिन शायद ही कभी किसी को अपने इन सवालों का सही जबाब मिला हो. 1. सबसे बड़ा सवाल क्या ईश्वर का कोई अस्तित्व है ?या केवल जड़ तत्व और उर्जा(इनर्जी) के अलावा कुछ नह
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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खुला आकाश

पंखों पे अपने क्यों तुम्हें विश्वास ही नही आकाश का तुमको जरा अहसास ही नहीं दीवारों दर से भी न कहें किससे हम को हाल और कोई पास ही नहीनी जिंदगी की राह में हैं हर तरह के पेड़इसमें बबूल भी हैं अमलतास ही नहींअपने गमों के दौर की लम्बी है दास्तानअपनी खुशी क
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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जीने का हक

पावन बाइबिल में जब ख़ुदा ने मिट्टी से इन्सान बनाया और उसे जन्नत में बसाया तो उसे आदम (प्रथम मानव) के अकेलेपन पर तरस आया तब ख़ुदा ने उसे गहरी नींद में सुलाकर उसकी पसलियों में से एक को निकाल कर उसे औरत का रुप दिया और उसे आदम का साथी बनाया जीवन की गाड़ी
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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माँ

माँ" "गर खुदा कहे किज्न्नत का जलवा है मेरी पनाहों में... तो मैं कहूँ ,वहाँ भी किसी 'माँ' की हस्ती होगी,नज़ारे कितने भी हो मौसम-ए-दुनिया के रहबर, हर पहलू मे 'माँ' की कायनात होगी"
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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ढ़पली

 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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चायघर में जश्न

मेरे अग्रज ब्रिजेश जी की कल 22 फरबरी को शादी है, हालांकि में उसमे जा नही पा रहा हूँ मेरी तरफ़ से ब्रिजेश जी को शादी की मुबारकबाद कुछ दिनों से ब्लॉग पर कम लिख रहे ब्रिजेश जी के चायघर में अब जल्द मिठास बढ़ने वाली है। यदि आप भी ब्रिजेश जी को बधाई देना च
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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चायघर में जश्न

 
अनुराग मिश्र
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बेरोजगार

देवेश मेरे दोस्त है, वे ङिजनी और बच्चों लिये स्क्रिप्ट लिखते है, जर्मन , चायनीज फिल्म महोत्सव में उनकी शोर्ट फिल्में दिखाई जा चुकी है। इंटरनेशनल फिल्म महोत्सव मेंविधवाओं के ऊपर बनी शोर्ट फिल्म के लिए उन्हें पुरस्कार मिला है। उनकी ये कविता आप भी पढिये
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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कामना

हर कामना में विजय का आभास लिए अपने मन में एक नया विश्वास लिए है जंग बहुत लंबी दिल में जीतने की उम्मीद भरी कभी लगती है डगर सपनों वाली है माना स्वपन की भाषा खुशबू सही पर जिंदगी की भाषा तो निर्मल पानी है दोनो ही भाषा है अकल्पनीय, अकथित लेकिन दीपक कि भाष
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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अरुण आदित्य

युवा कवि अरुण आदित्य के बारे में सुना तो था, पड़ा भी था। पर उनसे मिलने के बाद उन्हें और उनकी कविताओं को एक अलग नज़रिये से देखने का मौका मिला। उनकी यह कविता आप भी पढिए इंटरव्यू आपकी जिन्दगी का सबसे बड़ा स्वपन क्या है आसान सा सवाल पर मै हड़बड़ा गया घबराहट
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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मैं पत्रकार बन गया

मैंने कभी पैसा कमाने की कोशिश नहीं की क्योंकि मुझे पता है की सिक्कों की खनखनाहट आदमी को बहरा कर देती है मैंने कभी दोस्त बनाने की कोशिश नहीं की क्योंकि मुझे पता है कि दोस्त भावनाएं पैदा कर देते है मैंने कभी रिश्ते बनाने की कोशिश नहीं की क्योंकि मुझे प
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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मजबूरी

कफस में रहकर खुला आसमान भूल गया हूँ, इस बेजान शहर में अपनी उडान भूल गया हूँ।
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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विवेक भटनागर की ग़ज़लें

विवेक भटनागर शांत वाणी और मधुर स्वाभाव के विवेक भटनागर अमर उजाला में सम्पादकीय टीम के सम्मानित सदस्य हैं, यह शख्सियत कविता और ग़ज़ल में माहिर है, इनकी रचनाओ में स्वस्थ परंपरा और ताजगी का एहसास तो है ही, गज़ब कि संवेदनशीलता भी है थोडे में कहा जाये, तो
 
अनुराग मिश्र
Dec 29 2009 11:55 AM
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खंडहर होते सपने

पत्रकारिता की दहलीज़ पर जब कोई नौनिहाल जोश, जज्बे और उम्मीद के साथ कदम रखता है, तो शुरुआत मे उसे ये दुनिया हसीं लगती है, लेकिन समय बीतने के साथ हकीकते खुद सामने आ जाती है, उसके सपने किसी रेत के महल की तरह भरभरा कर गिर जाते है बडे लगन और त्याग से पढाय
 
अनुराग मिश्र
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Petrol Price Hike…

Petrol Price Hike…Nowadays the petrol price hike is spoken as a big issue. Many are against the price hike. But I feel that the price of the petrol must be still increased in our country… The profit which the government gets because of the petrol price
 
अनुराग मिश्र
May 31 2008 05:29 PM